• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Bhawani Nandan Sriganesh

Bhawani Nandan Sriganesh

Availability: Out of stock

Regular Price: Rs. 150

Special Price Rs. 135

10%

  • Pages: 242p
  • Year: 2000
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: BNSG62
  •  
    भवानी नंदन श्रीगणेश पिता शिव नहीं, केवल माता पार्वती से उत्पन्न हैं । माता की कोख से नहीं । मैल, उबटन के संग्रह से निर्मित तन । जन्म लेते ही द्वार पर बैठ गये । किसी का भी भीतर प्रवेश वर्जित है । माता का आदेश है । यह उनका स्नान कारण है । पिता शंकर क्रुद्ध हो रहे हैं । बड़ा जिददी बालक है । मेरे ही घर में मेरा प्रवेश रोक रहा है । क्रोध में उन्होंने गणेश की गर्दन उतार ली । माता पार्वती रो रही हैं । यह क्या किया प्रभु? अपने ही पुत्र की गर्दन उतार ली । पुत्र गया । अपयश ऊपर से .। सनातन अपयश । पुत्रहंता शिव । पुत्रहंता की पत्नी पार्वती । गणेश के धड़ में हाथी की गर्दन जोड़ी गयी । गणेश पुन: सक्रिय हो गये । माता पार्वती के वक्ष स्नेहमय दुग्ध से भर आये । शंकर परिवार में उत्सव का माहौल था । पिता ने आशीर्वाद दिया । गणेश प्रथम पूज्य होंगे । किसी भी पूजा का प्रारंभ गणेश पूजा से होगा । लाभ, शुभ के दाता, विघ्नविनाशक गणेश । गणेश ने अनेक अवतार लिये । इसी शरीर से अनेक कार्य किये । सभी अद्‌भुत, लोकरंजक, जनकल्याण निमित्त । माता-पिता की भक्ति के श्रेष्ठतम नमूने । महाभारत के लेखक । युगेश्वर द्वारा लिखित गणेश कथा केवल मनोरंजन ही नहीं, विशिष्ट आध्यात्मिक प्रेरणा भी है । भारत के सांस्कृतिक जीवन को समझने - समझाने का अभिनव प्रयास है 1 गणेश सम्पूर्ण भारत में पूज्‍य हैं । उनकी कथा के खंड-खंड से सभी परिचित हैं । लेखक ने संपूर्ण गणेश कथा का संग्रह, संयोजन एवं उनका बुद्धिभाव से संयुक्त संस्थापन किया है । इसी से संपूर्ण उपन्यास जितना भावक है, उतना ही संदेश निदेशक भी । आँखें खोलने वाला । खुली दृष्टि में लोकोत्तर रंग भरने

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Yugeshwar

    हिन्दी विभाग काशी विद्यापीठ, वाराणसी (भारत) के पूर्व आचार्य, लब्धप्रतिष्ठ विचारक, भाषाशास्त्री आलोचक एवं उपन्यासकार प्रो. युगेश्वर का प्रमाण-पत्री जन्म 10 जनवरी, 1934 को बिहार के गडुआ, सेखपुरा गांव में हुआ था। साहित्यालंकर तक की शिक्षा देवघर में प्राप्त कर चुगेश्वर ने हाईस्कूल से पी-एच.डी. तक की शिक्षा वाराणसी में पूर्ण की। पिछले करीब 50 वर्षों से लेखन, अध्यापन तथा सार्वजनिक कार्यों में सक्रिय हैं। समाजवादी राजनीति, साहित्य एवं अध्यात्म के विभिन्न क्षेत्रों में शोधपूर्ण तथा विचारोत्तेजक लेखन के कारण युगेश्वर की विशिष्ट पहचान है। इनकी शोधवृत्ति और ज्ञान के सम्मानार्थ उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनउ$ ने इन्हें मधुलिमये फेलोशिप प्रदान किया है।

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna
    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144