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Natya Prastuti : Ek Parichay

Natya Prastuti : Ek Parichay

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  • Pages: 151p
  • Year: 1997
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 10: 817119348X
  • ISBN 13: 9788171193486
  •  
    नाट्य प्रस्तुति: एक परिचय रंगकर्म में रुचि रखनेवाले उन सभी व्यक्तियों के लिए एक महत्त्वपूर्ण पुस्तक है, जो नाटक के क्षेत्र में नये हैं और नाट्य-विधा के सम्बन्ध में अधिक विस्तृत व गहन जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं। इस पुस्तक का रचना-शिल्प इन अर्थों में अधिक पठनीय एवं ग्राह्य है कि इसमें रंगकर्म से सम्बद्ध सभी छोटे-छोटे तथ्यों की सिलसिलेवार चर्चा की गई है, जैसे - अभिनय, निर्देशन, ध्वनि-व्यवस्था, प्रकाश-व्यवस्था, पात्र-चयन, संवाद, दर्शक, रंग-स्थल आदि। गाँव-क़स्बे अथवा छोटे और पिछड़े इलाक़ों में रहनेवाले वे तमाम प्रतिभाशाली नाट्य-प्रेमी इस कृति से लाभान्वित होंगे जिनके लिए किसी नाट्य-विद्यालय अथवा नाट्य-संस्था में सम्मिलित होना सम्भव नहीं है लेकिन जो छोटी-छोटी रंग-मंडलियाँ बनाकर नाट्य-क्षेत्र में सक्रिय हैं। इस पुस्तक के माध्यम से वे नाट्य-विधा से विधिवत् परिचित होंगे और अपनी प्रस्तुतियों को अधिक सम्प्रेषणीय तथा अधिक अर्थवत्तापूर्ण बना सकेंगे। इस पुस्तक में भारतीय रंग-पद्धति के साथ-साथ पश्चिमी निर्देशकों और प्रस्तोताओं के विचारों और तकनीक का भी वर्णन है। चूँकि आज के नाट्य-मंच का स्वरूप बहुत कुछ ‘प्रोसीन्यम’ है और यह प्रोसीन्यम थियेटर दरअसल पश्चिमी रंग-पद्धति है, इसलिए पश्चिमी रंग-पद्धति और रंग-परम्परा की चर्चा भी इस पुस्तक के दायरे में है। दोनों ही रंग-पद्धतियों के बुनियादी तत्त्व एक हैं और किसी एक रंग-पद्धति को गम्भीरतापूर्वक समझ लेने से दूसरी को समझना काफ़ी सरल है। नाट्य-विधा के क्षेत्र में रमेश राजहंस की यह श्रमसाध्य कृति निश्चय ही उपयोगी साबित होगी।

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    Ramesh Rajhans

    जन्म: भागलपुर, बिहार।

    शिक्षा: स्नातक (इतिहास और समाजशास्त्र), मगध विश्वविद्यालय, बिहार। स्नातकोत्तर (हिन्दी), बम्बई विश्वविद्यालय, बम्बई।

    प्रमुख निर्देशित नाटक: शुतुर्मुर्ग, चिन्दियों की एक झालर, पेपरवेट, फन्दी, बन्धन अपने-अपने, प्रेत, गुड़ियाघर, अन्नु (प्रेम का अर्थशास्त्र)।

    कहानी: अपने-अपने हिस्से का दुख।

    एकांकी: कैम्पफ़ायर।

    रेडियो नाटक: मृगतृष्णा, रिश्ते की तलाश, नासूर, प्रतिबिम्ब।

    अनुवाद: प्रेत, गुड़ियाघर (हेनरिख इब्सन), बैरिकेड (उत्पल दत्त), राजदर्शन (मनोज मित्र), रक्षा बन्धन (अथोल फ़्यूगार्ड)।

    महत्त्वपूर्ण संस्थाओं की सदस्यता:

    1. भारतीय जननाट्य संघ, बम्बई।

    2. नेशनल सेन्टर फ़ॉर द परफ़ॉर्मिंग, आर्ट्स, बम्बई।

    3. इंडियन स्कूल ऑफ़ सोशल साइंसिज, महापालिका मार्ग, बम्बई।

    4. एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ बॉम्बे, टाउन हॉल, बम्बई।

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