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Manipuri LokKatha Sansar

Manipuri LokKatha Sansar

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  • Pages: 151p
  • Year: 1999
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 8171194338
  •  
    प्राचीन मणिपुरी समाज सामान्यत: दो भागों में विभक्त था-एक, मीतै जाति और दूसरा, जनजातियों का समाज । मीतै जाति एक विशेष प्रकार की संस्कृति की उपासना करती थी और बाकी जनजातियाँ थोड़ी-थोड़ी भिन्नता के साथ एक अन्य प्रकार की जीवन-शैली का पालन करती थीं । कालांतर में मीतै जाति के बड़े भाग ने गौड़ीय वैष्णव संस्कृति को अपना लिया और यह ब्राह्मणवाद की छाया में पलने लगा, किंतु आश्चर्यजनक रूप से यह धार्मिक परिवर्तन जनजातियों के जीवन को प्रभावित नहीं कर सका । वे पर्वतीय अंचलों में उसी प्रकार जीती रहीं । बहुत बाद में ईसाइयत ने उनके जीवन में हस्तक्षेप किया । यह पूरी सांस्कृतिक स्थिति धीरे-धीरे होनेवाले परिवर्तनों और उसके प्रभावों के साथ मणिपुरी लोक-कथाओं में विद्यमान है । किंतु प्राचीन मणिपुरी लोक-मानस का यह इतिहास धीरे-धीरे लुप्त होने की दिशा में बढ़ रहा है । जनजातियों द्वारा ईसाई धर्म स्वीकार कर लेने के बाद जीवनशैली में बड़ी तीव्र गति से बदलाव आ रहा है और परंपराओं, मान्यताओं आदि का रूप प्रभावित हो रहा है । ईसाइयत के अभाव से एक नए प्रकार के लोक-साहित्य का विकास होगा-होना प्रारंभ हो गया है-यह स्वाभाविक है, किंतु लोक साहित्य विज्ञानियों की चिंता का विषय यह होना चाहिए कि यदि जनजातियों द्वारा ईसाई धर्म अपनाने से पूर्व की लोक-संपदा का समय रहते संग्रह नहीं किया गया, तो एक पूरा सांस्कृतिक परिदृश्य पटाक्षेप का शिकार हो जाएगा । 'मणिपुरी लोक-कथा संसार पुस्तक की तैयारी के मूल में यह चिंता विशेष रूप से रही है ।

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    Devraj

    प्रो. देवराज

    जन्म: सन् 1955, नजीबाबाद (उत्तर प्रदेश)।

    शिक्षा: एम.ए. (हिन्दी), ‘नई कविता में रोमानी और यथार्थवादी अवधारणाओं की भूमिका’ पर पी-एच.डी.।

    साहित्य: चिनार, तेवरी (कविता-संग्रह); नई कविता, संवेदना का साक्ष्य, नई कविता की परख,  तेवरी चर्चा, मणिपुरी कविता: मेरी : ष्टि में (समीक्षा-ग्रन्थ); मणिपुरी लोककथा संसार (लोक-साहित्य), संकल्प और साधना (जीवनी-साहित्य)। मीतै चनु, मणिपुर: विविध संदर्भ, मणिपुर: भाषा और संस्कृति, नवजागरणकालीन मणिपुरी कविताएँ, आधुनिक मणिपुरी कविताएँ, प्रतिनिधि मणिपुरी कहानियाँ, फागुन की धूल, माँ की आराधना, जित देखूँ, तुझे नहीं खेया नाव, आन्द्रो की आग, शिखर-शिखर, कमल: सम्पूर्ण रचनाएँ, कवि चाओबा: जीवन और साहित्य, प्रयास, क्षण के घेरे में घिरा नहीं (सम्पादित ग्रन्थ); बीहड़ पह के यात्री (सम्पादक-सदस्य)।

    अन्य गतिविधियाँ: सन् 1985 से भारत के सीमान्त राज्य, मणिपुर में रहकर सम्पूर्ण पूर्वोत्तर भारत में हिन्दी प्रचार आन्दोलन, हिन्दी साहित्य और हिन्दी पत्रकारिता के विकास में भागीदारी। मणिपुर हिन्दी परिषद्, इम्फाल मणिपुर संस्कृत परिषद, राष्ट्रीय हिन्दी परिषद, मेरठ, नागरी लिपि परिषद, नई दिल्ली के आजीवन सदस्य। पूर्वोत्तर अध्ययन परिषद के संस्थापक-अध्यक्ष। हिन्दी लेखक मंच, मणिपुर के संस्थापक-सचिव। मणिपुर में हिन्दतरभाषी हिन्दी कवि-सम्मेलन परम्परा के प्रारम्भकर्ता। हिन्दी साहित्य में ‘तेवरी’ काव्यान्दोलन के प्रस्तुतकर्ताओं में प्रमुख। मणिपुर विश्व विद्यालय के मानविकी-संकाय के अधिष्ठाता एवं हिन्दी विभाग के अध्यक्ष रहने के बाद सम्प्रति स्वतंत्र लेखन।

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