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Raag Aur Ras Ke Bahane

Raag Aur Ras Ke Bahane

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  • Pages: 148p
  • Year: 1993
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: RARKB250
  •  
    '' राग और रस के बहाने '' श्री केशवचन्द्र वर्मा की संगीत विषयक तीसरी महत्वपूर्ण पुस्तक है । इस पुस्तक में उन्होंने भारतीय जीवन में समाहित मूल्यों को संगीत कला के माध्यम से पहचानने की कोशिश की है । संगीत का सामान्य ज्ञान जहाँ इस पुस्तक में एक ओर उपलब्ध है वहीं राग और रस के तन्मयी भाव की भी गहरी व्याख्या है । इलाहाबाद युनिवर्सिटी के संगीत विभाग के भूतपूर्व अध्यक्ष एवं देश के मान्य संगीत विद्वान पं० रामाश्रय झा के शब्दों को उद् घृत करें तो-' श्री केशवचन्द्र वर्मा ने आज से पचास वर्ष पूर्व उत्तर भारत में संगीत का प्रचार जैसा चल रहा था-जिस तरह के संगीत साधना में लगे हुए साधक, गायक, मनीषी कार्य कर रहे थे, जिस तरह के मानक संगीत सम्मेलन हुआ करते थे, जिस तरह से गुरु- शिष्य परम्परा का पालन करते हुए अनेक कलाकार संगीत आकाश के प्रकाशपुंज नक्षत्र बन रहे थे, जिस तरह कला की प्रतिष्ठा के लिए पारखी लोग अपना सब कुछ लुटा देने की साम -र्प रखने, थे-उसी महान संगीत परम्परा के बीच रह- -----संस्कार ं ग्रहण किया है । उनका यही सम्‍पन्‍न, सस्कार ही श्री केशवचन्द्र वर्मा को अन्य सभी सगीत कला के आलोचकों से अलग एक विशिष्ट कोटि की श्रेणी में रख देता है । उनकी इस पुस्तक में जगह-जगह पर उनके इस संगीत सुनने के लम्बे अनुभव की झलक बराबर मिलती है । '

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    Keshavchandra Verma

    केशवचन्द्र वर्मा

    हिंदी साहित्य जगत में संभवतः श्री केशवचन्द्र वर्मा उन अकेले लोगों में हैं जिन्होंने अनेक विधाओं में भरपूर कुचलता के साथ अपनी लेखनी चलाई है | जिस अनुशासन के साथ उन्होंने हिंदी का व्यंग्य साहित्य - कथा, निबंध, उपन्यास, नाटक सभी क्षेत्रों में बहुचर्चित कृतियाँ बड़े सहस के साथ प्रस्तुत किन, जैसा उन्होंने संगीत के बारे में नए ढंग और शैल्यों में लिखा, वह सब देखने वाले अचरज में पद जाते हैं | उनकी कविताएँ एक अलग रस की अनुभूति कराती हैं | परिमल जैसी साहित्यिक संस्था गठित करके उसको पच्चीस तीस साल चलाने के बाद अब वे इस बात के अधिकारी हैं कि वे परिमल का प्रमाणिक इतिहास लिख कर तमाम अनर्गल भ्रमो को दूर करने का दायित्व उठाएँ | केशव जी की अब तक पचास से ऊपर कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं उन सब का नामोल्लेख करना यहाँ अनावश्यक है |

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