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Devi

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  • Pages: 175p
  • Year: 2014, 3rd Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788171196753
  •  
    स्त्रिय: समस्ता: सकला जगत्सु तव देवि भेदा: । संपूर्ण सृष्टि की महिलाएँ, हे देवि, वस्तुत: तुम्हारे ही विभिन्न स्वरूप हैं । स्त्रियों के विभिन्न स्वरूपों की डोर पकड़कर आदिशक्ति के मूल स्वरूप को समझनाय और शक्ति के नाना रूपों के आईनो में आज से लेकर आर्षकालीन समाज की स्त्रियों की ढेरों लोकगाथाओं, महागाथाओं, आख्यानों को नए सिरे से पकड़कर व्याख्यायित कर पाना–यही इस विचित्र पुस्तक का मूल अभीष्ट है । यह न विशुद्ध कथापरक उपन्यास है, न कपोलकल्पित मिथकों की लीला और न ही एक वैज्ञानिक इतिहास । मानव–मन के गोपनीय और रहस्यमय अंश से लेकर महाकाव्यकारों की उदात्त कल्पना के बिंदुओं तक सभी यहाँ हैंय कभी जुड़ते, कभी छिटकते, कभी एक साथ जुड़ते–छिटकते हुए । जीवन की ही तरह देवी की ये गाथाएँ भी कभी कालातीत गहराइयाँ मापती हैं, तो कभी समकालीन इतिहास में कदमताल करती हैं । इन गाथाओं में वे सभी द्वैत मौजूद हैं, जिनसे एक औसत भारतीय का मन–संसार बनता है, अपने सभी उजले–स्याह राग–विराग समेत! अपने मानाभिमान, दर्प, आक्रोश, करुणा और ममत्व में यही वे बिंब हैं, जिनसे सृष्टि चलती है, जीवन चलता है । साहित्य उपजता है और लोकगाथाएँ रची जाती हैं ।

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    Mrinal Pandey

    जन्म: 26 फरवरी, 1946 को टीकमगढ़, मध्य प्रदेश में।

    शिक्षा: एम.ए. (अंग्रेजी साहित्य), प्रयाग विश्वविद्यालय, इलाहाबाद। गन्धर्व महाविद्यालय से ‘संगीत विशारद’ तथा कॉरकोरन स्कूल ऑफ आर्ट, वाशिंगटन में चित्रकला एवं डिजाइन का विधिवत् अध्ययन।

    कई वर्ष विभिन्न विश्वविद्यालयों (प्रयाग, दिल्ली, भोपाल) में अध्यापन के बाद पत्रकारिता के क्षेत्र में आईं। साप्ताहिक हिन्दुस्तान व वामा की सम्पादक तथा दैनिक हिन्दुस्तान की कार्यकारी सम्पादक रहीं। स्टार न्यूज और दूरदर्शन के लिए हिन्दी समाचार बुलेटिन का सम्पादन किया। दैनिक हिन्दुस्तान, कादम्बिनी एवं नन्दन की प्रमुख सम्पादक रहीं।

    प्रकाशित पुस्तकें: विरुद्ध, पटरंगपुर पुराण, देवी, हमका दियो परदेस, अपनी गवाही (उपन्यास); दरम्यान, शब्दवेधी, एक नीच टेªजिडी, एक स्त्री का विदागीत, यानी कि एक बात थी, बचुली चौकीदारिन की कढ़ी, चार दिन की जवानी तेरी (कहानी-संग्रह); मौजूदा हालात को देखते हुए, जो राम रचि राखा, आदमी जो मछुआरा नहीं था, चोर निकल के भागा, सम्पूर्ण नाटक (नाटक) और देवकीनन्दन खत्री के उपन्यास काजर की कोठरी का इसी नाम से नाट्य-रूपान्तरण, परिधि पर स्त्री, स्त्री: देह की राजनीति से देश की राजनीति तक, स्त्री: लम्बा सफर (निबन्ध); बन्द गलियों के विरुद्ध (सम्पादन), ओ उब्बीरी (स्वास्थ्य)।

    अंग्रेज़ी: द सब्जेक्ट इज वूमन (महिला-विषयक लेखों का संकलन), द डॉटर्स डॉटर, माई ओन विटनेस (उपन्यास), देवी (उपन्यास-रिपोर्ताज), स्टेपिंग आउट: लाइफ एंड सेक्सुअलिटी इन रूरल इंडिया।

    सम्प्रति: अध्यक्ष, प्रसार भारती।

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