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Gaind Aur Goal

Gaind Aur Goal

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  • Pages: 120
  • Year: 2018, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183618687
  •  
    राधाकृष्ण की पहचान प्रेमचंद-धारा के लेखक के रूप में प्रेमचंद के जीवनकाल में ही बन चुकी थीं। 'गेद और गोल’ उनकी सहज कहानियों का संकलन है। आम लोगों के आम दिनों की कुछ खास बातें इन कहानियों में सहज ही दर्ज हो गई हैं। ये कहानियाँ 'फॉर्मूला’ कहानी नहीं हैं, जिन्हें एक सुनिश्चित प्लॉट के तहत गढ़ा गया हो। ये बहते जीवन से कुछ पल सँजोकर पेश की गई हैं। इनमें आर्थिक तंगी है तो व्यवहारिकता भी। उद्दंडता है तो आदर्श भी। फरेब है, तो सच्चा प्रेम भी। शीर्षक कहानी 'गेंद और गोल’ बहुत कम शब्दों में जि़ंदगी के लक्ष्य को बयाँ कर देती है। 'गठरी का भेद’ पंचतंत्र की कहानी की तरह सहज सीख देते हुए तीव्र प्रहार करती है। 'कोयले की जि़ंदगी’, 'कलाकार का मास्टरपीस’, 'मूल्य’, 'रसायन की पुड़िया’ हर रंग की कहानी इस संकलन में आपको मिल जाएगी। 70 के दशक में लिखी गई ये कहानियाँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक और हृदयस्पर्शी हैं।

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    Radhakrishna

    साहित्यकार राधाकृष्ण ने हिन्दी कथा साहित्य को शैली, स्वरूप और वस्तु की : ष्टि से एक नई और महत्त्वपूर्ण दिशा की ओर उन्मुख किया था। प्रेमचंद जैसे कथा-सम्राट ने कथाकार राधाकृष्ण के संबंध में कहा था: ‘हिन्दी के उत्कृष्ट कथा-शिल्पियों की संख्या काट-छांटकर पाँच भी कर दी जाए तो उनमें एक नाम राधाकृष्ण का होगा।’ राधाकृष्ण की पहचान प्रेमचंद-धारा के एक लेखक के रूप में प्रेमचंद के जीवन काल में बन चुकी थी।

    राधाकृष्ण ‘राधाकृष्ण’ और ‘घोष-बोस-बनर्जी-चटर्जी’ दो नामों से लिखा करते थे। घोष-बोस-बनर्जी-चटर्जी नाम से हास्य-व्यंग्य और राधाकृष्ण नाम से गंभीर एवं अन्य विधागत रचनाएँ। राधाकृष्ण की पहली कहानी ‘सिन्हा साहब’ 1929 ई. की ‘हिन्दी गल्प माला’ में प्रकाशित हुई थी। इसके बाद क्रमशः महावीर, संदेश, भविष्य, जन्मभूमि, हंस, माया, माधुरी, जागरण आदि प्रसिद्ध पत्रिकाओं में इनकी रचनाएँ प्रकाशित होती रहीं और देखते-देखते पूरे हिन्दी जगत में अप्रतिम कथाकार के रूप में प्रसिद्ध हो गये। इन्होंने महावीर, हंस, माया, संदेश, झारखंड, कहानी, आदिवासी आदि पत्रिकाओं का सम्पादन किया था। राधाकृष्ण का जन्म 18 सितम्बर, 1910 को राँची के एक मध्यवित्त परिवार में हुआ था। बाल्यावस्था में ही इनके पिता रामजतन लाल का निधन हो गया, अतः प्रारम्भिक जीवन बहुत कष्टपूर्ण रहा। स्कूली शिक्षा से अधिक इन्होंने जीवन की पाठशाला में अनुभव और ज्ञान अर्जित किया। राधाकृष्ण वस्तुतः स्वाध्याय और जन्मजात रचनात्मक प्रतिभा की उपज थे।

    प्रकाशित कृतियाँ: कहानी संग्रह: रामलीला, सजला, गल्पिका, गेंद और गोल, चन्द्रगुप्त की तलवार। उपन्यास: रूपान्तर, बोगस, सनसनाते सपने, इस देश को कौन जीत सकेगा, सपने बिकाऊ है, फुटपाथ। नाटक: भारत छोड़ो, बिगड़ी हुई बात, वह देखो साँप। बाल साहित्य: करम सांढ़ की कहानी, भकोलवा, बागड़ बिल्ला, तीन दोस्त तीन किस्मत आदि।

    निधन: 3 फरवरी, 1979।

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