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Vishwarath : Vishwamitra

Vishwarath : Vishwamitra

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  • Pages: 199
  • Year: 2018, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9789388211215
  •  
    श्री कृष्णकान्त 'एकलव्य' के प्रबन्ध काव्य ‘विश्वस्थ’ से गुजरना सुखद लगा। दरअसल जब पौराणिक कथा काव्य-रचना के लिए ली जाती है तो वह अपने मूल रूप में होकर भी समय के अनुसार कुछ परिवर्तित होती है। कवि उस पुरां-कथा के माध्यम से अपने समय के सत्य को उदघाटित करता है। कवि इसीलिए पुराण या इतिहास की ऐसी कथाएँ या पात्र लेता है जिनमें नये समय के साथ जुड़कर कुछ नया कहने की क्षमता हो। वशिष्ठ और विश्वामित्र ऐसे महर्षि हैं जिनके चरित्रों की अलग-अलग छवियाँ हैं जो परस्पर टकराती भी हैं। 'एकलव्य' जी ने इन्हीं दो महर्षियों के माध्यम से आज के समय में व्याप्त अनेक समस्याओं को रूपायित किया है और कथा को समकालीनता की दीप्ति देकर अधिक प्रासंगिक बना दिया है। -रामदरस मिश्र

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    Krishnakant Eklavya

    कृष्णकान्त 'एकलव्य’

    जन्म : जनपद जौनपुर (उ.प्र. ) के एक गॉव में 28 नवम्बर 1940 ।

    शिक्षा : ग्रामीण अंचल में माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शिक्षा के बाद शहर में आकर हिंन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर उपाधि ग्रहण किये ।

    गतिविधियाँ : जीवन-यात्रा एक अध्यापक के रूप में प्रारम्भ होते ही राजकीय सेवा में चयनित होकर बाहर चले गये, किंन्तु राजकीय सेवा की विपरीत परिस्थितियों में भी निरन्तर रचनारत एक दर्जन से भी अधिक कृतियों की रचना और प्रकाशन करते रहे ।

    साहित्य सेवा : शि.ए.न. कुर्सी का स्वर्ग, सीता का अग्निवेश, स्मृति के झरोखे के अतिरिक्त व्यंग्य-शिल्प में छिपकली की लाश, लोकतन्त्र से भोग तन्त्र तक , एकलव्य के व्यंग्य-बाण, पूर्वान्चल का हास्य-व्यंग्य, स्मृति शेष), हास्य व्यंग्य पुरोधा, हिन्दी की प्रमुख लेखिकाएँ विशेष उल्लेखनीय कृतियाँ हैं ।

    पुरस्कार : उत्तर प्रदेश सहित क्रमश: दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, बिहार प्रान्त की प्रमुख हिन्दी संस्थाओ द्वारा पुरस्कृत है ।

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