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Amiri Rekha

Amiri Rekha

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  • Pages: 123P
  • Year: 2019, 2nd Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183614481
  •  
    न्याय और अन्याय, अभाव और रईसी, इच्छा और यथार्थ, पुरातन और नई सभ्यता जैसे अनेक विलोम प्रत्ययों के बीच वैचारिक आवागमन को ये कविताएँ अप्रत्याशित अनूठेपन एवं द्वंद्वात्मकता के साथ संभव बनाते हुए नए प्रस्ताव प्रस्तुत करती हैं। यहाँ भाषा, विचार, नैतिकता और स्वप्नशीलता के साथ कलाकर्म की वही अप्रतिम सर्जनात्मकता दृष्टव्य है जिसे क्ु$मार अंबुज की कविता ने लगातार अर्जित किया है और अंबुज हर बार उसे नई ऊँचाइयों, अभिनव जगहों तक ले गए हैं। ये कविताएँ सक्रिय और सकर्मक प्रतिरोध की रचनात्मक कार्रवाई हैं। इनमें जीवन के संगीत, उत्तराधिकार, वैश्विकता, राजनीति, बाजार, मनुष्यता, प्रेम और अपमान की, हमारे समय और हमारी भाषा की पुनर्परिभाषाएँ हैं, उनकी आधुनिक पहचान है। साहसिक आत्मावलोकन और प्रवंचनाएँ भी हैं। इन कविताओं से अपने भीतर के टूटे-पू$टे मनुष्य की मरम्मत की जा सकती है। इन्हें इनके खुरदुरेपन के लिए प्यार किया जा सकता है और इस बात के लिए भी कि इनके भीतर कितना कुछ है - शांत, चपल और भविष्य से लबालब भरा हुआ। संवेदित, व्यग्र अभिव्यक्ति, अचूक दृष्टि और पक्षधरता से पुष्ट कविता कुमार अंबुज की अपनी उपलब्धि है, जिसे यहाँ समूची हिन्दी कविता के संदर्भ में कुछ अधिक शक्ति के साथ औचक, विस्मयकारी, दुर्लभ, हार्दिक और नव्यतर भंगिमाओं के साथ देखा जा सकता है। किंचित लंबे अंतराल और प्रतीक्षा के बाद प्रकाशित यह संग्रह, निश्चय ही नई बहसों, रुझानों, प्रस्थानों और चुनौतियों का कारण बनेगा।

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    Kumar Ambuj

    कुमार अंबुज

    जन्म : 13 अप्रैल, 1957, ग्राम मँगवार, गुना (मध्य प्रदेश)।

    शिक्षा : वनस्पतिशास्त्र में स्नातकोत्तर, कानून की डिग्री।

    प्रकाशन : कविता-संग्रह—‘किवाड़’, ‘क्रूरता’, ‘अनन्तिम’, ‘अतिक्रमण’, ‘अमीरी रेखा’ और कहानी-संग्रह—‘इच्छाएँ’।

    ‘कवि ने कहा’ सीरीज़ में कविताओं का संचयन, ‘प्रतिनिधि कविताएँ’ सीरीज़ में विष्णु खरे द्वारा सम्पादित संचयन। वैचारिक लेखों की दो पुस्तिकाएँ—‘मनुष्य का अवकाश’ तथा ‘क्षीण सम्भावना की कौंध’।

    सम्मान : कविताओं के लिए मध्य प्रदेश साहित्य अकादेमी का माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार, भारतभूषण अग्रवाल स्मृति पुरस्कार, श्रीकान्त वर्मा पुरस्कार, गिरिजाकुमार माथुर सम्मान, केदार सम्मान और वागीश्वरी पुरस्कार।

    साहित्य अकादेमी, राष्ट्रीय नाट्य संस्थान, दूरदर्शन, आकाशवाणी सहित शीर्ष साहित्यिक संस्थाओं में रचना-पाठ। विभिन्न प्रतिनिधि समकालीन हिन्दी कविता के संचयनों में कविताएँ शामिल। केरल एस.सी.ई.आर.टी. एवं अन्य कुछ पाठ्यक्रमों में कविताएँ संकलित। कविताओं के रूसी, जर्मनी, अंग्रेजी, नेपाली सहित अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद। कवि द्वारा भी संसार के कुछ चर्चित कवियों की कविताओं के अनुवाद प्रकाशित।

    ‘वसुधा’ के कवितांक ‘इधर की कविता’ (1994) तथा गुजरात दंगों/नरसंहार पर विशेष पुस्तक ‘क्या हमें चुप रहना चाहिए?’ का सम्पादन (2002) । बैंककर्मियों की संस्था ‘प्राची’ के लिए अनेक पुस्तिकाओं तथा बुलेटिंस का संयोजन-सम्पादन।

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