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Meghdoot : Ek Antaryatra

Meghdoot : Ek Antaryatra

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  • Pages: 111p
  • Year: 2005
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 8171192688
  •  
    महाकवि कालिदास की कालजयी कृति मेघदूत सदियों से प्रेम और विरह की श्रेष्ठ अभिव्यक्ति के रूप में समादृत रही है। संस्कृत साहित्य में ‘उपमा कालिदासस्य’ प्रसिद्ध उक्ति है ही और इस कृति में कालिदास की रचनात्मकता शिखर पर है। इसीलिए मेघदूत शताब्दियों से काव्य का प्रतिमान रहा है। रसिकों-विज्ञजनों में महान कृतियों के विशेष अध्ययन की सुस्थापित परम्परा रही है ताकि कृतियों में निहित विशेष भावों, सन्दर्भों, उक्तियों-अन्योक्तियों, कथाओं- अन्तर्कथाओं का खुलासा कर रचना का पूरा आनन्द लिया जा सके, और यदि यह अध्ययन डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल जैसे इतिहास-संस्कृतिमर्मज्ञ का हो तो पाठक रचना-रस से आप्लावित हो उठेंगे। डॉ. अग्रवाल ने स्वयं लिखा: ‘‘यह अध्ययन ‘मेघदूत मीमांसा’ के नाम से 1927 की शरद ऋतु में लिखा गया था। उस समय मैं यौवन के ललाम भाव से परिचित ही हुआ था और मेरा मन उसके अतिरेक सुखों की उस भावभूमि के लिए उन्मुक्त था, जो मेघदूत काव्य का सनातन धरातल है। न जाने किस पूर्व पुण्य से काशी विश्वविद्यालय में जब मैं बी.ए. की शिक्षा प्राप्त कर रहा था, तब किसी एकान्त दिवस में स्वर्गीय ज्योति की कोई किरण मेरे मानस में वह अभिज्ञान ले आई, जिसने मेरे लिए इस काव्य का अर्थ ही बदल डाला और इसके स्थूल रूप को सूक्ष्म बाण से बेध दिया। उसने एक साथ ही अध्यात्म और शृंगार के नील-लोहित धनुष से मेघदूत के भावलोक को जीतकर मुझे भी उसका नागरिक बना लिया।’’ अरसे से अनुपलब्ध इस कृति का प्रकाशन हमारा गौरव है और काव्य-रसिकों के लिए उल्लास का अवसर भी।

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    Prabhakar Shrotriya

    प्रख्यात आलोचक, नाटककार, निबन्धकार। प्रखर संतुलित : ष्टि। सर्जनात्मक भाषा और विवेचना की मौलिक भंगिमा। नई कविता का सौन्दर्यशास्त्र, नई और समकालीन  कविता  का  प्रामाणिक  मूल्यांकन, साहित्येतिहास का पुनर्मूल्यन, छायावाद, द्विवेदी-युग, प्रगतिवाद इत्यादि का नव विवेचन। दो दर्जन मौलिक और एक दर्जन सम्पादित ग्रंथ।

    प्रमुख प्रकाशन: कविता की तीसरी आँख, रचना एक यातना है, जयशंकर प्रसाद की प्रासंगिकता, संवाद (नई कविता-आलोचना), कालयात्री है कविता, अतीत के हंस: मैथिलीशरण गुप्त, प्रसाद साहित्य में प्रेमतत्त्व, हिन्दी कविता की प्रगतिशील भूमिका, शमशेर बहादुर सिंह, नरेश मेहता, सुमन: मनुष्य और सृष्टा, रामविलास शर्मा: व्यक्ति और कवि तथा धर्मवीर भारती  (संपा.), कविता की तीसरी आँख का अंग्रेजी अनुवाद ज्ीम फनपदजमेेमदबम व िच्वमजतल। नाटक: इला, साँच कहूँ तो..., फिर से जहाँपनाह। इला का ग्यारह भारतीय भाषाओं में अनुवाद (प्रक्रिया में)।

    सम्मान व पुरस्कार: अखिल भारतीय आचार्य रामचन्द्र शुक्ल पुरस्कार (उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान), अ.भा. रामकृष्ण बेनीपुरी पुरस्कार (बिहार सरकार, भाषा विभाग), आचार्य नंददुलारे वाजपेयी पुरस्कार (मध्य प्रदेश साहित्य परिषद), रामेश्वर गुरु पत्रकारिता पुरस्कार, श्री शरद सम्मान, आदि।

    पूर्व कार्य: निदेशक भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता; सम्पादक: वागर्थ, साक्षात्कार, अक्षरा, सदस्य केन्द्रीय साहित्य अकादमी।

    विदेश यात्रा: नार्वे।

    सम्प्रति: निदेशक, भारतीय ज्ञानपीठ, नई दिल्ली; संपादक ‘नया ज्ञानोदय’।

    सदस्य: विद्या परिषद महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय।

    परामर्शदाता: केन्द्रीय साहित्य अकादेमी (हूज. हू. हिंदी), नेशनल बुक ट्रस्ट, दिल्ली लक्ष्मीदेवी ललित कला अकादमी, कानपुर।

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