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21vi Shati Ka Hindi Upanyas

21vi Shati Ka Hindi Upanyas

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10%

  • Pages: 404p
  • Year: 2015
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183617888
  •  
    Digital Edition Available Instantly on Pajkamal Books Library on
    21वीं शती का हिंदी उपन्यास एक ही अध्येता द्वारा उपन्यास-साहित्य के समग्र का परिक्षण कर विशिष्ट कृति के मूल्यांकन की परंपरा का प्रायः अभाव है ! एकाध प्रयत्न को छोड़कर उपन्यास-आलोचना में बड़ा शून्य है ! इसी शून्य को भरने का प्रयास सुप्रसिद्ध वरिष्ठ आलोचक डॉ. पुष्पपाल सिंह प्रणीत इस ग्रन्थ में हुआ है जिसमें 21वीं शती के उपन्यास-साहित्य की समग्रता में प्रवेश कर, 2013 (के मध्य तक) के प्रकाशित उपन्यासों पर गंभीरता से विचार का सुचिंतित निष्कर्ष प्रतिपादित किए गये हैं ! उपन्यासों के कथ्य की विराट चेतना पर विचार करते हुए दर्शाया गया है कि आज उपन्यास का क्षितिज कितना विस्तृत हो चुका है ! भूमंडल की कदाचित कोई ही ऐसी समस्या होगी जिस पर हिंदी उपन्यास में विचार नहीं हुआ हो ! भूमंडलीकृत आर्थिकता (इकॉनमी) तथा अमेरिकी संस्कृति के वर्चस्व ने न केवल भारत अपितु पूरी दुनिया में जो खलबली मचा राखी है, उस सबका सशक्त आकलन ‘21वी शती का हिंदी उपन्यास’ प्रस्तुत करता है ! उपन्यास का चिंतन और विमर्श पक्ष इतना सशक्त है कि उस सबके चुनौतीपूर्ण अध्ययन में पुष्पपाल सिंह अपने पुरे आलोचकीय औजारों और पैनी भाषा-शैली के साथ प्रवृत्त होते हैं ! उपन्यास के ढांचे, रूपाकार में भी इतने व्यापक प्रयोग इस काल-खंड के उपन्यास में हुए हैं जिन्होंने उपन्यास की धज ही पूरी तरह बदल दी है ! उपन्यास की शैल्पिक संरचना पर हिंदी में ‘न’ के बराबर विचार हुआ है, प्रस्तुतु अध्ययन में विद्वान लेखक ने उपन्यास की शैल्पिक संरचना के परिवर्तनों का भी सोदाहरण विवेचन कर विषय के साथ पूर्ण न्याय किया है ! लेखक ने उपन्यास के विपुल का अध्ययन कर उसके श्रेष्ठ के रेखांकन का प्रयास किया है किन्तु फिर भी अपने निष्कर्षों पर अड़े रहेने का आग्रह उनमें नहीं है, वे सर्वत्र एक बहस को आहूत करते हैं !उपन्यास-आलोचना के सम्मुख जो चुनोतियाँ हैं, उन पर भी प्रकाश डालते हुए एक विचारोत्तेजक बहस का अवसर दिया गया है ! पुस्तक के दूसरे खंड-विशिष्ठ उपन्यास खंड में वर्षानुक्रम से अड़तीस विशिष्ट उपन्यासों का अध्ययन प्रस्तुत किया गया है ! इन उपन्यासों की समीक्षा-शैली में इतना वैविध्य है कि वह अपने ढंग से हिंदी आलोचना की नई समृद्धि प्रदान करता हुआ लेखकीय गौरव की अभिवृद्धि करता है ! पुष्पपाल सिंह की यह कृति निश्चय ही हिंदी आलोचना को एक अत्यंत महत्तपूर्ण अवदान है !

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    Pushppal Singh

    जन्म : 4 नवम्बर, 1941, भदस्याना (मेरठ, उ.प्र.)

    शिक्षा : कलकत्ता विश्वविद्यालय, कलकत्ता से डी.फिल.—'बीसवीं शती कृष्ण-कथा-काव्य’ शीर्षक शोध प्रबन्ध प्रकाशित, जम्मू विश्वविद्यालय, जम्मू से डी.लिट्.—'समकालीन कहानी : युगबोध का सन्दर्भ’, एम.ए.—मेरठ कॉलिज, मेरठ (कमला चौधरी पदक) पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला से हिन्दी विभाग के प्रोफेसर तथा अध्यक्ष के रूप में सेवा-निवृत्ति।

    प्रमुख समीक्षा-ग्रंथ :

    1. आधुनिक हिन्दी कविता में महाभारत के कुछ पात्र

    2. काव्य-मिथक

    3. आधुनिक हिन्दी साहित्य : विकास के विविध सोपान

    4. कमलेश्वर : कहानी का सन्दर्भ (मैमिलन एंड कं) पंजाब सरकार द्वारा वर्ष 1979 की सर्वश्रेष्ठ आलोचनात्मक कृति के पुरस्कार से सम्मानित, दूसरा संस्करण-पुस्तकायन, अंसारी रोड, नई दिल्ली-2

