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Media Aur Bazarvad

Media Aur Bazarvad

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  • Pages: 143p
  • Year: 2004
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 10: 8171197566
  • ISBN 13: 9788171197569
  •  
    बाजशर नाम की संस्था आदिम समाज के लिए भी रही है, और आज के समाज के लिए भी है। इसलिए बाजशर से बैर करके आप अपना समाज और अपना जीवन चला सकें, इसकी सम्भावना नहीं है। लेकिन जब बाजशर मनुष्य की नियति तय करे तो इसका मतलब यह है कि अब तक जो मनुष्य का सेवक रहा है, वह मनुष्य का मालिक होना चाहिए। बाजशर मनुष्य का बहुत अच्छा सेवक है। कोई पाँच हजार साल से उसकी सेवा कर रहा है। शायद उससे भी ज्यादा वर्षों से कर रहा हो। अगर वो मनुष्य की नियति तय करेगा तो उसमें एक मूल खोट आनेवाला है, क्योंकि बाजशर भाव से चलता है, बाजशर मूल्य से नहीं चलता और मूल्यों के बिना किसी भी मानव समाज की कल्पना नहीं की जा सकती। मानव समाज भाव से नहीं चल सकता, मूल्य से ही चल सकता है। मानव समाज को मूल्य से चलना है। अब जो बाजशर की शक्तियाँ दुनिया में इकट्ठा हुई हैं उससे आप कैसे निपटेंगे ? मुझे कई लोगों ने कहा कि यह तो हिन्दुस्तान है जो जाजम की तरह बिछने के लिए तैयार है, नहीं तो जहाँ-जहाँ बाजशर गया है वह उस देश के समाज की शर्तों पर गया है। पर हमने एक कमजशेर देश की तरह से अन्तरराष्ट्रीय बाजशर को स्वीकारा है। इसलिए अब हमारे यहाँ जाजम की तरह बिछ जाने का लगभग कुचक्र चल रहा है !

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    Ramsharan Joshi

    रामशरण जोशी
    मार्च, 1944 में अलवर (राजस्थान) में जन्मे रामशरण जोशी पेशे से पत्रकार, सम्पादक, समाजविज्ञानी और मीडिया के अध्यापक रहे हैं। भारतीय जनसंचार संस्थान में विजिटिंग प्रोफेसर। 1999 से 2004 तक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय में पूर्णकालिक प्रोफेसर और कार्यपालक निदेशक के पद पर कार्यरत रहे। आप राष्ट्रीय बाल भवन के अध्यक्ष और केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के उपाध्यक्ष भी रहे हैं। महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा में विजिटिंग प्रोफेसर रहे हैं। आपकी प्रमुख कृतियाँ हैं—'आदमी, बैल और सपने', 'आदिवासी समाज और विमर्श', '21वीं सदी के संकट', 'मीडिया विमर्श' आदि।
    आपको बिहार सरकार द्वारा 'राजेन्द्र माथुर राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार', मध्य प्रदेश सरकार का 'राष्ट्रीय शरद जोशी सम्मान', हिन्दी अकादमी, दिल्ली द्वारा 'पत्रकारिता सम्मान', 'गणेश शंकर विद्यार्थी साम्प्रदायिक सौहार्द पुरस्कार' से सम्मानित किया जा चुका है। आप फिलहाल नई दिल्ली में परिवार के साथ रहते हुए स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं।
    joshisharan1@gmail.com

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