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Nayi Kahani Aur Amarkant

Nayi Kahani Aur Amarkant

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  • Pages: 242p
  • Year: 1999
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 8171194648
  •  
    प्रेमचंद की कहानी-परंपरा के वाहक के रूप में ख्यात अमरकांत नई कहानी के भी प्रमुख रचनाकार हैं । उनकी कहानियों के निम्न-मध्यवर्गीय और मध्यवर्गीय पात्र 'कफन' के घीसू-माधव के वंशज प्रतीत होते हैं । साथ ही स्वातंत्रयोत्तर भारत के मोहभंग और निराशा को भी उन्होंने अपनी कहानियों में समेटा है । बल्कि कहना चाहिए कि धीरे-धीरे यही तत्व उनकी कहानियों में केंद्रीय होते चले गए हैं । साथ ही आया व्यंग्य और एक तीखा कटाक्ष जो स्वतंत्रता-बाद के सफेद-पोश भारतीय समाज की निर्ममतापूर्वक पोल खोलता है । इसी व्यंग्य के सहारे उन्होंने हमारे भीतर स्थायी भाव की तरह जड़ जमाते संत्रास, ऊब, घुटन, अकेलेपन और भीतरी-बाहरी हिंसा को भी बड़ी कुशलता के साथ रेखांकित किया है । प्रस्तुत पुस्तक में अमरकांत के लगभग संपूर्ण कथा-जगत पर एक गहन दृष्टि के साथ-साथ नई कहानी-दोलन में उनकी अवस्थिति को तलाशने की भी कोशिश की गई है । इस प्रयास में एक तरफ जहाँ अमरकांत की रचनात्मकता के विभिन्न पहलुओं और उनकी कहानियों में आए पात्रों और अनेक शिल्प व कथ्य-गत तत्वों का खुलासा हुआ है, वहीं नई कहानी-दोलन के विशिष्ट पक्षों और अन्य समकालीन रचनाकारों के योगदान पर भी व्यापक प्रकाश पड़ा है ।

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    Nirmal Singhal

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