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  • Pages: 196p
  • Year: 2019, 8th Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788171195343
  •  
    ‘अछूत’ मराठी के दलित लेखक दया पवार का बहुचर्चित आत्मकथात्मक उपन्यास है, जो पाठकों को न केवल एक अनबूझी दुनिया में अपने साथ ले चलता है बल्कि लेखन की नयी ऊँचाई से भी परिचित कराता है। कथाकार दया पवार इस रचना के पात्र तथा भोक्ता दोनों ही हैं। इस उपन्यास में पिछड़ी जाति में जन्मे एक व्यक्ति की पीड़ाओं का द्रवित कर देनेवाला किस्सा-भर नहीं है, महाराष्ट्र की महार जाति का झकझोर देनेवाला अंदरूनी नक्शा है। कथाकार ने छुटपन से वयस्क होने की संघर्ष-यात्राओं को बड़ी बारीकी से लेखनीबद्ध किया है। उसकी दृष्टि उन मार्मिक स्थलों पर अत्यन्त संवेदनशील हो जाती है, जो आभिजात्य तथा वादपरक आग्रहों के कारण उपेक्षित कर दिये जाते रहे हैं। यही कारण है कि इस रचना में वर्णित पिता मजबूत इंसान, समर्पित कलाकार, पिसता हुआ गोदी मजदूर और ओछा-चोट्टा सभी एक साथ हैं। माँ अत्यन्त अपमानजनक स्थितियों को नकारते हुए भी सभी कुछ को अनदेखा कर देती है। मित्रों, पड़ोसियों और आर्थिक दृष्टि से विपन्न लोगों का जीवन कठोर होते हुए भी अत्यन्त रस-रंग भरा है। राजनीति में Ðास का वातावरण मौजूद रहते हुए भी उसकी सार्थक भूमिका खोजी जा रही है। ‘अछूत’ साधारण लोगों की असाधारण गाथा है। आद्यंत पठनीय तथा मन को भीतर तक छू लेनेवाली रचना।

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    Daya Pawar

    शीर्षस्थ दलित लेखक, कवि और समीक्षक।

    1935 में जन्म।

    पश्चिम रेलवे के लेखा विभाग से दीर्घ सेवा के बाद निवृत्ति।

    1974 प्रकाशित प्रथम कविता संग्रह ‘कोंडवाड़ा’ (काँजी हाउस)  को महाराष्ट्र शासन पुरस्कार। उसके बाद आत्मकथ्य ‘बलुतं’ (अछूत - 1979) को कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए और कई भाषाओं में उसके अनुवाद हुए।

    1983 में प्रकाशित कहानी-संग्रह ‘विटाल’ (अपवित्र) और ‘चावड़ी’ (पंचायत) से दलित सृजनात्मक संवेदनशीलता के नए आयाम नजर आए। उन्होंने भगवान बुद्ध के धम्मपद से कुछ गाथाओं का सीधा पाली से मराठी में अनुवाद किया है जो 1991 में प्रकाशित हुआ है।

    श्रीलंका, फ्रांस, जर्मनी तथा अन्य कई विदेश यात्राएँ।

    1996 में दिल्ली में आकस्मिक देहान्त।

     

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