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  • Pages: 159p
  • Year: 2018, 11th Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183613064
  •  
    यू. आर. अनंतमूर्ति के इस कन्नड़ उपन्यास को युगांतरकारी उपन्यास माना गया है ! ब्राहमणवाद, अंधविश्वासों और रूढिगत संस्कारों पर अप्रत्यक्ष लेकिन इतनी पैनी चोट की गई है कि उसे सहना सनातन मान्यताओं के समर्थकों के लिए कहीं-कहीं दूभर होने लगता है ! 'संस्कार' शब्द से अभिप्राय केवल ब्राहमणवाद की रूढ़ियों से विद्रोह करनेवाले नारणप्पा के डाह-संस्कार से ही नहीं है ! अपने लिए सुरक्षित निवास-स्थान, अग्रहार आदि के ब्राहमणों के विभिन्न संस्कारों पर भी रोशनी डाली गई है-स्वर्णाभूषण और सम्पति-लोलुपता जैसे संस्कारों पर भी ! ब्राहमण-श्रेष्ठ और गुरु प्रनेशाचार्य तथा चंद्री, बल्ली और पद्मावती जैसे अलग और विपरीत दिखाई देनेवाले पात्रों की आभ्यंतरिक उथल-पुथल के सारे संस्कार अपने असली और खरे-खोटेपन समेत हमारे सामने उघड आते हैं ! धर्म क्या है ? धर्म-शास्त्र क्या है ? क्या इनमें निहित आदेशों में मनुष्य की स्वतंत्र सत्ता के हरण की सामर्थ्य है, या होनी चाहिए ? ऐसे अनेक सवालों पर यू. आर. अनंतमूर्ति जैसे सामर्थ्यशील लेखक ने अत्यंत साहसिकता से विचार किया है, और यही वैचारिक निष्ठा इस उपन्यास को विशिष्ट बनाती है !

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    U. R. Ananthamurthy

    यू–आर– अनन्तमूर्ति
    जन्म : 21 दिसम्बर, 1932 ई– में मिलिगे नामक गाँव, जिला शिमोगा (कर्नाटक) ।
    शिक्षा : मैसूर विश्वविद्यालय से अंगे्रजी साहित्य में एम–ए– और बर्मिंघम विश्वविद्यालय (इंग्लैंड) से पी–एच–डी– ।
    कन्नड़ के प्रख्यात उपन्यासकार और कथा–लेखक । यदा–कदा कविताओं की भी रचना ।
    सन् 1975 में आयोवा विश्वविद्यालय, 1978 में तुफ्त्स विश्वविद्यालय (अमेरिका) में विज़िटिंग प्रोफेसर और 1985 में आयोवा विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय लेखक सम्मेलन में हिस्सेदारी । सन् 1987 से 1991 तक महात्मा गां/ाी विश्वविद्यालय, कोट्टायम के उप–कुलपति और सन् 1980–1992 के बीच मैसूर विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्रोफेसर–पद पर कार्य । नेशनल बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली के चेयरमैन और साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष–पद पर भी कार्यरत रहे ।
    भारतीय ज्ञानपीठ सहित साहित्य, संस्कृति और फिल्म क्षेत्र के अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित । देश–विदेश में आयोजित अनेक साहित्य–सम्मेलनों में व्याख्यान और अनेक संस्थाओं की मानद सदस्यता । अवस्था, संस्कार आदि उपन्यासों पर फिल्मों का निर्माण । अंग्रेजी, रूसी, फ्रेंच, हंगेरियन, हिन्दी, बांग्ला, मलयालम, मराठी, गुजराती आदि भाषाओं में रचनाओं का अनुवाद ।
    हिन्दी में अनूदित कृतियाँ : संस्कार, अवस्था, भारतीपुर (उपन्यास)य घटश्राद्ध, आकाश और बिल्ली (कहानी संग्रह) ।
    सम्प्रति : चेयरमैन, फिल्म एंड टेलिविज़न इंस्टीट्यूट ।

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