• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Trimurti

Trimurti

Availability: In stock

-
+

Regular Price: Rs. 40

Special Price Rs. 36

10%

  • Pages: 129p
  • Year: 2007
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180311949
  •  
    ‘‘तुम नहीं समझतीं सुगन्धा, मैं हकीकत बयान कर रहा हँू। सुन्दर स्त्री के विषय में पुरुष में सहज ही आकर्षण विद्यमान रहता है।’’ ‘‘होगा।’’ ‘‘इसीलिए तो कह रहा हूँ कि जो स्वाभाविक बात है उसे स्वाभाविक समझो और आगे की सोचो।’’ ‘‘मुझे तो उस पाजी की नीयत साफ नहीं दिखाई देती।’’ ‘‘न हो नीयत साफ, तुम्हारा क्या बिगड़ेगा। वह काम देने के लिए कह रहा है। काम ले लो और उल्लू सीधा करो।’’ ‘‘लानत है ऐसे पैसे पर।’’ ‘‘फिर नहीं समझी, मैं कह रहा हँू, जो उल्लू बनता है उसे उल्लू बनाओ, मैं समझता हूँ कि कोई भी स्त्री बिना अपनी शालीनता खोए किसी भी पुरुष को उल्लू बना सकती है, तुमसे भी मैं यही चाहता हँू।’’ ‘‘और यही मैं नहीं करूँगी, कान खोलकर सुन लो। तुम पुरुष हो, पुरुष की लोलुपता के प्रति तुम्हें सहानुभूति हो सकती है पर नारी के लिए वह एक अपमान की बात है। मैं अपने नारी सुलभ शील को दाँव पर लगाना नहीं चाहती, समझे, दुबारा ऐसी बात मँुह से निकाली तो ठीक न होगा।’’ ‘‘तुम तो एकदम फूहड़ स्त्री-सी बातें कर रही हो।’’ ‘‘मैं फूहड़ ही सही - तुम्हें तुम्हारी सभ्यता मुबारक हो, परन्तु सुगन्धा के विषय में ऐसी बात फिर कभी न सोचना। इसे अच्छी तरह से समझ लो।’’

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    R. Sh. Kelkar

    R. Sh. Kelar

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna
    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144