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  • Pages: 256p
  • Year: 2015
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183616867
  •  
    महमूद गजनवी ने सोमनाथ लूटा, उसके बाद भारत के हिन्दुओं में मुस्लिमों के प्रति अरुचि जागी, जो और दृढ़ होती गई । ऐसा होना नहीं चाहिए था । महमूद के दो मुख्य सेनापति हिन्दू थे और महमूद धर्म के अगुआ के रूप में नहीं आया था । उसकी भूख सत्ता और सम्पत्ति की थी । उसके धर्माध्यक्ष भी उससे सावधान रहते थे । अन्त में वह भाग निकला । उस समय भारत में बचे हुए उसके साथी शादी कर यहाँ के समाज में मिल गएµजिनसे बाढेल और शेखावत हुए । यहाँ तत्कालीन राजनीतिक– सामाजिक स्थितियों का वर्णन करते हुए उपन्यासकार ने लोगों के निजी सुख–दुख तथा दाव–पेंच को भी संजीदगी से उजागर किया है । लेखक ने यहाँ दो महत्त्वपूर्ण कार्य किए हैंµ(1) सत्ता और सम्पत्ति के लोभी राजपुरुषों द्वारा धार्मिक प्रजाजनों के बीच खड़ी की गई गलतफहमी दूर करना, और (2) सृष्टि में व्याप्त कल्याणकारी सौन्दर्य को शिवतत्त्व के रूप में निरूपित करना । ऐतिहासिक तथ्यों के प्रति वफादार रहते हुए लेखक ने कहीं–कहीं छूट भी ली है लेकिन इस तरह कि कथासृष्टि के वातावरण में उपकारक सिद्ध हो । सरस भाषा एवं रोचक शैली में यह उपन्यास पढ़ते हुए महसूस ही नहीं होता कि हम गुजराती उपन्यास का रूपान्तर पढ़ रहे हैं ।

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    Raghuveer Chaudhary

    जन्म: सन् 1938, बापुपुरा, महेसाणा (उत्तर गुजरात)

    शिक्षा: एम.ए. (हिन्दी, संस्कृत), पी-एच.डी. (भाषाविज्ञान)

    कृतियाँ: गुजराती में पैंतीस के लगभग मौलिक कृतियाँ। कुछ-एक का सम्पादन-अनुवाद।

    प्रमुख कृतियाँ हैं:

    काव्य: तमसा, वहेता वृक्ष पवनमां

    उपन्यास: गोकुल, मथुरा, द्वारिका, पूर्वराग, अमृता, आवरण, वेणु वत्सला, उपरवास कथा-त्रयी, लागणी, सोमतीर्थ

    कहानी-संग्रह: आकस्मिक स्पर्श, गेरसमज

    नाटक: अशोकवन, झूलता किनारा, सिकन्दर सानी

    एकांकी: डिम लाइट

    रेखाचित्र: सहरानी भव्यता

    समीक्षा: गुजराती नवलकथा, अद्यतन कविता, वार्ता-विशेष, दर्शकना देशमां

    पुरस्कार सम्मान: गुजरात शासन द्वारा ‘कुमार चन्द्र’, ‘रणजीतराम सुवर्णचन्द्र’ तथा ‘उपरवास कथा-त्रयी’ के लिए साहित्य अकादमी के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित।

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