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Radio Varta Shilp

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  • Pages: 132p
  • Year: 2019, 3rd Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788171190850
  •  
    वैज्ञानिक आविष्कारों ने जिन नए साहित्य-रूपों को जन्म दिया है, उनमें एक ‘रेडियो वार्ता’ भी है। अंग्रेजी में इसे ‘रेडियो टॉक’ कहते हैं। मात्र श्रव्य होने के कारण यह लेख या निबन्ध से भिन्न है और इसका अपना शिल्पगत वैशिष्ट्य भी है। इसी का सूक्ष्म विश्लेषण-विवेचन सुपरिचित नाट्यालोचक एवं रेडियो नाट्य-विशेषज्ञ डॉ. सिद्धनाथ कुमार ने ‘रेडियो वार्ता शिल्प’ में किया है। श्रव्य माध्यम के वैशिष्ट्य में रुचि रखने वाले लेखकों एवं प्रसारणकर्ताओं द्वारा इस पुस्तक का अवश्य ही स्वागत किया जाएगा। ‘रेडियो वार्ता शिल्प’ अपने विषय की हिन्दी में प्रथम पुस्तक है और इसे पर्याप्त मान्यता मिल चुकी है। यूँ तो यह पुस्तक मूलतः रेडियो वार्ता के लेखन, प्रसारण पर केन्द्रित है, पर लेखक ने ‘प्रभावशाली लेखन’ के व्यावहारिक पक्ष का जो सोदाहरण विवेचन किया है, वह ‘लेखन-कला’ में पारंगत बनाने के लिए पर्याप्त है।

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    Siddhanath Kumar

    सिद्धनाथ कुमार

    जन्म: 13 अगस्त, 1927, बक्सर (बिहार)।

    शिक्षा: एम.ए., पी-एच.डी, डी.लिट्.।

    सेवा-कार्य: कुछ कॉलेजों में अध्यापन, आकाशवाणी के पटना केंद्र मेें नाटक-लेखक और सहायक प्रोड्यूसर। सन् 1962 से निरंतर राँची विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में रहे। वहीं से प्रोफेसर पद से अगस्त, 1989 में सेवानिवृत्त।

    कृतियाँ: प्रसाद के नाटकों का पुनर्मूल्यांकन, हिंदी एकांकी की शिल्पविधि का विकास, हिन्दी एकांकी, रेडियो नाट्य- शिल्प, वार्ता-शिल्प, रेडियो नाटक की कला, हिंदी पद्यनाटक: सिद्धांत और इतिहास, संवेदना और शिल्प; समीक्षा-शृंखला की पाँच पुस्तकों में: आधे-अधूरे (मोहन राकेश), अंधेर नगरी (भारतेंदु), भारतदुर्दशा (भारतेंदु), चंद्रगुप्त (प्रसाद) और स्कंदगुप्त (प्रसाद) का अध्ययन।

    टूटा हुआ आदमी और जिन्दगी, तुम कहाँ हो? (काव्य); कवि, सृष्टि की साँझ और अन्य काव्यनाटक, रंग और रूप, वे अभी भी क्वाँरी हैं, आदमी है नहीं है, मुर्दे जिएँगे, रोशनी शेष है, आतंक, रास्ता बंद है और अशोक (नाटक)।

    कमाल कुर्सी का, चमचे वही रहे, मिले सुर मेरा-तुम्हारा, मियाँ-बीवी राज़ी तो, देशभक्ति की जय (व्यंग्य)।

    जीवनचरित, बालसाहित्य की अनेक पुस्तकें। हिंदी साहित्य कोश, हिंदी साहित्य का बृहत् इतिहास आदि अनेक संदर्भ ग्रंथों में टिप्पणियाँ और लेख।

    पुरस्कार और सम्मान: सन् 1954 में वॉयस ऑफ अमेरिका की हिंदी सर्विस द्वारा आयोजित रेडियो रूपक प्रतियोगिता में एक रूपक सर्वश्रेष्ठ पुरस्कृत। नाट्य कृतियों के लिए

    बिहार राष्ट्रभाषा परिषद, राधाकृष्ण पुरस्कार, रामवृक्ष बेनीपुरी पुरस्कार (राजभाषा विभाग, बिहार)ए भारतेंदु हरिश्चंद्र पुरस्कार (सूचना और प्रसारण मंत्रालय) आदि द्वारा सम्मानित।

    संपर्क: आलोक, हेसल, राँची-834 005 (झारखंड)

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