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Hindi Sahitya Ka Samikshatmak Itihas

Hindi Sahitya Ka Samikshatmak Itihas

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  • Pages: 320p
  • Year: 2011
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183614184
  •  
    हिन्दी साहित्य का समीक्षात्मक इतिहास डॉ. विजयपाल सिंह हिन्दी साहित्य के इतिहास के बहुत गम्भीर और जिम्मेदार अध्येता रहे हैं। रीति काव्य, खासतौर से केशव पर उनकी पुस्तकें अत्यन्त लोकप्रिय रही हैं। इस पुस्तक में उन्होंने असाधारण प्रवाह के साथ हिन्दी साहित्य के विभिन्न चरणों और प्रवृत्तियों का समीक्षात्मक अध्ययन किया है। अभी तक उपलब्ध विभिन्न विद्वानों द्वारा लिखे गए इतिहासों को ध्यान में रखते हुए तथा नए तथ्यों को समाहित करते हुए इस पुस्तक में उन्होंने प्रयास किया है कि आरम्भिक काल से लेकर आधुनिक साहित्य तक का विस्तारपूर्वक विवेचन प्रस्तुत किया जा सके। लेखक ने इस कृति को ग्यारह खंडों में विभाजित किया है। खंडों का विभाजन साहित्येतिहास के आलोचकों, समीक्षकों तथा साहित्येतिहासकारों, अनुसन्धानों तथा टिप्पणियों के विश्लेषण और पुनर्मूल्यांकन के आधार पर किया गया है। लेखक ने डॉ. गियर्सन, हजारी प्रसाद द्विवेदी, मिश्र-बन्धुओं, रामकुमार वर्मा, आचार्य रामचन्द्र शुक्ल, इडविन ग्रिब्ज जैसे विद्वानों द्वारा किए काल खंडों का भी पुनर्मूल्यांकन और विश्लेषण किया है। पुस्तक के लेखन में विद्वान आलोचक ने इस बात का विशेष ध्यान रखा है कि विद्वज्जनों के साथ-साथ यह पुस्तक छात्रों, शोधार्थियों और सामान्य पाठकों के लिए भी सहज ग्राह्य हो।

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    Vijaypal Singh

    डॉ. विजयपाल सिंह

    जन्म: 21 जून, 1923, ग्राम बनवारीपुर, जलेसर, एटा (उ.प्र.)।

    शिक्षा: एम.ए. (हिंदी) प्रथम श्रेणी, एम.ए. (संस्कृत) प्रथम श्रेणी, पी-एच.डी., डी.लिट्.।

    कार्यक्षेत्र: श्री  वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय, तिरुपति (आंध्र) तथा काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के पूर्व प्रोफेसर एवं हिंदी विभागाध्यक्ष (सन् 1960-1983 ई.)।

    रचनाएँ: केशव और उनका साहित्य (दो बार पुरस्कृत), केशव का आचार्यत्व (पुरस्कृत), केशव की काव्य चेतना (पुरस्कृत), केशव-कोश (पुरस्कृत), केशव-समग्र, सामान्य हिंदी, रीतिकालीन साहित्य कोश, रामचन्द्रिका, कवि प्रिया तथा रसिक प्रिया की टीकाएँ, हिंदी अनुसंधान, पाश्चात्य काव्यशास्त्र, भारतीय काव्यशास्त्र, संस्कृत साहित्य का इतिहास।

    संपादन: कथा-एकादशी, श्रेष्ठ कहानियाँ, श्रेष्ठ एकांकी, रीतिकाव्य संग्रह, साहित्यिक रेखाचित्र, बिहारी वैभव, काशी हिंदी विश्वविद्यालय की शोध पत्रिका के अनेक वर्षों तक प्रधान संपादक।

    विदेश यात्राएँ: रूस 1974, मॉरिशस 1976, नेपाल की अनेक बार यात्राएँ।

    सम्मान: वेंकटेश्वर से विश्वनाथ: डॉ. विजयपाल सिंह अभिनंदन ग्रंथ।

    निधन: 29 दिसम्बर, 2008

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