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Ek Thag Ki Dastan

Ek Thag Ki Dastan

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  • Pages: 446P
  • Year: 2017, 2nd Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183612609
  •  
    700 से अधिक हत्याएँ करके अपराध के महासिन्धु में डूबा हुआ अमीर अली जेल में सामान्य बन्दियों से पृथक् बड़े ठाट-बाट से रहता था। वह साफ कपड़े पहनता, अपनी दाढ़ी सँवारता और पाँचों वक्त की नमाज अदा करता था। उसकी दैनिक क्रियाएँ नियमपूर्वक चलती थीं। अपराधबोध अथवा पश्चात्ताप का कोई चिद्द उसके मुख पर कभी नहीं देखा गया। उसे भवानी की अनुकम्पा और शकुनों पर अटूट विश्वास था। एक प्रश्न के उत्तर में उसने कहा था कि भवानी स्वयं उसका शिकार उसके हाथों में दे देती है, इसमें उसका क्या कसूर? और अल्लाह की मर्जी के बिना एक पत्ता भी नहीं हिल सकता। उसका यह भी कहना था कि यदि वह जेल में न होता तो उसके द्वारा शिकार हुए यात्रियों की संख्या हजार से अधिक हो सकती थी। प्रस्तुत पुस्तक ‘एक ठग की दास्तान’ 19वीं शताब्दी के आरम्भकाल में मध्य भारत, महाराष्ट्र तथा निजाम के समस्त इलाकों में सड़क-मार्ग से यात्रा करनेवाले यात्रियों के लिए आतंक का पर्याय बने ठगों में सर्वाधिक प्रसिद्ध अमीर अली के विभिन्न रोमांचकारी अभियानों की तथ्यपरक आत्मकथा है। इसे लेखक ने स्वयं जेल में अमीर अली के मुख से सुनकर लिपिबद्ध किया है। औपन्यासिक शैली में प्रस्तुत अत्यधिक मनोरंजक आत्मकथात्मक पुस्तक।

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    Philip Meadows Taylor

    पुस्तक का लेखक स्वयं एक अंग्रेज था, परन्तु अमीर अली द्वारा फिरंगियों के प्रति व्यक्त किए गए वक्तव्यों को वह यथावत् लिपिबद्ध करता गया। एक विशेष बात इस पुस्तक में और भी है, वह यह कि भारतीय संस्कृति की छाप उसमें सर्वत्र परिलक्षित होती है। साथ ही विचारशीलता एवं मनोभावों का सम्मिश्रण करके लेखक ने उसे अधिक संवेदनशील बना दिया है।

    डॉ. राज नारायण पांडेय

    जन्म: 20 फरवरी, 1924, कानपुर।

    शिक्षा: एम.ए., साहित्यरत्न, साहित्यालंकार, पी-एच.डी.।

    भाषा-ज्ञान: हिन्दी-अंग्रेजी के अतिरिक्त फारसी, उर्दू, अपभ्रंश, जर्मन, अरबी, उड़िया।

    साहित्यिक-सांस्कृतिक क्षेत्र: कानपुर की प्रमुख संस्था ‘हिन्दी साहित्य परिषद’ का 9 वर्षों तक मन्त्री-पद से संचालन। अनेक साहित्यिक गोष्ठियों, नाटकों आदि गतिविधियों में सक्रिय योगदान।

    सेवा-कार्य: केन्द्रीय गृह मन्त्रालय के राजभाषा विभाग में प्राध्यापक पद पर कलकत्ता, कटक, भुवनेश्वर, कानपुर के केन्द्रीय सरकार के अधिकारियों को हिन्दी शिक्षण - 25 वर्षों तक।

    प्रकाशित पुस्तक: महाकवि पुण्यदन्त (10वीं शताब्दी के अपभ्रंश कवि पर शोध प्रबन्ध)।

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