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Kaalyatri Hai Kavita

Kaalyatri Hai Kavita

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  • Pages: 135p
  • Year: 1993
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 8171191282
  •  
    सुपरिचित आलोचक डॉ० प्रभाकर श्रोत्रिय द्वारा हिन्दी कविता की यह काल-यात्रा विशेष महत्व रखती है । कोई रचना इतिहास के दौर में क्या रूप लेती है और मानवीय संवेदन की अंतर्धारा उसमें किन माध्यमों से परिचालित होती है, इसकी प्रामा- णिक और गहरी समझ डॉ० श्रोत्रिय को है । अक्सर इतिहास के कालबोध की परवर्ती दृष्टि के दौर में लोग अतीत की परिस्थितियों और कवि-सीमाओं को उपेक्षित कर जाते हैं । इस पुस्तक में ऐसा आवश्यक लचीलापन है, जिससे यह अतीत को जहाँ आधु- निकता की सार्थकता में देख सकी है वहीं युग और कवि सीमा को भी संवेदित परकाय-प्रवेश की भाँति अपने मौलिक स्वरूप में प्रतिष्ठित कर सकी है । इससे कविता इतिवृत्त नहीं रहती, बल्कि वह आगामी काल-प्रवाह में सक्रिय और प्रेरक साझीदार प्रतीत होती है । नवीनतम काव्य-प्रवृत्तियों की भी लेखक को गहरी पकड़ है, तभी वह आदिकाल से लेकर सातवें, आठवें और नवें दशक तक के विभिन्न कविता- दौरों पर समान रूप से विचार कर सका है । यही नहीं, नये संस्करण के लिए पुस्तक को संशोधित करते हुए डॉ० श्रोत्रिय ने दो नये अध्याय भी जोड़े हैं । इनमें से एक है 'भारतीय साहित्य की परम्परा' और दूसरा, 'नवाँ दशक : बदलाव की नयी पहल' । लम्बी कविता और हिंदी-नवगीत पर पहले से ही दो अध्याय पुस्तक में हैं । कहने की आवश्यकता नहीं कि डॉ० श्रोत्रिय की यह आलोचना-कृति हिंदी कविता का एक व्यापक और मूल्यवान अध्ययन है और मनुष्यता के चिर उपेक्षित हिस्से की पीड़ाओं को काव्य-साहित्य की प्रमुख मान- वीय चिंताओं में शामिल करने का आग्रह करती है ।

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    Prabhakar Shrotriya

    प्रख्यात आलोचक, नाटककार, निबन्धकार। प्रखर संतुलित : ष्टि। सर्जनात्मक भाषा और विवेचना की मौलिक भंगिमा। नई कविता का सौन्दर्यशास्त्र, नई और समकालीन  कविता  का  प्रामाणिक  मूल्यांकन, साहित्येतिहास का पुनर्मूल्यन, छायावाद, द्विवेदी-युग, प्रगतिवाद इत्यादि का नव विवेचन। दो दर्जन मौलिक और एक दर्जन सम्पादित ग्रंथ।

    प्रमुख प्रकाशन: कविता की तीसरी आँख, रचना एक यातना है, जयशंकर प्रसाद की प्रासंगिकता, संवाद (नई कविता-आलोचना), कालयात्री है कविता, अतीत के हंस: मैथिलीशरण गुप्त, प्रसाद साहित्य में प्रेमतत्त्व, हिन्दी कविता की प्रगतिशील भूमिका, शमशेर बहादुर सिंह, नरेश मेहता, सुमन: मनुष्य और सृष्टा, रामविलास शर्मा: व्यक्ति और कवि तथा धर्मवीर भारती  (संपा.), कविता की तीसरी आँख का अंग्रेजी अनुवाद ज्ीम फनपदजमेेमदबम व िच्वमजतल। नाटक: इला, साँच कहूँ तो..., फिर से जहाँपनाह। इला का ग्यारह भारतीय भाषाओं में अनुवाद (प्रक्रिया में)।

    सम्मान व पुरस्कार: अखिल भारतीय आचार्य रामचन्द्र शुक्ल पुरस्कार (उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान), अ.भा. रामकृष्ण बेनीपुरी पुरस्कार (बिहार सरकार, भाषा विभाग), आचार्य नंददुलारे वाजपेयी पुरस्कार (मध्य प्रदेश साहित्य परिषद), रामेश्वर गुरु पत्रकारिता पुरस्कार, श्री शरद सम्मान, आदि।

    पूर्व कार्य: निदेशक भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता; सम्पादक: वागर्थ, साक्षात्कार, अक्षरा, सदस्य केन्द्रीय साहित्य अकादमी।

    विदेश यात्रा: नार्वे।

    सम्प्रति: निदेशक, भारतीय ज्ञानपीठ, नई दिल्ली; संपादक ‘नया ज्ञानोदय’।

    सदस्य: विद्या परिषद महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय।

    परामर्शदाता: केन्द्रीय साहित्य अकादेमी (हूज. हू. हिंदी), नेशनल बुक ट्रस्ट, दिल्ली लक्ष्मीदेवी ललित कला अकादमी, कानपुर।

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