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Peedhiyan

Peedhiyan

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  • Pages: 247p
  • Year: 2009
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183612784
  •  
    तमिल साहित्य की पहली आंचलिक कृति के रूप में समादृत प्रस्तुत उपन्यास पीढ़ियाँ (तमिल: तलैमुरैगळ) को मास्टर पीसेज़ ऑफ़ इंडियन लिटरेचर के यशस्वी सम्पादक डॉ. के.एम. जॉर्ज ने भारतीय साहित्य की उत्कृष्ट कृति के रूप में स्थान दिया है। तमिल के श्रेण्य महाकाव्य शिलप्पादिकारम के रचयिता कवि इलंगो ने जिस श्रेष्ठि-कुल के सामान्य जन को काव्य के केन्द्र में रखा था, उसी कुल की एक शाखा कालांतर में धुर दक्षिण की ओर संक्रमण कर गई और कन्याकुमारी जिले में इरणियल परिसर के सात गाँवों में बसकर एलूर चेट्टी कहलाई। आधुनिक तमिल साहित्य के जाने-माने हस्ताक्षर नील. पर्निंाभन ने इसी चेट्टी-समुदाय के सम्पूर्ण जीवन को, वर्तमान युग में अपनी ही रूढ़ियों और अंधविश्वासों के मकड़जाल में फँसकर अपनी अस्मिता बनाए रखने के लिए उसके द्वारा किए जा रहे जद्दोजहद को इस उपन्यास में उकेरा है। उपन्यास की खासियत यह है कि एक समुदाय-विशेष के आस्था-विश्वास, जन्म से लेकर मृत्युपर्यंत विविध संस्कार, रूढ़ियाँ, अंधविश्वास और वर्जनाएँ, लोरी और शोकगीत सहित ग्राम्य गीत, कर्ण-परम्परा से चली आ रही दंतकथाएँ आदि पात्रों की अपनी बोली में अविकल रूप से इसमें दर्ज हैं। इस कारण यह उपन्यास नृविज्ञानियों और समाज-भाषावैज्ञानिकों के लिए अमूल्य दस्तावेज का काम दे सकता है। लगभग सत्तर साल की कालावधि में व्याप्त तीन पीढ़ियों के इतिवृत्त के केन्द्र में है दिरवि का परिवार, जो अपनी नेकनीयती और भोलेपन के कारण समाज के सबल वर्ग के स्वार्थपूर्ण हथकंडों का शिकार बनता है। अपनी बहन पर लगाए गए झूठे इल्जाम के खिलाफ़ यौवन की दहलीज़ पर कदम रख रहे दिरवि को अकेले ही एक धर्मयुद्ध लड़ना पड़ता है और इस संघर्ष में वह कैसे कामयाब होता है, यही इस उपन्यास का केन्द्रबिन्दु है। उपन्यास में यह भी दिखाया गया है कि अर्थहीन रूढ़ियों और परम्परागत विश्वासों की दुहाई देकर नारी को घर की चहारदीवारी के अन्दर बन्द रखने की मूढ़ता जिस समुदाय में प्रचलित हो, उसमें रातोंरात आमूल-चूल परिवर्तन लाना सम्भव नहीं है। अभी एक विशाल रणांगण में एक लम्बा युद्ध लड़ना शेष है। कल्पना की रंगीनी और अतिरंजनापूर्ण वर्णनों से सर्वथा अस्पृश्य होकर भी कोई कृति इतनी रोचक और मर्मस्पर्शी हो सकती है, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है नील. पर्निंाभन की पीढ़ियाँ।

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    Neel. Padamnabhan

    नील पद्मनाभन

    जन्म: 26 अप्रैल, 1938

    शिक्षा: बी.एस-सी. (इंजीनियरिंग); एफ.आई.ई.

    तमिल के आधुनिक कथा-साहित्य के जाने-माने हस्ताक्षर नील. पद्मनाभन मलयालम के विद्युत बोर्ड के चीफ इंजीनियर पद से निवृत्त नील पद्मनाभन हृदय से साहित्यकार हैं कहानी, उपन्यास, उपन्यासिकाएँ, कविता-संग्रह, समीक्षा आदि विविध विधाओं में साठ के करीब उत्कृष्ट रचनाओं के स्रष्टा पद्मनाभन लेखकों के लेखक माने जाते हैं।

    केन्द्रीय साहित्य अकादेमी की कार्यकारिणी के सदस्य रहते हुए (1998-2002) आपने तमिल विशेषज्ञ समिति का नेतृत्व किया। राजा अण्णायलै पुरस्कार, तमिलनाडु सरकार का उत्कृष्ट पुरस्कार, तजांऊर तमिल विश्वविद्यालय पुरस्कार आदि से विभूषित नील पद्मनाभन साहित्य अकादेमी के अनुवाद पुरस्कार से भी नवाजे गए। हाल में आपको अपने उपनास इलै उदिर कालय (पतझड़) पर साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त हुआ। आपकी अनेक कृतियाँ अंग्रेजी, रूसी और फ्रेंच के अतिरिक्त भारतीय भाषाओं में अनूदित हैं।

    सम्पर्क: नीलकंठ, 39/1870 करियाली रोड, सरस्वतीपुरम, तिरुवनंतपुरम- 695009 (केरल)

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