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Itivritt

Itivritt

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  • Pages: 159p
  • Year: 2004
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 817119902X
  •  
    ‘इतिवृत्त’ एक मार्मिक वृत्त है - सामान्य भारतीय ग्रामीण जीवन के उखड़ने, टूटने और बिखरने का। पूरा वृत्त एक व्यक्तिगत कथा के साथ-साथ एक व्यापक जनजीवन गाथा भी है। व्यक्तिगत त्रासदी को सामाजिक त्रासदी के एक अंग के रूप में देखा गया है। इस त्रासदी के मूल में एक ऐसी अर्थव्यवस्था है जो भारी उद्योगों के हित में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की लगातार बलि देती जा रही है। सारा विवरण समाजशास्त्रीय अर्थशास्त्रीय होते हुए भी नितांत अनुभूतिप्रवण और मानवीय है। हिंदी कथा-साहित्य में ग्रामीण जीवन तो काफ़ी चित्रित हुआ है, लेकिन ‘इतिवृत्त’ बिल्कुल अलग इसलिए है कि ग्रामीण जीवन के बिखराव और अंत की कहानी इससे पहले इतने मार्मिक रूप में और कहीं नहीं आई है। इसमें शक नहीं कि ‘इतिवृत्त’ हिंदी उपन्यासों में मील का पत्थर है। इसकी शैली बहुत ही सरल, रोचक और आंचलिक है। लेखक जगदम्बा प्रसाद दीक्षित के लिए यह महान उपलब्धि इसलिए भी है कि ‘कटा हुआ आसमान’ और ‘मुरदाघर’ की महानगरीय जीवन-प्रणाली का चित्रण जिस अधिकार और गहरी पैठ के साथ किया गया है, उसी सूझबूझ और गहराई के साथ ग्रामीण जीवन का चित्रण भी हुआ है। ‘इतिवृत्त’ पढ़ने का मतलब है एक बेहद करुण, यथार्थ और जीवंत अनुभव संसार से होकर गुज़रना।

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    Jagdamba Prasad Dixit

    मध्य प्रदेश के बालाघाट क़स्बे में जन्म। प्रारंभिक शिक्षा- दीक्षा, उन्नाव, उत्तर प्रदेश में। बाद की शिक्षा तत्कालीन मध्य प्रदेश की राजधानी नागपुर में। वहीं से एम.ए. करने के बाद सेंट जेश्वियर्स कॉलेज, मुंबई, में अध्यापन। इससे पहले नागपुर के दो दैनिक पत्रों में उप-संपादक पद पर कार्य किया।

    मार्क्सवाद-लेनिनवाद और माओ त्से तुंग के चिंतन से प्रभावित। दक्षिण गुजरात के आदिवासियों के बीच संगठनात्मक गतिविधियाँ। 1970 में गिरफ़्तारी। 1972 में ‘पीपुल्स पावर’ अंग्रेज़ी पत्रिका का संपादन-प्रकाशन। कुछ विदेश यात्राएँ।

    1953 से ही कहानियाँ पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहीं। 1971 में पहला उपन्यास कटा हुआ आसमान प्रकाशित। इसके बाद मुरदा-घर और इतिवृत्त उपन्यासों का प्रकाशन। शुरुआत कहानी-संग्रह और अकाल लघु उपन्यास भी प्रकाशित। फ़िलहाल दो पुस्तकें प्रकाशित हो रही हैं...कोलोनियल स्पेक्टर ओवर इंडिया (अंग्रेज़ी में समकालीन इतिहास-चर्चा) और समकालीन संदर्भ (सम-सामयिक विषयों का आकलन)।

    ‘दीक्षा’, ‘सर’, ‘नाजायज़’, ‘नाराज़’  आदि फ़िल्में भी लिखीं।

    संप्रति: कुछ फिल्मों के अलावा एक उपन्यास पर भी काम कर रहे हैं।

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