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Mujhmein Kuchh Hai Jo Aaina Sa Hai

Mujhmein Kuchh Hai Jo Aaina Sa Hai

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  • Pages: 127p
  • Year: 2015
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183616836
  •  
    'मुझमें कुछ है जो आईना सा है' ध्रुव गुप्त की ग़ज़लों-नज्मों का वह संग्रह है जिसमें-रोशनी का अँधेरा और अँधेरे की रोशनी है । और यही शायर की वह हासिलात हैं जिनके सहारे नहीं, ताक़त से उसने अपनी शायरी के मिजाज और फन को एरक जदीद मुकाम दिया है । ध्रुव गुप्त की शायरी की एक बड़ी ताकत है-लोक । लोक गाँव का, नगर का । शायर के इस लोक में सम्बन्ध-सरोकार, दुःख-आग और आवारगी तथा दूब-भर उम्मीद के विभिन्न रंग-रूप और आयामों के अन्दाजे-बयाँ सुर में सृजन-सा नजर आते हैं । लफ्जों की आँखों और जुबाँ से पता चलता है कि लोग यहाँ अपने ख्वाबों के लिए जीते भी हैं, मरते भी हैं और मारे भी जाते हैं । इसलिए यहाँ खामोशियों भी गाई जाती हैं । संग्रह में गजलें हों या नज्‍म-स्रोतों का एक बड़ा हिस्सा अपने कथ्य-प्रकृति के इन्तखाब में बचपन और माँ का है । समाज और संस्कृति का है, जो तसव्‍वुर और हकीकत की केन्द्रीयता में वजूद और आफाक- की निर्मिति के लिए अहम भूमिका निभाते हैं । घुटन और टूटन के मद्देनजर शायर का यह गहरा इन्द्रीय-बोध ही है कि अपनी दुनिया के लिए इस उत्तर आधुनिक दुनिया में वह, जो दिख सके-देख सके, उसे आदमी की नजर से ही नहीं बल्कि उस चिड़िया की नजर से भी देखता है-जिसका एक घर के एक कमरे में अपना एक घर था, और जिसमें एक दिन सामान इतने रखे गए कि घर में उसका घर रहा ही नहीं और वह भी एक दिन एक घर के एक बन्द कमरे में मर गई! ज्यूँ मुन्दरिज है कि शायरी चाहे उर्दू की हो या हिन्दी की-लफ्जों के हक्काक बनने से कोई शायर नहीं हो जाता । शायर तो वही होता है जो अपने जख्मों की परतों में जीने के लिए रोज मरता रहता हो और यहाँ भी उसे खरोंचते हुए गुजरता हो वक्त! ध्रुव गुप्त के इस संग्रह के किसी शेर, किसी अच्छर, किसी मिसरे से ही सही, एहसास और अनुभव की यह तासीर अँधेरे की रोशनी और रोशनी के अँधेरे में एक परिन्दे के उड़ान भरने-सा प्रतीत होती है-और यह प्रतीति ही 'मुझमें कुछ है जो आईना सा है' की प्रतीति भी है!

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    Dhruv Gupt

    ध्रुव गुप्त
    पूरा नाम : ध्रुवनारायण गुप्त
    जन्म : गोपालगंज, बिहार
    पेशा : भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व अधिकारी।
    कृतियाँ : कही बिलकुल पास तुम्हारे, जंगल जहाँ खत्म होता है (कविता संकलन), मुठभेड़ (कहानी संकलन), नंदलाल बोस-जीवन और कृतित्व (सम्पादित), एक ज़रा सा आसमाँ, मौसम के बहाने, मुझमें कुछ है जो आईना सा है ($गज़ल संकलन)।
    सम्मान : बिहार उर्दू अकादमी सम्मान, निराला सम्मान।
    सम्पर्क : 8, मित्र विहार कॉलोनी, चतुर्भुज कॉम्प्लेक्स के पीछे, पश्चिम बोरिंग केनाल रोड, पटना-800001

    मोबाइल : 09934990254

    ईमेल : dhruva.n.gupta@gmail.com
    फेसबुक : dhruva.n.gupta@gmail.com

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