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Yamgatha

Yamgatha

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  • Pages: 107p
  • Year: 1995
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: YAMGATHA364
  •  
    'यमगाथा' पुरूरवा-उर्वशी के मिथक की नई अर्थ-उद्भावना है। क्योंकि यज्ञ विध्वंसक पुरूरवा ऋग-वैदिक समाज में व्याप्त शोषण-तंत्र के विरुद्ध युद्धरत दिखाई देता है। क्योंकि सत्ता के पोषक इन्द्र, पुरोहित, ऋषि-कुल, क्षत्रिय राजे, गंधर्व—सभी एकजुट होकर पुरूरवा का विरोध करते हैं। क्योंकि अनार्य ब्राह्मण वसिष्ठ के सहयोग से पुरूरवा यज्ञ-तंत्र के खिलाफ विद्रोह करता है। विद्रोह की यही आधुनिक अवधारणा पुरूरवा के शीलांकन को सर्वथा एक नयी दिशा—नया अर्थ देकर हमारे आज के समाज और आधुनिक चिन्तन से जोड़ देती है, उसे सामान्य जन की आकांक्षा का लोकनायक बना देती है। ऋग-वैदिक समाज में विकसित असह्य सत्ता और उसके छल-छंदों के विवरण से अनायास हमारा आज का भारतीय समाज प्रतिभासित हो उठता है और पुरूरवा जैसे विद्रोही की न्याय-सिद्ध हत्या के रहस्य का पर्दाफाश होता है। असहमति और विद्रोह की अवधारणा की व्याख्या और विश्लेषण के क्षेत्र में 'यमगाथा] एक पहल है और रंग-कर्म के क्षेत्र 'एपिक-शिल्प] की वकालत करता है। दूधनाथ सिंह ने इस जटिल भाव-तत्त्व को गहन और भव्य नाट्य रूप देते समय एक ऐसी भाषा का सृजन किया है जो हिन्दी नाट्य-साहित्य को गति और गरिमा देने में समर्थ है।

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    Doodhnath Singh

    दूधनाथ सिंह

    जन्म : 17 अक्टूबर, 1936, उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के एक छोटे-से गाँव सोबंथा में !

    शिक्षा : एम्.ए. (हिंदी साहित्य), इलाहबाद विश्वविद्यालय !

    जीविका : कुछ दिनों (1960-62) तक कलकत्ता में अध्यापन ! फिर इलाहबाद विश्वविद्यालय, हिंदी विभाग में ! अब सेवानिवृत !

    लेखन : सन 1960 के आसपास से !

    कृतियाँ : आखिरी कलाम, निष्कासन, नमो अन्धकार (उपन्यास); सपाट चहरे वाला आदमी, सुखांत, प्रेमकथा का अंत न कोई, माई का शोकगीत, धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे, तू फू (कहानी-संग्रह); कथा समग्र (सम्पूर्ण कहानियां); यम्गाथा (नाटक); अपनी शताब्दी के नाम, एक और भी आदमी है, युवा खुशबू (कविता-संग्रह); सुरंग से लौटते हुए (लम्बी कविता); निराला : आत्महंता आस्था (निराला की कविताओं पर एक सम्पूर्ण किताब); लौट आ, ओ धर! (संस्मरणात्मक मुक्त गद्य); कहा-सुनी (साक्षात्कार और आलोचना); महादेवी (महादेवी की सम्पूर्ण रचनाओं पर एक किताब) !

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