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Kannad Ki Shresth Kahaniyan

Kannad Ki Shresth Kahaniyan

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  • Pages: 277p
  • Year: 2004
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 10: 8180310507
  •  
    कन्नड के सात साहित्यकार भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित हुए हैं। मास्ति और अनंतमूर्ति तो इस विधा के सर्वाधिक चर्चित ही नहीं, अपितु इस विधा को गति देनेवाले कहानीकार रहे हैं। अन्य इतिहासकारों का योगदान भी कम महत्त्व का नहीं है। हर वर्ग और विचारधारा के कहानीकार कहानियाँ लिख रहे हैं। कन्नड कहानियों के पीछे एक सौ वर्षों का इतिहास है। इस कालख्खंड में हजारों कहानियाँ लिखी गई हैं। ये कहानियाँ अपने-अपने समय और समाज के साथ संवाद करने में सक्षम रही हैं। प्रस्तुत कथा संकलन में हमने 24 कन्नड कथाकारों की एक-एक कहानी को चुना है। हमें मालूम है कि इतने ही नहीं, इनसे ज्यादा कथाकारों को यहाँ स्थान मिलना था। मगर इस संकलन की सीमा में मात्र इतनी कहानियेां को ही हम ले पाये हैं और हमारा यह दावा भी नहीं है कि हमने इन कथाकारों की सर्वश्रेष्ठ रचना को ही चुना है। इस संदर्भ में हम पूरे विश्वास के साथ कह सकते हैं कि हमने हर लेखक की उत्तम एवं प्रतिनिधि कहानी का चयन किया है जो कि चर्चित और पाठकों से सराही गई हैं। ये कहानियाँ हिन्दी पाठकों को पसन्द आएँगी, ऐसी आशा है।

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    T. S. R. Subrmaniyan

    उत्तर प्रदेश कैडर के सेवानिवृत्त आई.ए.एस. अधिकारी टी.एस.आर. सुब्रमणियन् ने प्राथमिक शिक्षा तमिलनाडु के तंजावुर शहर में ग्रहण की और कॉलेज की पढ़ाई कोलकाता में। उसके बाद उन्होंने लन्दन के इम्पीरियल कॉलेज ऑफ साईंस से डिप्लोमा लिया और फिर हार्वर्ड विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर डिग्री पायी। 1961 से उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा में योगदान दिया। विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने के बाद उनकी पदस्थापना लखनऊ सचिवालय में हुई और वे भारत सरकार के वाणिज्य तथा कपड़ा मंत्रालयों में भी प्रतिनियुक्ति पर रहे। बावरी मसज़िद विध्वंस के तत्काल बाद की अवधि में वे उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव थे। उसके बाद वे केन्द्र सरकार में कबीना सचिव बनाए गए जो सिविल सेवा का सर्वोच्च पद है। इस पद पर रहते हुए उन्होंने तीन प्रधानमंत्रियों के साथ काम किया। उन्होंने पाँच वर्षों तक संयुक्त राष्ट्र के संगठन - अन्तरराष्ट्रीय व्यापार केन्द्र, जिनेवा में वरिष्ठ सलाहकार के रूप में भी काम किया। इन दिनों वे अपना अधिकांश समय ‘गोल्फ कोर्स’ में व्यतीत करते हैं।

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