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Kahani Vastu Aur Antarvastu

Kahani Vastu Aur Antarvastu

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  • Pages: 216p
  • Year: 2013
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183615860
  •  
    हिन्दी में कहानी-आलोचना पर्याप्त समृद्ध और बहुआयामी होते हुए भी आलोचना की मुख्यधारा में अनादृत ही रही है। हिन्दी में केवल कथाकार या कहानीकार तो बहुत-से मिल जाएँगे लेकिन केवल कथा या कहानी का आलोचक ढूँढ़ने पर बहुत मुश्किल से ही मिल पाएगा। जो दो-चार कहानी-आलोचक हमारे यहाँ रहे या हैं भी तो उनका कार्य इतना सीमित और कालबद्ध रहा है कि उससे कहानी-आलोचना की कोई सामान्य सैद्धान्तिकी निखमत हो पाना संभव नहीं हो पाया। हिन्दी की कहानी-समीक्षा पर अधिकांशतः एक आरोप यह लगाया जाता रहा है कि उसके प्रतिमान कविता-समीक्षा के क्षेत्र से आयत्त किए जाते हैं, हिन्दी-आलोचना के पास कहानी-समीक्षा के ऐसे प्रतिमान लगभग न के बराबर हैं, जो कहानी को कहानी की तरह देख सवें$, जो नितरां कहानी-विधा के और उसी के लिए हों। फिलहाल यह कहना पर्याप्त होगा कि एक कहानी की समीक्षा एक कहानी की तरह ही की जानी चाहिए, उसे कविता या उपन्यास की तराजू में नहीं चढ़ा देना चाहिए। कविता और उपन्यास के प्रतिमानों से यदा-कदा मदद तो ली जा सकती है, एक सप्लीमेंट के रूप में उनका उपयोग तो किया जा सकता है लेकिन कहानी-समीक्षा की असल जमीन तो स्वयं कहानी-विधा के संघटक तत्त्वों से ही निखमत की जा सकती है। परम्परा में इस असल जमीन की पहचान कई बार की भी गई है। जहाँ नहीं है, या कहीं कोई चीज छूट गई है तो नए प्रयोगों द्वारा उसकी संभावनाओं की तलाश की जा सकती है। इससे परम्परा का मूल्यांकन भी होगा और आगे के नए रास्ते भी खुलेंगे।

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    Shambhu Gupt

    1954 के अन्तिम दिनों में ब्रज-प्रदेश राजस्थान के भरतपुर ज़िले के हलैना नामक गाँव में जन्म।

    प्रारम्भिक-माध्यमिक शिक्षा गाँव के सरकारी स्कूल में। उच्च शिक्षा भरतपुर एवं आगरा में। आगरा के प्रसिद्ध कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिन्दी तथा भाषाविज्ञान विद्यापीठ से एम.ए. तथा पी-एच.डी. बी.ए. में राजस्थान विवि. का स्वर्णपदक। एम.ए. में विवि. में प्रथम स्थान।

    राजस्थान के विभिन्न राजकीय महाविद्यालयों के हिन्दी विभागों में 27 वर्ष की नौकरी के बाद महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा में स्त्री अध्ययन विभाग में प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष पद पर कार्यरत।

    नाट्य-कर्म से जुड़ाव। ‘इप्टा’ तथा अन्य कई एमेच्योर गु्रप्स के नाटकों में अभिनय एवं पटकथा-लेखन।

    प्रारम्भ में कविता, कहानी लेकिन अब आलोचना पर केन्द्रित। गत 25 वर्षों में हिन्दी की लगभग समस्त प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं बहुपठित एवं चर्चित 200 से अधिक आलोचनात्मक लेख प्रकाशित।

    देश-भर में विभिन्न विषयों पर आयोजित 50 से अधिक राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों मे भागीदारी।

    कई विश्वविद्यालयों के हिन्दी पी-एच.डी. शोध प्रबन्धों के परीक्षक के रूप में सूचीबद्ध।

    पुरस्कार-सम्मान: ‘अभिव्यक्ति’ पत्रिका, कोटा द्वारा युवा आलोचक का पुरस्कार-1994; रामविलास शर्मा आलोचना सम्मान-2008; स्पंदन आलोचना पुरस्कार-2009; अर्जुन कवि जनवाणी पुरस्कार-2011।

    प्रकाशन: मैंने पढ़ा समाज; अर्जुन कवि के दोहे: व्याख्या एवं टिप्पणी सहित (2008)। कहानी: समकालीन चुनौतियाँ (2009)। दो अक्षर सौ ज्ञान; अर्जुुन कवि के दोहों पर सम्पादित (2010)। अनहद गरजै (2012)। साहित्य-सृजन: बदलती प्रक्रिया (2012)।

    विदेश-यात्रा: 9वें विश्व हिंदी सम्मेलन, 2012 जोहान्सबर्ग, दक्षिण अफ्रीका में विदेश मंत्रलय, भारत सरकार के प्रतिनिधिमंडल में शामिल तथा व्याख्यान।

    सम्पर्क: प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, स्त्री अध्ययन विभाग, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय।

    पोस्ट: हिंदी विश्वविद्यालय, गांधी हिल्स, वर्धा-442005 (महाराष्ट्र), भारत।

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