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Bhojpur : Bihar Mein Naksalvadi Andolan

Bhojpur : Bihar Mein Naksalvadi Andolan

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  • Pages: 176p
  • Year: 2013
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183616164
  •  
    वर्तमान भारत के सम्मुख जो ज्वलन्त प्रश्न हैं, उनमें से एक है नक्सलवाद। नक्सलवाद का जन्म अनेक सामाजिक कारणों से हुआ है और वह आज अतिवाद का पर्याय-सा समझा जा रहा है। 'भोजपुर : बिहार में नक्सलवादी आन्दोलनÓ पुस्तक दक्षिण बिहार के भोजपुर जिले पर केन्द्रित है। इसी जिले के सहार ब्लॉक में एकवारी गाँव है, जिसे कभी 'भोजपुर का नक्सलबाड़ीÓ कहा जाता था। कल्याण मुखर्जी और राजेन्द्र सिंह यादव ने अपने अनुभवों की प्रामाणिकता व तीव्रता के साथ इस पुस्तक की रचना की है। लेखकों के अनुसार भोजपुर जिले में किसी भी व्यापक आन्दोलन के दो दौर हैं : 1930 का दशक, यानी त्रिवेणी संघ का दौर और 1960 का दशक अर्थात् नक्सलवादी उथल-पुथल का दौर। लेखकद्वय नक्सलवादी आन्दोलन से जुड़े प्रमुख लोगों का स्मरण करते हुए कहते हैं, '...इन लोगों ने जिस संघर्ष की शुरुआत की, वह उत्तर बंगाल के नक्सलबाड़ी और आन्ध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम के उस हथियारबन्द संघर्ष की ही अगली कड़ी थी, जो इस समय तक उन इलाकों में खत्म हो चला था।Ó समय के एक विशेष खंड में समाहित सक्रियताओं का तार्किक विवरण आज के कई प्रश्नों का उत्तर तलाशने में मददगार होगा। वर्तमान सन्दर्भों में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण पुस्तक। 1970 के दशक के शुरू के वर्ष भावी घटनाओं का पूर्वाभास देने लगे थे। गंगा के दोनों तर$फ नक्सलवादियों के बिखरे हुए गुट थे। कुछ और थे जो जेलों में अपने दिन गुज़ार रहे थे। ऐसा लगता था कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माक्र्सवादी-लेनिनवादी) द्वारा शुरू किया गया आन्दोलन टूटकर बिखर गया है, लेकिन सरकार को अभी भी हिंसा के फैलने की पूरी आशंका थी। 8 अक्तूबर, 1970 को बिहार मंत्रिमंडल ने $कानून और व्यवस्था की बिगड़ती हुई स्थिति से निपटने के लिए भंग किए गए निरोधक नज़रबन्दी $कानून को फिर से चालू करने के बारे में विचार करने का $फैसला किया। समाचारपत्रों ने ऐलान किया कि चारु मजुमदार की तलाश जारी है। मुंगेर और मुज़फ्फरपुर (सारन) जि़लों के सूरजगढ़ तथा मुसहरी इला$कों में नक्सलवादियों की गतिविधियों तथा हज़ारीबाग के रूआम जंगलों में अमलेन्दु सेन-मेरी टाइलर गुट की गिर$फ्तारी की $खबरों ने राज्य की प्रशासन व्यवस्था को झकझोर दिया था और चौकन्ना कर दिया था। 9 अक्तूबर, 1970 को बिहार के एक दैनिक समाचारपत्र 'द इंडियन नेशनÓ ने लिखा : ''राज्य में नक्सलवादियों के निरन्तर बढ़ते आतंक से कारगर ढंग से निपटने के लिए बिहार पुलिस को कुछ विशेष अधिकार प्रदान किए जाएँगे। यह $फैसला बिहार मंत्रिमंडल की एक विशेष बैठक में राज्य में $कानून और व्यवस्था की स्थिति पर विचार करने के बाद लिया गया। यह निर्णय किया गया कि पुलिस-दल को तत्काल और मज़बूत बनाया जाए तथा खु$िफया विभाग को संगठित करने की दिशा में $कदम उठाए जाएँ। मंत्रिमंडल को बताया गया कि राज्य में नक्सलवादियों ने 26 हत्याएँ और गम्भीर $िकस्म की नौ डकैतियाँ की हैं।ÓÓ राज्य में नक्सलवादियों की बढ़ती हुई गतिविधियों को देखते हुए यह $फैसला किया गया था और जुलाई, 1970 तक अलग-अलग जि़लों में गिर$फ्तार किए गए व्यक्तियों और मामलों की छानबीन से सरकार के लिए चिन्तित होने का पर्याप्त कारण उपलब्ध था।

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    Kalyan Mukherji

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