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Maya Rag

Maya Rag

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  • Pages: 131p
  • Year: 2012
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183615532
  •  
    हिन्दी गीत-काव्य की एक प्रशस्त परम्परा है। छन्दमुक्त कविता के तमाम आन्दोलनों एवं आग्रहों के बावजूद गीत नए-नए सन्दर्भों में प्रस्फुटित हो रहे हैं। सुप्रसिद्ध कवयित्री माया गोविन्द का प्रस्तुत गीत-संग्रह ‘माया राग’ हिन्दी गीतों की संवेदना को संवर्धित करता है। संग्रह में भावनाओं की प्रचुरता है। कहा जा सकता है कि बौद्धिकता पर हार्दिकता का काव्यात्मक प्रकाश फैला हुआ है। माया गोविन्द हिन्दी काव्य मंचों की श्रीवृद्धि करती रही हैं। उन्होंने हिन्दी सिनेमा में अपने स्तरीय गीतों से गीतात्मकता की गुणवृद्धि की है। यही कारण है कि उनके गीतों में लय की अद्भुत छटाएँ मिलती हैं। ऐसा लगता है कि गीत गाए जाने के बाद लिखे गए हैं। इनमें जीवन की विभिन्न स्थितियाँ हैं। फिर भी, यह कहना अधिक उचित होगा कि माया गोविन्द ने एक स्त्री की दृष्टि से इस सृष्टि को देखा है। इसीलिए ये गीत स्त्री की पीड़ा को सशक्त ढंग से अभिव्यक्त करते हैं। आसक्ति और अनासक्ति के बीच व्याकुल मन की थाह माया गोविन्द ने भलीभाँति लगाई है। सावन और होली आदि के बहाने जीवन के उत्सव की विविध छटाएँ व्यंजित हुई हैं। कहीं-कहीं अद्भुत कथन उभरे हैंदृ‘प्यास की रुक्मिणी का करो तुम हरण’ या ‘अधरों पर अधर जैसे, इन्द्रधनुष की लकीर’। भाषा, भाव और शैली की दृष्टि से ‘माया राग’ के गीत निश्चित रूप से पाठकों के हृदय को आन्दोलित करेंगे।

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    Maya Govind

    जन्म: 17 जनवरी, लखनऊ (उ.प्र.)।

    शिक्षा: लखनऊ विश्वविद्यालय से बी.ए., बी-एड.। चार वर्षों तक अध्यापन कार्य। संगीत एवं साहित्य में बचपन से ही रुचि, नृत्य-गायन की विधिवत तालीम ली।

    काव्य यात्रा: बचपन से ही कविता-लेखन। काव्य पाठ सन् 1959 में दिल्ली के लाल किला कवि सम्मेलन से प्रारम्भ हुआ। तत्पश्चात् देश विदेश के सैकड़ों कवि-सम्मेलनों एवं गोष्ठियों में भाग लिया। हिन्दी, उर्दू, ब्रजी एवं अवधी में काव्य रचना। माया गोविन्द की काव्य रचना में रीतिकालीन शृंगार तथा पारलौकिकता विद्यमान है।

    प्रकाशित पुस्तकें: सुरभि के संकेत (गीत संग्रह), तुम्हें मेरी कसम (गजल, नज्म), कृष्णमयी (ब्रजभाषा पद), दर्द का अनुवाद (गीत संग्रह), चांदनी की आग (मुक्तछंद), सुनो हे पार्थ (भगवत गीता की काव्यमय प्रस्तुति), छंदरस माधुरी (ब्रजभाषा और अवधी के छंदों का संग्रह), सुमिरन कर ले मेरे मना (भजन संग्रह)।

    विशेष: हेमा मालिनी द्वारा प्रस्तुत बैले ‘मीरा’ का लेखन, जिसकी स्वर्ण जयन्ती मंचों पर हो चुकी। सन् 1972 से मुम्बई में फिल्मों के लिए गीत लेखन। अनेक टीवी धारावाहिकों में गीत लेखन। भजन, गीत एवं गजलों के पच्चीस एल्बम जारी।

    पुरस्कार: दो बार फिल्म जर्नलिस्ट एसोसिएशन एवार्ड (उ.प्र.); सर्वश्रेष्ठ गीतकार (फिल्म वर्ल्ड); स्वामी हरिदास पुरस्कार (सुरसिंगार संसद); दशक की सर्वश्रेष्ठ कवयित्री पुरस्कार (हिन्दी समिति वाशिंगटन); हिन्दी काव्य सम्मान (विश्व हिन्दी समिति न्यूयॉर्क); उत्तर प्रदेश रत्न सम्मान (उत्तर भारतीय संघ); आशीर्वाद पुरस्कार; इंडियन टेलीविजन एकेडमी अवार्ड: टीवी सीरियल ‘मायका’ और ‘फुलवा’ के लिए। महादेवी वर्मा सम्मान लखनऊ, निराला पुरस्कार: (साहित्य कला मंच, मुम्बई)।

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