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Bharat Ka Rashtriya Pakshi Aur Rajyo Ke Rajya Pakshi

Bharat Ka Rashtriya Pakshi Aur Rajyo Ke Rajya Pakshi

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  • Pages: 376p
  • Year: 2013
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183613187
  •  
    पक्षियों की दुनिया बड़ी आकर्षक, मनोहारी और रंगबिरंगी है। विश्व में लगभग 8,650 जातियों के पक्षी पाए जाते हैं। इनमें से 1,200 जातियों के पक्षी भारत में मिलते हैं। भारत में पाए जाने वाले पक्षियों में 900 जातियों के पक्षी स्थानीय हैं तथा 300 जातियों के पक्षी प्रवासी हैं। ये सर्दियों के मौसम में हिमालय के पार के देशों से भारत आते हैं और अक्टूबर से मार्च तक भारत में रहते हैं। भारत में पाए जाने वाले पक्षियों में 180 जातियों के पक्षी ऐसे हैं, जो पूरी तरह भारतीय हैं। इनकी उत्पत्ति और विकास भारत में ही हुआ है। भारत का सबसे बड़ा पक्षी सारस क्रोंच है। इसकी ऊँचाई डेढ़ मीटर से भी अधिक होती है। भारत का सबसे छोटा पक्षी एक फूलचुकी (प्लेन कलर्ड फ्लावर पेकर) है। इसकी लम्बाई 7 सेंटीमीटर से अधिक नहीं होती। यह भारत की सबसे हल्की चिड़िया है। इसका वजन 4.5 ग्राम से अधिक नहीं होता। भारत की सबसे भारी चिड़िया सोनचिरैया (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) है। इसका वजन 13 किलोग्राम से भी अधिक होता है। भारत का सबसे सुन्दर पक्षी मोर है। इसके बाद मोनाल का स्थान है। छोटे पक्षियों में शकरखोरा (सन बर्ड) को सर्वाधिक सुन्दर पक्षी माना जाता है। देशी कौआ और गौरैया लगभग पूरे भारत में पाए जाते हैं। इनकी संख्या भी बहुत अधिक है। इसके विपरीत मैना और बुलबुल भी कुछ ऐसी जातियाँ हैं, जो सर्वाधिक संकटग्रस्त हैं। पिछली अनेक शताब्दियों से विश्वस्तर पर वन सम्पदा तेजी से नष्ट हो रही है। बीसवीं शताब्दी आते-आते अनेक जीव-जन्तु तथा वृक्ष धरती से समाप्त हो गए। अनेक पर्यावरणविदों और पर्यावरण सुरक्षा से सम्बद्ध अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने इसे गम्भीरता से लिया। वन्य जीवों को बचाने के लिए डब्ल्यू.डब्ल्यू.एफ. ने चीन के राष्ट्रीय पशु दैत्याकार पाण्डा को अपना प्रतीक चिद्द बनाया। इससे विलुप्त प्राय पाण्डा को नया जीवन मिला। इसके साथ ही इस संस्था ने बर्ड फीजैंट एसोसिएशन, इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर जैसी अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर वन्य पशुओं, पक्षियों, वृक्षों, पुष्पों के संरक्षण का कार्य आरम्भ किया। विभिन्न देशों के राष्ट्रीय पशु, राष्ट्रीय पक्षी, राष्ट्रीय वृक्ष और राष्ट्रीय पुष्प इसी का परिणाम हैं। राष्ट्रध्वज, राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, राष्ट्रचिद्द, राष्ट्रभाषा आदि के समान ये भी राष्ट्र का गौरव हैं। भारत ने स्वतन्त्रता के बाद यह कार्य भारतीय वन्य जीव बोर्ड (इंडियन बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ) को सौंपा। इसी बोर्ड की संस्तुति पर जनवरी 1963 में मोर को भारत का राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया गया। इसके बाद अनेक राज्यों ने भी अपने-अपने राज्य पक्षी घोषित किए। उड़ीसा ने मोर को ही अपना राज्य पक्षी घोषित कर दिया। सामान्यतया एक पक्षी को एक राज्य ने अपना राज्य पक्षी घोषित किया है। किन्तु कुछ पक्षी ऐसे हैं, जिन्हें दो-दो राज्यों ने अपना राज्य पक्षी घोषित किया है। धनेश, पहाड़ी मैना, मोनाल राज हारिल और श्रीमती ह्यूम फीजैंट ऐसे ही पक्षी हैं। नीलकंठ एक ऐसा पक्षी है, जिसे तीन राज्यों ने अपना राज्य पक्षी घोषित किया हैं भारत में दिल्ली और आसाम दो ऐसे राज्य हैं, जिन्होंने अभी तक अपने राज्य पक्षी घोषित नहीं किए हैं। केन्द्रशासित प्रदेशों में केवल लक्षद्वीप ने अपना राज्य पक्षी घोषित किया है।

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    Parashuram Shukla

    जन्म : 6 जून, 1947, कानपुर (उत्तर प्रदेश)।

    शिक्षा : एम.ए., पी-एच.डी.।

    प्रकाशन : 'भारतीय वन्यजीव’ (पुरस्कृत), 'भारतीय हिरन और गवय’, 'भारत का राष्ट्रीय पशु और राज्यों के राज्य पशु’ सहित दो दर्जन से अधिक पुस्तकें और 6 हजार से अधिक स्फुट रचनाएँ प्रकाशित। अनेक रचनाओं का विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवाद।

    पुरस्कार एवं सम्मान : समाज कल्याण मंत्रालय; पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली; चिल्ड्रंस बुक ट्रस्ट ऑफ इंडिया, नई दिल्ली; हिन्दी अकादमी, हैदराबाद सहित अनेक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित।

    सम्पर्क : 100, पंचशील नगर, सिविल लाइंस, दतिया-475661 (मध्य प्रदेश)।

    स्थायी निवास : बी-20, नीलम कॉलोनी, जहाँगीराबाद, भोपाल-462008 (मध्य प्रदेश)।

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