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Manak Hindi Ke Shuddh Prayog : Vol. 4

Manak Hindi Ke Shuddh Prayog : Vol. 4

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Special Price Rs. 446

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  • Pages: 170
  • Year: 2019, 3rd Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788171194711
  •  
    सशक्त अभिव्यक्ति के लिए समर्थ हिंदी चाहिए । इस नए ढंग के व्यवहार–कोश में पाठकों को अपनी हिंदी निखारने के लिए हजारों शब्दों के बारे में बहुपक्षीय भाषा–सामग्री मिलेगी । इस में वर्तनी की व्यवस्था मिलेगी, उच्चारण के संकेत–बिंदु मिलेंगे व्युत्पत्ति पर टिप्पणियाँ मिलेंगी, व्याकरण के तथ्य मिलेंगे सूक्ष्म अर्थभेद मिलेंगे, पर्याय और विपर्याय मिलेंगे संस्कृत का आशीर्वाद मिलेगा, उर्दू और अँग्रेजी का स्वाद मिलेगा प्रयोग के उदाहरण मिलेंगे, शुद्ध–अशुद्ध का निर्णय मिलेगा । पुस्तक की शैली ललित निबंधात्मक है । इस में कथ्य को समझाने और गुत्थियों को सुलझाने के दौरान कठिन और शुष्क अंशों को सरल और रसयुक्त बनाने के लिहाज“ से मुहावरों, लोकोक्तियों, लोकप्रिय गानों की लाइनों, कहानी–कि’स्सों, चुटकुलों और व्यंग्य का भी सहारा लिया गया है । नमूने देखिए स्त्रीलिंग ‘दाद’ (प्रशंसा) सब को अच्छी लगती है, पर पुर्लिंग ‘दाद’ (चर्मरोग) केवल चर्मरोग के डॉक्टरों को अच्छा लगता है ।–––‘मैल, मैला, मलिन’ सब ‘मल’ के भाई–बंधु हैं । –––(‘साइकिल’ को) ‘साईकील’ लिखनेवाले महानुभाव तो किसी हिंदी–प्रेमी के निश्चित रूप से प्राण ले लेंगे दुबले को दो असाढ़ !–––अरबी का ‘नसीब’ भी ‘हिस्सा’ और ‘भाग्य’ दोनों है । उदाहरण आप के नसीब में खुशियाँ ही खुशियाँ हैं । (जब कि मेरे नसीब में मेरी पत्नी हैं !) यह पुस्तक हिंदी के हर वर्ग और स्तर के पाठक के लिए उपयोगी है ।

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    Ramesh Chandra Mahrotra

    जन्म : 17 अगस्त, 1934, मुरादाबाद।

    शिक्षा : अॅम.ए., अॅम.लिट्, पी-अॅच.डी., डी.लिट्. (हिंदी—भाषाविज्ञान)।

    सेवा : सागर विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रॉफॅसर (7 वर्ष), रविशंकर विश्वविद्यालय में रीडर-हॅड (12 वर्ष), वहीं प्रॉफॅसर-हॅड (16 वर्ष), आगे भी मानसेवी प्रॉफॅसर (रॅक्टर और कुलपति के पद अस्वीकार किए)।

    शोध-निर्देशन : 5 डी.लिट्., 39 पी-अॅच.डी., 24 अॅम.फिल., 6 शोध-परियोजनाएँ।

    प्रकाशन : चार दर्जन से अधिक पुस्तकें (लेखन, सह-लेखन, संपादन आदि) मानक हिन्दी, भाषाविज्ञान, साहित्य, छत्तीसगढ़ी आदि पर। अनेक पत्र-पत्रिकाओं व ग्रंथों में सैकड़ों लेख।

    सम्मान : 8 राज्यों से 17 राष्ट्रीय प्रादेशिक

    स्तर के अलंकरण; शोधग्रंथ ‘लिंग्विस्टिक्स

    एंड लिंग्विस्टिक्स’ से अभिनंदित; सहस्राधिक प्रशस्तियाँ प्राप्त।

    सदस्यता : केंद्र और प्रदेश के सरकारी और अन्य तीन दर्जन आयोगों, परिषदों आदि से शैक्षणिक संबद्धता; 22 विश्वविद्यालयों से शोध-निर्वाह।

    प्रसारण : सैकड़ों वार्ताएँ आदि।

    सामाजिक कार्य : नि:शुल्क विधवा-विवाह

    केंद्र का 1992 में स्थापन और आजीवन संचालन, तद् हेतु 9 वार्षिक स्वर्णपदक एवं 3 वार्षिक स्नातक-स्तरीय छात्रवृत्तियाँ प्रदान; मरणोपरांत सपत्नीक शरीरदान और नेत्रदान।

    निधन : 4 दिसम्बर, 2014

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