• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Anubhuti

Anubhuti

Availability: Out of stock

Regular Price: Rs. 95

Special Price Rs. 85

11%

  • Pages: 98p
  • Year: 1999
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 10: 8171195237
  •  
    अमरेंद्र नारायण की पहली काव्य-रचना सिर्फ एक लालटेन जलती से अपनी विषयवस्तु, सहज अभिव्यक्ति एवं सूक्ष्म संवेदनशीलता के कारण बहुचर्चित एवं समादृत रही है । 'अनुभूति' इनकी दूसरी काव्य-पुस्तक है-कवि की स्वात्मगत अनुभूतियों का आक्षरिक आकलन! मानवीय यथार्थता का उद्‌भावक समसामयिक काव्य! किंतु इसकी काव्यगत वर्णन- शैली समकालीनों के निरावरण वर्णन से सर्वथा भिन्न मर्यादित शैली है, जिसमें एक श्रेष्ठ रचना की भाँति भारतीय संस्कृति की विराट्‌ता की गवेषणा के प्रति कवि ने स्वभावत: चिंतनशील एवं स्वस्थ दृष्टिकोण अपनाया है । कविता में उदात्त और साधारण, दोनों ही कवि के लिए ग्राह्य हुए हैं, जो उसकी अनुभवप्रौढ़ ललित लेखनी का स्पर्श पाकर अस्तित्ववान हो उठे हैं । भावनाप्रवण व संवेदनशील कवि अमरेन्द्र ने अपनी सजग एवं संयत सहानुभूति किसी वर्ग विशेष तक सीमित न रखकर मनुष्य-मात्र के अभाव, पीड़ा और बेदना या फिर सामाजिक असंगति और व्यवस्थागत विसंगति तक विस्तार किया है । कवि ने प्राय: सर्वत्र समाजवादी दार्शनिकता से अपनी स्वीकृत प्रतिज्ञा (थीसिस) का पल्लवन किया है । साथ ही, उसकी सहानुभूति आवश्यकतानुसार कहीं व्यंग्यगर्भा हुई है, तो कहीं-कहीं कड़वी दवा और निर्मम नश्तर भी बन गई है ।

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Amrendra Narayan

    अमेरन्द्र नारायण एशिया एवं प्रशान्त क्षेत्र के अन्तरराष्ट्रीय दूर संचाार संगठन एशिया पैसिफिक टेली कॉम्युनिटी के भूतपूर्व महासचिव एवं भारतीय दूर संचार सेवा के सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। उनकी सेवाओं की प्रशंसा करते हुए उन्हें भारत सरकार के दूरसंचार विभाग ने स्वर्ण पदक से और संयुक्त राष्ट्र संघ की विशेष एजेंसी अन्तर्राष्ट्रीय दूरसंचार संगठन ने टेली कॉम्युनिटी को स्वर्ण पदक से और उन्हें व्यक्तिगत रजत पदक से सम्मानित किया।

    श्री नारायण के अंग्रेजी उपन्यास—फ्रैगरेंस बियॉन्ड बॉर्डर्स  का उर्दू अनुवाद खुशबू सरहदों के पास  

    नाम से प्रकाशित हो चुका है। भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति महामहिम अब्दुल कलाम साहब, भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने इस पुस्तक की सराहना की है। महात्मा गांधी के चम्पारण सत्याग्रह और फिजी के प्रवासी भारतीयों की स्थिति पर आधारित उनका संघर्ष नामक उपन्यास काफी लोकप्रिय हुआ है। उनकी पाँच काव्य पुस्तकें—सिर्फ एक लालटेन जलती है, अनुभूति, थोड़ी बारिश दो, तुम्हारा भी, मेरा भी और श्री हनुमत श्रद्धा सुमन पाठकों द्वारा प्रशंसित हो चुकी हैं।

    श्री नारायण को अनेक साहित्यिक संस्थाओं ने सम्मानित किया है।

    सम्पर्क : शुभा आशीर्वाद

    1055, रिज रोड, साउथ सिविल लाइंस, 

    जबलपुर- 482001 (म.प्र.)

    ई-मेल : amarnar@gmail.com

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna
    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144