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Devgiri Bilaval

Devgiri Bilaval

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  • Pages: 367p
  • Year: 1995
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 10: 8171192134
  •  
    'देवगिरि बिलावल ' मराठी के ऐतिहासिक उपन्यासों की परम्परा में मील का पत्थर है । इस उपन्यास का हि दी अनुवाद हिंदी के ऐतिहासिक उपन्यास-साहित्य की महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाएगी । समर्थ अर्थवत्ता एवं सशक्त अभिव्यक्ति सम्पन्न कलाबोध तथा बहुआयामी चिंतनशीलता ने इस उपन्यास को सर्जनशीलता के आकाश का ध्रुवतारा बना दिया है । ऐतिहासिक उपन्यास अपने समय की सांस्कृतिक चेतना का आविष्कार होता है । धर्म, संस्कृति, संगीत, राजनीति, अर्थशास्त्र, सामाजिक अवधारणा तथा मानवीय अन्तश्चेतना के चकित करनेवाले रहस्यमय ताने-बाने से 'देवगिरि बिलावल ' के जरदोजी महावस्त्र का निर्माण हुआ है । समय की ऐतिहासिकता यहाँ अपने आप को लाँघकर सार्वकालिकता बन गयी है । इस्लाम का परचम बुलंद करनेवाला प्रशासनकुशल, कलाप्रिय, भोगलोलुप तथा निष्ठुर सुलतान अलाउद्दीन; उससे भी अधिक क्रूरकर्मा, महापराक्रमी, मदन मनोहर क :पुरुष मलिक काफूर; सात्त्विकता के आभा-मंडल से मं डित उ चकोटि के सूफी संत हजरत निजामुदीन औलिया, उनके शागिर्द- श्रेष्ठ साहित्यकार, संगीत-कला मर्मज्ञ, हजरत अमीर खुसरो र' वैदिक संगीत की पवित्रता को अक्षुण्‍ण बनाये रखने के लिए प्राणार्पण करने को प्रस्तुत संगीत के अन्तिम गायक गोपाल नायक; तथा अपने इस सत्व-सम्पन्न एवं कलाकार के अभिव्यक्ति-स्वातंत्र्य के लिए संघर्ष करनेवाले गुरु का परमादर करनेवाली अनिंद्य सुंदरी देवल दे और इस सौंदर्य सम्राज्ञी के लिए अपनी ऑखों की आहुति देनेवाला उदात्त प्रेमी शहजादा ख़िज्रखान-इस उपन्यास के एकाधिक अविस्मरणीय चरित्र है । सुश्लिष्ट कथा-वस्तु पात्रों के प्रत्ययकारी चित्रण, जीवनानुभूति को उसकी समग्रता में ग्रहण करने की लेखकीय वृत्ति, कलात्मक तथा परिष्कृत संवेदनशीलता, चिंतनशीलता, रूमानी रसिकता आदि गुण-समुच्चय के कारण मराठी के सुचर्चित लेखक रंगनाथ तिवारी का यह उपन्यास 'क्षणे-क्षणे यन्नवतामुपैति' के स्तर तक जा पहुँचा है । प्रा. रा. द. आरगडे, भूतपूर्व मराठी विभागाध्यक्ष, योगे श्वरी महाविद्यालय, अम्बाजोगाई

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    Rangnath Tiwari

    रंगनाथ तिवारी

    हिन्दी-मराठी भाषा और साहित्य पर समान अधिकार रखने वाले रंगनाथ तिवारी ने कविता, कथा, एकांकी, नाटक, उपन्यास तथा समीक्षा के क्षेत्र में पर्याप्त लेखन किया है। आपकी कृतियों में कलात्मक अभिरुचि तथा जीवन-बोध प्रस्फुटित हुआ है।

    चर्चित कृतियाँ: देवगिरि बिलावल, बेग़म समरू तथा काया-परकाया।

    सम्पर्क: ‘दयाल’, जयवंती नगर, अंबाजोगई - 431517 (महा.)।

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