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Kabeer Granthawali

Kabeer Granthawali

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  • Pages: 304p
  • Year: 2011
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180314087
  •  
    प्रस्तुत संकरण 'कबीर ग्रंथावली' में कबीरदास जी के जो दोहे और पद सम्मलित किये गये हैं, उन्हें आजकल की प्रचलित परिपाटी के अनुसार खराद पर चढ़ाकर सुडोल, सुन्दर और पिंगल के नियमों से शुद्ध बनाने का कोई उद्योग नहीं किया गया वरन उद्देश्य यही रहा है कि हस्तलिखित प्रतियों या ग्रंथ्सहब में जो पाठ मिलता है, वही ज्यों-का-त्यों प्रकाशित कर दिया जाय ! कबीरदास जी के पूर्व के किसी भक्त की वाणी नहीं मिलती ! हिंदी साहित्य के इतिहास में वीरगाथा काल की समाप्ति पर मध्यकाल का आरम्भ कबीरदास जी से होता है, अतएव इस काल के वे आदिकवि हैं ! उस समय भाषा का रूप परिमार्जित और संस्कृत नहीं हुआ था ! कबीरदास जी स्वयं पढ़े-लिखे नहीं थे ! उन्होंने जो कुछ कहा है, वह अपनी प्रतिभा तथा भावुकता के वशीभूत होकर कहा है ! उनमें कवित्व पटना नहीं था जितनी भक्ति और भावुकता थी ! उनकी अटपट वाणी ह्रदय में चुभनेवाली है ! अतएव उसे ज्यों का त्यों प्रकाशित कर देना ही उचित जान पड़ा और यही किया भी गया है, आशा है पुस्तक विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा पाठकों का मार्गदर्शन करने में सहायक सिद्ध होगी !

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    Dr. Shyam Sundar Das

    डॉ. श्यामसुंदर दास

    जन्म : सन 1875 ई. काशी में !

    शिक्षा : 1897 ई. में बी. ए. पास किया था !

    गतिविधियाँ : 1899 ई. में हिन्दू स्कूल में कुछ दिनों तक अध्यापक थे ! उसके बाद लखनऊ के कालीचरण स्कूल में बहुत दिनों तक हेडमास्टर रहे ! सन 1921 ई. में काशी हिन्दू विश्व विद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष पद पर नियुक्त हुए !

    प्रारंभ से ही हिंदी के प्रति आपकी अनन्य निष्ठां थी ! नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना (16 जुलाई, सन 1893 ई.) आपने विद्यार्थी-काल में ही अपने डॉ सहयोगियों रामनारायण मिश्र और ठाकुर शिवकुमार सिंह की सहायता से की थी ! काशी हिन्दू विश्विद्यालय में आने के पूर्व आपने हिंदी-साहित्य की सर्वतोमुखी समृद्धि के लिए न्यायालयों में हिंदी-प्रवेश का आन्दोलन (1900 ई.) हस्तलिखित ग्रंथों की खोज (1899) ई.), हिंदी शब्द सागर' का संपादन (1907) ई.) आर्य भाषा पुस्तकालय की स्थापना (1903) ई.), प्राचीन महत्त्वपूर्ण ग्रंथों का संपादन सभा-भवन का निर्माण (1902 ई.) 'सरस्वती' पत्रिका का संपादन (1900 ई.) तथा शिक्षस्तर के अनुरूप पाठ्य-पुस्तकों का निर्माण-कार्य आरम्भ कर दिया था ! आप आजीवन एक गति में साहित्य-सेवा में रत रहे !

    साहित्य सेवा : 'नागरी वर्णमाला', 'हिंदी हस्तलिखित ग्रंथों का वार्षिक खीज विवरण' 'हिंदी हस्लिखित ग्रंथो की खीज' का प्रथम त्रैवार्षिक विवरण' 'हिंदी कोविद रत्नमाला' भाग 1, 2, 'साहित्यालोचन', 'भाषा विज्ञान', 'हिंदी भाषा का विकास', हस्तलिखित हिंदी ग्रंथों का संशिप्त विवरण', 'गध्य कुसुमावली', 'भारतेंदु हरिश्चंद्र', 'हिंदी भाषा और साहित्य', गोस्वामी तुलसीदास, 'रूपक रहस्य', 'भाषा रहस्य' भाग 1, 'हिंदी गद्य के निर्माता' भाग 1,2, 'मेरी आत्म कहानी' !

    निधन : सन 1945 ई. !

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