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  • Pages: 208
  • Year: 2018, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9789388211055
  •  
    क्या अब देश में शहर ही रहेंगे ? गॉव उजड़ जायेंगे ? अथवा गॉव अल्पशिक्षितों, अशिक्षितों और मूखों से भर जायेंगे ? क्या गॉव महाभारत का अखाडा बन जायेगे ? आज क्यो गाँवों के लोग विस्तृत जगह-जमीन और बडे मकान छोड़कर शहर में भागने के लिए बाध्य हैं ? वहाँ के संकुचित और तंग जीवन को पसन्द करने के लिए कुछ विशेष लाचार और मज़बूर क्यों हैं ? इसका समाधान 'त्रिकोण' उपन्यास में पूर्णत: मिलेगा | आज छुआछूत और ऊँच-नीच की भावनाएँ मिटी है परन्तु जातिवाद और खटिया अपनी जगह मुकम्मल और अडिग है । त्रिक्रोण उपन्यास दोनों के बीच एक परी की तरह स्थित र्गोंवों के दोनों कालखंडो के विश्लेषण और समाधान में अनोखा और विलक्षण हैं ।

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    Ramkeval Sharma

    रामकेवल शर्मा

    जन्म : 21-11-1955 ग्राम-बरडीहा,
    डाकघर-माटीगाँव, जनपद-चन्दौली (वाराणसी) उ.प्र. ।
    शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी) बी.एड. , पी-एच-डी., साहित्यचार्य ।
    कृतियाँ : कहानी-, संग्रह-कापर करूँ सिंगार, चितवन की छाँव । उपन्यास- गाँव की ओर, चन्द्रेश्वरदास, कड़ाह की ताई,
    गजाला । बहुत-सी कहानियाँ और निबन्ध देश-विदेश के पत्र-पत्रिकाओँ में प्रकाशित ।
    सम्मान : हिन्दी भाषा-भूषण (राजस्थान) से विभूषित ।

    सम्प्रति : अवकाश प्राप्त शिक्षक एबं गॉव में रहकर स्वतंत्र लेखन ।

     

     


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