• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

Kachhue

Kachhue

Availability: In stock

-
+

Regular Price: Rs. 150

Special Price Rs. 135

10%

  • Pages: 131p
  • Year: 2008
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788171195947
  •  
    कछुए कछुए - यह इंतज़ार साहब का बहुचर्चित कहानी-संग्रह है जिसमें कछुए के अलावा दो और ऐसी कहानियाँ (पत्ते वापस) शामिल हैं जो भाषा, शिल्प और कथ्य, गरज़ कि हर पहलू से उस कहानी से अलग हैं जिसे हम प्रेमचंद के ज़माने से आज तक पढ़ते आए हैं। वह कहानी अपने यथार्थवाद के लिए जानी गई और, समय-समय पर प्रयोग के तौर पर होने वाले थोड़े-बहुत फेरबदल के साथ, उसका ज़ोर यथार्थ के यथासंभव प्रामाणिक चित्रण पर ही रहा। इस संग्रह की ये चार, और इससे बाहर की इसी ढंग की कई अन्य कहानियाँ यथार्थ के दृश्य वैभव से बाहर की कहानियाँ हैं, वे समय और स्थान की निर्धारित सीमाओं को लाँघकर हमें एक ज़्यादा व्यापक अनुभव तक ले जाती हैं। इंतज़ार हुसैन ख़ुद (अगर इनको किसी ख़ाने में रखना ही हो तो) इन कहानियों को ‘जातक कहानी’ नाम देते हैं। ‘मैं जातक कहानी लिखता हूँ। ये नई है या पुरानी, पता नहीं। इतना पता है कि सन् ’36 की हक़ीक़तनिगारी वाली कहानी से इसका कोई नाता नहीं हो सकता कि जातक कहानी हक़ीक़त के उस महदूद तसव्वुर की नफ़ी है जिस पर हक़ीक़तनिगारी की इमारत खड़ी है और उस इनसान दोस्ती की जो उस अफ़साने का ताज समझी जाती है। जातक कहानियाँ पढ़ने के बाद सन् ’36 की इनसान दोस्ती मुझे फ़िरक़ापरस्ती नजर आती है। जातकों में आदमी कोई अलग फ़िरक़ा नहीं है। सब जीव-जंतु एक बिरादरी हैं।’ (इसी संग्रह में शामिल ‘नए अफ़सानानिगार के नाम’ से) इनके अलावा बाक़ी की ज़्यादातर कहानियों (किश्ती, दीवार, रात, ख़्वाब और तक़दीर) में भी यह जातक-तत्त्व भरपूर ढंग से ज़ाहिर है, हालाँकि इनकी पृष्ठभूमि दूसरी है। शेष कहानियों (क़दामत पसंद लड़की, 31 मार्च, नींद, असीर, शोर आदि) में भी यथार्थवादी और आधुनिक आग्रहों के अंतर्विरोधों को रेखांकित करते हुए उनके हास्यास्पद बौनेपन को उकेरा गया है। बेसबब, सुबह के ख़ुशनसीब, फ़रामोश और बादल कुछ खेलती हुई-सी कहानियाँ हैं जो अपने विषय के साथ, बिना कोई जटिल मुद्रा बनाए, एक बेहद सहज और मानवीय विस्मय के साथ पेश आती हैं। निःसंदेह, इंतज़ार हुसैन की जानी-पहचानी चुटीली-चटकीली कहन तो हर कहानी का हिस्सा है ही।

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Intizar Hussain

    इंतजार हुसैन

    जन्म : 7 दिसंबर, 1923 को डिबाई, ज़िला बुलंदशहर (उ.प्र.) में। 1947 में पाकिस्तान गए और लाहौर में बसेरा। पाकिस्तान के शीर्षस्थ कथाकार।

    शिक्षा : प्रारम्भिक और धार्मिक शिक्षा घर पर हुई। हापुड़ से हाईस्कूल किया, 1946 में मेरठ कॉलेज से उर्दू में एम.ए.।

    पत्रकारिता : 'दैनिक इमरोज़', 'आफ़ाक़', 'नवाए-वक्त' और 'मशरिक़' से संबद्ध रहे। अंग्रेजी दैनिक 'डॉन' (कराची) में स्तम्भ-लेखन । साहित्यिक पत्रिका - ‘अदबे-लतीफ़’ के संपादक रहे।

    पहली कहानी ‘क़य्यूमा की दुकान’ अप्रैल 1948 में लिखी जो दिसम्बर 1948 में ‘अदबे-लतीफ़’ में प्रकाशित हुई।

    कृतियाँ - उपन्यास : चाँद गहन, बस्ती, आगे समन्दर है, तजि़्करा (नया घर); लघु उपन्यास : दिन और दास्तान। सम्पूर्ण कहानियाँ : जनम कहानियाँ : खंड 1, क़िस्सा कहानियाँ : खंड 2; कहानी-संग्रह : गली-कूचे, कंकरी, आख़िरी आदमी, शहरे-अफ़सोस, कछुए, ख़ेमे से दूर, ख़ाली पिंजरा, शह्रज़ाद के नाम, एन अनरिटेन एपिक एंड अदर स्टोरीज़ (अंग्रेज़ी में अनुवाद); आलोचना : अलामतों का ज़वाल; यात्रा-कथा : ज़मीन और फ़लक, नए शहर, पुरानी बस्तियाँ; संस्मरण : चराग़ों का धुआँ, दिल्ली जो एक शहर था; जीवनी : अजमले-आज़म (हकीम अजमल खाँ की जीवनी); अख़बारी कॉलम : ज़र्रे;

    अनुवाद : घास के मैदानों में: चेखव, नई पौद: तुर्गनेव, सुर्ख तम्ग़ा : स्टीफ़न क्रेन (उपन्यास); नाव (अमरीकी कहानियों का चयन); हमारी बस्ती : थार्नटन वाइल्डर (नाटक); फ़लसफ़ा की नई तश्कील : जॉन डेवी (दर्शनशास्त्र); माऊज़े तुंग : स्टेवर्ट श्रेम।

    संपादन : इंशा की दो कहानियाँ, हज़ार  दास्तान: रतननाथ सरशार।

    सम्मान : बस्ती के लिए पाकिस्तान के सबसे बड़े पुरस्कार ‘आदमजी एवार्ड’ से सम्मानित। बाद में इस पुरस्कार को इंतिज़ार हुसैन ने वापस कर दिया।

    निधन : 2 फरवरी, 2016

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna
    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144