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Muktibodh Ki Samikshaai

Muktibodh Ki Samikshaai

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  • Pages: 176p
  • Year: 2016, 2nd Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 10: 8171193676
  • ISBN 13: 9788171193677
  •  
    नई कविता अनेक प्रवृत्तियों का समुच्चय थी, उसकी रचना-प्रक्रिया जटिल थी, इसी कारण उसकी अर्थ-प्रक्रिया भी ‘काव्यार्थ’ भर नहीं रह गई। नई कविता की रचना- प्रक्रिया और अर्थ-प्रक्रिया जानने का मतलब हो गया - रचनाकार के युग, उसकी समीक्षा-समझ, विचारधाराओं, युगीन परिस्थितियों एवं भाषा-रूपों को समग्रता में जानना। समग्रता में न जा पाने के इस संकट को मुक्तिबोध ने पहचाना था। कदाचित इसीलिए उन्होंने कविता की रचना-प्रक्रिया पर पहली बार इतना काम किया कि आधुनिक कविता के इस तकनीकी पहलू पर सोचने को विवश कर दिया। और इस तरह रचना-प्रक्रिया की उन चली आती हुई शास्त्रीय धारणाओं को बेकार सिद्ध किया, जिनके चलते आधुनिक हिंदी साहित्य जैसे-तैसे जी रहा था, नई कविता वर्जित प्रदेश बनी हुई थी। रचना-प्रक्रिया पर उठाई गई उक्त बहस ने नई कविता की समझ को फैलाया और यह महसूस कराया कि नई कविता एक निश्चित रचना-प्रक्रिया की पैदाइश है, जिसके रचना-नियम पुनरुत्थानवादी या स्वच्छंदतावादी काव्य की रचना-प्रक्रिया के नियमों से नितान्त अलग और कहीं-कहीं तो विपरीत हैं। पर क्या कहा जाए कि अभी भी हिन्दी में मुक्तिबोध द्वारा प्रस्तुत की गई जीवन-दृष्टि और समीक्षा-दृष्टि को पर्याप्त गम्भीरता से नहीं लिया जा रहा है। इसका सबसे अधिक नुकसान नई कविता की सार्थकता के सवाल को भुगतना पड़ा। समीक्षा वैसे तो रचना के बाद की चीज़ है लेकिन मुक्तिबोध की कविताई में जाने से पहले उनकी समीक्षाई जानना ज़रूरी है। ज़रूरी नहीं बहुत ज़रूरी है। बहुत ज़रूरी भी क्या अनिवार्य है। इस पुस्तक के रचनाकार अशोक चक्रधर ऐसा मानते हैं।

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    Ashok Chakradhar

    जन्म: 8 फरवरी, 1951, खुर्जा (उ.प्र.)।

    शिक्षा: एम.ए., एम.लिट्., पी-एच.डी. (हिन्दी) विश्वविद्यालय अनुदान आयेाग के ‘कैरिअर अवार्ड’ के अंतर्गत ‘नवसाक्षर साहित्य के आयाम’ विषय पर उत्तर पी-एच.डी. शोधकार्य।

    प्रकाशित पुस्तकें:

    काव्य-संकलन: भोले भाले, तमाशा, चुटपुटकुले, सो तो है, हंसो और मर जाओ, बूढ़े बच्चे, ए जी सुनिए।

    नाटक: रंग जमा लो, चार किस्से चौपाल के, सब कुछ मांगना लेकिन, बिटिया की सिसकी।

    बाल-साहित्य: कोयल का सितार, एक बगिया में, हीरों की चोरी, स्नेहा का सपना।

    प्रौढ़ साहित्य: नई डगर, अपाहिज कौन, हमने मुहिम चलाई, भई बहुत अच्छे, बदल जाएंगी रेखा, ताउम्र का आराम, घड़े ऊपर हंडिया।

    समीक्षा: मुक्तिबोध की काव्यप्रक्रिया, मुक्तिबोध की कविताई, मुक्तिबोध की समीक्षाई, छाया के बाद (सहसंपादन)।

    अनुवाद: इतिहास क्या है (ई.एच. कार)।

    फ़िल्म लेखन-निर्देशन:

    टेलीफ़िल्म: गुलाबड़ी, जीत गई छन्नो, मास्टर दीपचंद, हाय मुसद्दी, तीन नज़ारे।

    वृत्तचित्र: पंगु गिरि लंघै, गोरा हट जा, साक्षरता निकेतन, विकास की लकीरें।

    धारावाहिक: भोर तरंग, ढाई आखर, बुआ भतीजी, बोल बसन्तो।

    फ़िल्म लेखन:

    फीचर फ़िल्म: जमुना किनारे।

    धारावाहिक: वंश, अलबेला, सुरमेला, कहकहे, परदा उठता है।

    विगत तीन दशकों से विभिन्न जनसंचार माध्यमों में सक्रिय।

    सम्प्रति: प्रोफ़ेसर एवं अध्यक्ष, हिंदी विभाग, जामिया मिल्लिया इस्लामिया (केन्द्रीय विश्वविद्यालय) नई दिल्ली-110025

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