• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Upari Gangaghati Dwitiya Nagarikaran

Upari Gangaghati Dwitiya Nagarikaran

Availability: In stock

-
+

Regular Price: Rs. 595

Special Price Rs. 536

10%

  • Pages: 164
  • Year: 2017, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9789352211890
  •  
    ऊपरी गंगा के मैदान में नगरीकरण से सम्बंधित ज्ञान के मुख्या आधार साहित्यिक साक्ष्यों के साथ-साथ पुरातात्त्विक अन्वेषण एवं उत्खनन है ! भारत में नगरों के आविर्भाव कि प्राचीनता ताम्राश्म काल में हड़प्पा एवं मोहनजोदड़ो नमक स्थानों पर बने हुए नगरों के सन्निवेश तथा उनके सामाजिक एवं आर्थिक जीवन के दृष्टान्तों से सिद्ध हो जाती है, किन्तु द्वितीय सहस्त्राब्दी ईसा पूर्व के मध्य में सैन्धव सभ्यता के विनाश के साथ ही सम्पूर्ण भारत पुनः ग्राम्य संस्कृति में लौट आया तथा एक हजार वर्षों के लम्बे अंतराल के पश्चात छठी शताब्दी ईसा पूर्व में, गंगा के मैदान में षोडश महाजनपदों का उद्भव राजनितिक इकाइयों के रूप में उत्तर भारत में हुआ छठी शताब्दी ईसा पूर्व का काल उत्तर भारत में अनेकानेक नवीन परिवर्तनों का काल था तथा ये परिवर्तन जीवन के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में दिखायी देते हैं ! इसे द्वितीय नगरीकरण कि संज्ञा दी गयी है ! पुरातात्त्विक भाषा में इसे उत्तरी कृष्ण मार्जित पत्र परंपरा संस्कृति के प्रारंभ का काल माना जा सकता है ! इस शोध प्रबंध के माध्यम से ऊपरी गंगा के मैदान के पुरातात्तिव्क अनुक्रम का तथा द्वितीय नगरीकरण से सम्बंधित नगरीय साक्ष्यों का क्रमबद्ध एवं सुव्यवस्थित ऐतिहासिक एवं पुरातात्त्विक अध्धयन प्रस्तुत करने का यथासंभव प्रयास किया गया है !

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna
    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144