    5. समकालीन कहानी : युगबोध का सन्दर्भ (नेशनल पब्लिशिंग हाउस, नई दिल्ली), वर्ष 1986 की सर्वश्रेष्ठ आलोचना-कृति, पंजाब सरकार पुरस्कार।

    6. समकालीन कहानी : रचना-मुद्रा (राधाकृष्ण प्रकाशन, नई दिल्ली), 1986 उ.प्र. सरकार द्वारा आचार्य रामचन्द्र शुक्ल पुरस्कार से सम्मानित।

    7. समकालीन कहानी : सोच और समझ (आत्माराम एंड संज़, दिल्ली), 1986।

    8. समकालीन हिन्दी कहानी (स्वातंत्रयोत्तर कहानी से अद्यतन), 1987. हरियाणा साहित्य अकादमी, चण्डीगढ़, वर्ष 1987 की सर्वश्रेष्ठ आलोचना-कृति, पंजाब सरकार द्वारा पुरस्कृत।

    9. बीसवीं शती कृष्ण कथा-काव्य (भाषा विभाग, पंजाब)।

    10. हिन्दी कहानी : विश्वकोश, प्रथम खंड, सूर्य भारती प्रकाशन, दिल्ली- 6, 1995।

    11. कबीर ग्रन्थावली सटीक (सम्पूर्ण कबीर ग्रन्थावली का हिन्दी में सर्वप्रथम भाष्य, छब्बीस संस्करण समाप्त)।

    12. भ्रमरगीत सार : समीक्षा और व्याख्या (द्वितीय संस्करण)।

    13. हिन्दी गद्य : इधर की उपलब्धियाँ (वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली), 2004.

    14. समकालीन कहानी नया परिप्रेक्ष्य (सामयिक प्रकाशन, नई दिल्ली), 2011.

    15. भूमंडलीकरण और हिन्दी उपन्यास (राधाकृष्ण प्रकाशन, नई दिल्ली) 2012

    16. वैश्विक गाँव और आम आदमी (भारतीय ज्ञानपीठ, नई दिल्ली) 2012

    17. हिन्दी कहानीकार कमलेश्वर : पुनर्मूल्यांकन (किताबघर, नई दिल्ली) 2012

    18. कहानी का उत्तर समय : सृजन-सन्दर्भ (सामयिक प्रकाशन, नई दिल्ली) 2013

    19. रवीन्द्रनाथ त्यागी-विनिबन्ध, साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली-1, 2010

    सर्जनात्मक कृति :

    20. तारीख़ का इन्तज़ार (कहानी-संग्रह)-राधाकृष्ण प्रकाशन, नई दिल्ली, कहानियों के अनुवाद : मराठी, बांगला, मलियाली, पंजाबी आदि भाषाओं में

    21. 'जुग बीते, युग आए’ (2008), रेमाधव प्रकाशन, गाजि़याबाद। मराठी में अनुवाद, प्रथम संस्करण समाप्त

    प्रमुख सम्पादन :

    22. हिन्दी की क्लासिक कहानियाँ : छह खंड-हार्पर कॉलिंस, नोएडा, 2013 हिन्दी कहानी के 110 वर्षीय इतिहास के श्रेष्ठ कहानी साहित्य का रेखांकन

    23. 'सुनीता जैन समग्र’-14 खंड, रेमाधव पब्लिकेशंस, गाजि़याबाद (2010)

    24. भारतीय साहित्य के स्वर्णाक्षर : प्रेमचन्द, जयशंकर प्रसाद, रेमाधव पब्लिकेशंस योजना

    25. हिन्दी का प्रथम उपन्यास : देवरानी जेठानी की कहानी, रेमाधव पब्लिकेशंस, गाजि़याबाद (2006)

    अनुवाद-कार्य :

    26. समकालीन पंजाबी प्रतिनिधि कहानियाँ, पंजाबी से हिन्दी में अनुवाद, पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला से प्रकाशित

    27. 'सरबत दा भला’, करतार सिंह दुग्गल के पंजाबी उपन्यास का अनुवाद, पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला से प्रकाशित।

    प्रमुख अलंकरण : 'साहित्य-भूषण’ (उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान), 2013 आचार्य रामचंद्र शुक्ल पुरस्कार, (उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान), 1986 शिरोमणि साहित्यकार पुरस्कार (पंजाब सरकार, भाषा विभाग), 2005 वर्ष की सर्वश्रेष्ठ कृति का पुरस्कार (पंजाब सरकार, भाषा विभाग), चार बार

    सम्मान : नौवें विश्व हिन्दी सम्मेलन, जोहान्सबर्ग, दक्षिण अफ्रीका (सितम्बर 2012) में भारत सरकार, विदेश मंत्रालय, की ओर से सहभागिता।

    संपर्क : अरुणाभ # 63, केसरबाग, पटियाला।

    फ़ोन : (0175) 232-2424

    मोबा. : 094178.65651

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