• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

Juloos Wala Aadami

Juloos Wala Aadami

Availability: Out of stock

Regular Price: Rs. 250

Special Price Rs. 225

10%

  • Pages: 403p
  • Year: 1997
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 10: 8171193277
  •  
    जुलूसवाला आदमी स्मृतिशेष कथाकार रमाकान्त का महत्वाकांक्षी उपन्यास है । उनके मन में इसे लिखने की रूपरेखा सन् 6० के दशक में बन चुकी थी. लेकिन इसका लिखा जाना उनके जीवन के अन्तिम दिनों तक जारी रहा । जुलूसवाला आदमी एक राजनीतिक उपन्यास है लेकिन उससे कहीं अधिक है आजादी से ठीक पहले और बाद के सामाजिक बदलाव की अकथ कथा । जुलूसवाला आदमी के सन्दर्भ में स्वयं कथाकार ने अपनी डायरी में यत्र-तत्र जो दर्ज किया है, परिचय के लिए वही अपने में पर्याप्त है । रमाकान्त जी के शब्दो में ' 'हमारे देश के स्वातन्त्र्योत्तर कोल मे व्यक्ति और समाज के जीवन की कथा कही है मैंने इस उपन्यास में । उपन्यास इतिहास का दस्तावेज नहीं होता । यह किसी कालखंड में जीवन की मूलधारा और व्यक्ति की चेतना के विकास का अंकन होता है । यही कहने का प्रयास है मेरा । '' ..जुलूसवाला आदमी कम्युनिस्ट पार्टी की/मैं राजनीतिक तिकड़मबाजी की नीति और संघर्षशील जनपक्ष के अंतर्विरोधों और उनके टकराव को उभारता है । मेरा नायक नेता नहीं बनना चाहता ।'. ' ''..जुलूस आगे बढ़ता रहता है और जुलूसवाला आदमी सब पीछे छोड़ता चलता है । जुलूस को कहाँ पहुँचना है, यह जानता है. पर कैसे. किन रास्तों से होकर गुजरेगा, यह नहीं जानता ।...'' .राधाकृष्ण. पाठकों को इस जुलूस में सहर्ष आमंत्रित करता है । इस उम्मीद के साथ कि जुलूसवाला आदमी का पाठक अन्तिम सफे तक रचनाकार का साथ देते हुए, जीवन में इस जुलूस से बहुत कुछ पाएगा भी 1

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Ramakant

    रमाकान्त

    जन्म: 2 दिसम्बर, 1931; ग्राम - बरौंधा, जिला - मिरजापुर (उत्तर प्रदेश)। शिक्षा: प्रयाग विश्वविद्यालय से 1951 में स्नातक। एम.ए. और एल.एल.बी. दोनों की पढ़ाई अधूरी रही।

    जीविकोपार्जन की शुरुआत इंडियन एयरलाइंस की नौकरी से। मन नहीं रमा तो पत्रकारिता में प्रवेश। दैनिक ‘आज’ (बनारस) और ‘जनयुग’ (नई दिल्ली) में कार्य। तत्पश्चात् सोवियत सूचना केन्द्र में कार्य। कुछ वर्षों बाद त्यागपत्र देकर स्वतंत्र लेखन और कुछ दिनों तक ‘क्रासाद’ नामक पाक्षिक का प्रकाशन-संपादन। 6 सितम्बर, 1991 को दिल्ली में निधन।

    प्रकाशित कृतियाँ: उपन्यास: तीसरा देश, छोटे-छोटे महायुद्ध, प्यादा फर्जी अर्दब, खोई हुई आवाज, दरवाजे पर आगे, उपसंस्कार, समाधान, टूटते-जुड़ते स्वर, जुलूसवाला आदमी।

    कहानी-संग्रह: जिन्दगी-भर का झूठ, उसकी लड़ाई कोई और बात, कार्लो हब्शी का सन्दूक, बीच के बीस बरस।

    एक उपन्यास और डायरी के कुछ खंड प्रकाश्य।

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna
    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144