• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Muktibodh Ki Kavitaai

Muktibodh Ki Kavitaai

Availability: In stock

-
+

Regular Price: Rs. 450

Special Price Rs. 405

10%

  • Pages: 187p
  • Year: 2019, 2nd Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788171193660
  •  
    मुक्तिबोध के कला-सिद्धांत कविता को एक सामाजिक-सांस्कृतिक प्रक्रिया मानते हैं, उनकी कविताई इसका जागता जीता प्रमाण है । उनकी कविताई में भ्रमों से परिपूर्ण युगीन यथार्थ का जीवन-जाल तो मिलता है पर उसकी बुनावट में रचनागत अर्थ का कोई भ्रम नहीं है । जो महानुभाव कविता को प्राय : प्राय : एक कलात्मक या शिल्पात्मक प्रक्रिया समझते हैं उनके लिए तो मुक्तियों ध की कविताएं निश्चित रूप से ' जटिल ',' अधूरी ',' आत्मपरक अभिव्यक्ति ', ' भयानक ' या ' ऊबड़-खाबड़, हो सकती हैं, किंतु यदि हम मुक्तिबोध की रचना-प्रक्रियापरक समझ से परिचित हो लें और उनके सूत्र- ' कला एक सामाजिक प्रक्रिया है '- को आधार मानकर उनकी रचनाओं में जाने की कोशिश करें, तो प्रत्यक्ष पाते हैं कि मुक्तिबोध शब्द के असामाजिक प्रयोग के कवि नहीं थे । हां, इतना तो है ही कि उनके कथ्य की सार्थकता तभी पकड़ में आ पाती है जब हम कविता के बारे में उनके स्वयं के दृष्टिकोण से रूबरू हो लें । ऐसा अगर हम कर लें तो उस गलती से भी बचा जा सकता है जो मुक्तिबोध के संदर्भ में जाने या अनजाने होती आ रही है । इस पुस्तक में मुक्तिबो ध की सैद्धांतिक समीक्षाई के आधार पर उनकी छोटी-बड़ी ग्यारह प्रमुख कविताओं की व्यावहारिक समीक्षा की गई है । साथ ही एक साफ-स्प थरा रास्ता बनाने की .कोशिश है कि जिस रास्ते पर चलकर मुक्तिबोध की कविताई तक पहुंचा जा सकता है । अशोक चक्रधर मुक्तिबोध की कविताओं पर कार्य करने वाले प्रारंभिक लेखकों में गिने जाते हैं । यही कारण कि उनकी यह पुस्तक आज भी पाठकों के बीच अपने कई कारणों से अत्यंत उपयोगी बनी हुई है ।

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Ashok Chakradhar

    जन्म: 8 फरवरी, 1951, खुर्जा (उ.प्र.)।

    शिक्षा: एम.ए., एम.लिट्., पी-एच.डी. (हिन्दी) विश्वविद्यालय अनुदान आयेाग के ‘कैरिअर अवार्ड’ के अंतर्गत ‘नवसाक्षर साहित्य के आयाम’ विषय पर उत्तर पी-एच.डी. शोधकार्य।

    प्रकाशित पुस्तकें:

    काव्य-संकलन: भोले भाले, तमाशा, चुटपुटकुले, सो तो है, हंसो और मर जाओ, बूढ़े बच्चे, ए जी सुनिए।

    नाटक: रंग जमा लो, चार किस्से चौपाल के, सब कुछ मांगना लेकिन, बिटिया की सिसकी।

    बाल-साहित्य: कोयल का सितार, एक बगिया में, हीरों की चोरी, स्नेहा का सपना।

    प्रौढ़ साहित्य: नई डगर, अपाहिज कौन, हमने मुहिम चलाई, भई बहुत अच्छे, बदल जाएंगी रेखा, ताउम्र का आराम, घड़े ऊपर हंडिया।

    समीक्षा: मुक्तिबोध की काव्यप्रक्रिया, मुक्तिबोध की कविताई, मुक्तिबोध की समीक्षाई, छाया के बाद (सहसंपादन)।

    अनुवाद: इतिहास क्या है (ई.एच. कार)।

    फ़िल्म लेखन-निर्देशन:

    टेलीफ़िल्म: गुलाबड़ी, जीत गई छन्नो, मास्टर दीपचंद, हाय मुसद्दी, तीन नज़ारे।

    वृत्तचित्र: पंगु गिरि लंघै, गोरा हट जा, साक्षरता निकेतन, विकास की लकीरें।

    धारावाहिक: भोर तरंग, ढाई आखर, बुआ भतीजी, बोल बसन्तो।

    फ़िल्म लेखन:

    फीचर फ़िल्म: जमुना किनारे।

    धारावाहिक: वंश, अलबेला, सुरमेला, कहकहे, परदा उठता है।

    विगत तीन दशकों से विभिन्न जनसंचार माध्यमों में सक्रिय।

    सम्प्रति: प्रोफ़ेसर एवं अध्यक्ष, हिंदी विभाग, जामिया मिल्लिया इस्लामिया (केन्द्रीय विश्वविद्यालय) नई दिल्ली-110025

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna
    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144