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Web Patrikarita : Naya Media Aur Rujhan

Web Patrikarita : Naya Media Aur Rujhan

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  • Pages: 124p
  • Year: 2012
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183615358
  •  
    एक ऐसे दौर में जब मीडिया प्रिंट, रेडियो और टीवी से होता हुआ वेब पर उतर आया है और वहाँ भी उसके कई रूप दिखने लगे हैं, ऐसे न्यू मीडिया के दौर में जर्नलिज़्म से जुड़े छात्रों, शोधकर्ताओं और अध्यापकों, पेशेवरों और विशेषज्ञों के सामने कुछ नई चुनौतियाँ और सवाल भी आए हैं । न्यू मीडिया कमोबेश उसी समय प्रकट हुआ जब ग्लोबल विलेज की अव/ाारणा ज़ोर मार रही थी, भूमंडलीकरण ने आकार ग्रहण कर लिया था और नवउदारवादी शर्तें व्यापक कॉरपोरेट मिज़ाज का निर्माण कर रही थीं । आधुनिकतम तकनीकी से लैस इस मीडिया सिस्टम में नए सवाल और नई पेचीदगियाँ भी जुड़ती जा रही हैं । उन्हें समझने, उनके हल के औजार तैयार करने के लिए एक बिल्कुल ही नए तेवर वाले मुस्तैद जर्नलिस्ट की दरकार है । कहने को वे मल्टीमीडिया न्यूज़पर्सन होंगे लेकिन उन्हें सिर्फ स्किल्स में ही दक्षता हासिल नहीं करनी होगी बल्कि उन्हें समाचार के बुनियादी मूल्यों और अपने पेशे की बुनियादी नैतिकताओं पर भी फिर से नज़र डालनी होगी । उन्हें नए ढंग से विश्वसनीयता और प्रामाणिकता हासिल करनी होगी जो इर कॉरपोरेट मीडिया के विभिन्न क़्ि़स्मों के दबावों, स्वार्थों और लालचों में कमज़ोर पड़ गई है या बिखर गई है या मिटा ही दी जा रही है । न्यू मीडिया सिर्फ वेब का ही मीडिया नहीं माना जाना चाहिए इसे विश्वास का भी न्यू मीडिया समझना चाहिए । ऐसा करते हुए हमें डी शिलर का यह कथन भी नहीं भूलना चाहिए कि कथित विविधता सांस्कृतिक परजीवीपन है । इसे सांस्कृतिक वैविध्य नहीं समझना चाहिए । प्रस्तुत किताब इंटरनेट की इन तात्कालिक कमज़ोरियों और अन्तर्विरोधों की ओर भी इशारा करती है । यह किताब वेब मीडिया के छात्रों और प्रशिक्षुओं को इस माध्यम की बारीकियों के बारे में बताते हुए लिखी गई है । यह उन सहूलियतों का भी विवरण पेश करती है जो न्यू मीडियाकर्मी के लिए हो सकती हैं । और इसमें पत्रकारिता के बुनियादी उसूल, समाचार ज़रूरतें, भाषा और प्रयोग की विविधताओं जैसे पाठ तो स्वाभाविक रूप से शामिल हैं ही ।

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    Shiv Prasad Joshi

    1993 में जनसत्ता से स्वतंत्र पत्रकारिता की शुरुआत। 1995 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में। भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा के बाद टीवीआई (बीआईटीवी) न्यूज चैनल, ज़ी न्यूज चैनल, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस, सहारा समय न्यूज चैनल और जर्मनी के बॉन स्थित जर्मन रेडियो डॉयचे वेले की हिंदी सेवा में वरिष्ठ पदों पर काम किया। वेबसाइट हिलवाणी के सह संस्थापक। इन दिनों न्यूज एक्सप्रेस चैनल के उत्तराखंड प्रभारी।

    विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं, ब्लॉग्स में सामाजिक सांस्कृतिक राजनैतिक विषयों पर नियमित लेखन। कविताएं, अनुवाद और निबंध प्रकाशित। बॉन (जर्मनी) प्रवास पर डायरी, गद्य-संग्रह और पहला कविता-संग्रह शीघ्र प्रकाश्य।

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