• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Hinduon Ke Vrat Parv Aur Tyohar

Hinduon Ke Vrat Parv Aur Tyohar

Availability: In stock

-
+

Regular Price: Rs. 350

Special Price Rs. 315

10%

  • Pages: 266p
  • Year: 2012
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180317255
  •  
    भारतरत्न बाबू पुरुषोत्तमदास जी टंडन की पुण्य स्मृति में समर्पित इस पुस्तक में हिन्दुओं के सम्पूर्ण व्रतों, त्योहारों और पर्वों से सम्बंधित पौराणिक, लौकिक तथा शास्त्रीय विद्याओं की परम्परागत प्राचीन विधियों का विस्तृत विवेचन प्रस्तुत किया गया है ! व्रत, पर्व और त्योहार यद्यपि ये तीनों उत्सव के भिन्न-भिन्न रूप हैं तथापि किसी-न-किसी रूप में इनमें परस्पर विचित्र समानता पायी जाती है ! व्रत का विधान बहुधा आध्यात्मिक अथवा मानसिक शक्ति की प्राप्ति के लिए, चित्त अथवा आत्मा की शुद्धि के लिए, संकल्प-शक्ति की दृढ़ता के लिए, ईश्वर की भक्ति और श्रद्धा के विकास के लिए, वातावरण की पवित्रता के लिए, दूसरों को उच्च एवं परिष्कृत करने के लिए तथा प्रकारांतर से स्वस्थ्य की प्रगति के लिए किया जाता है ! यद्यपि भारतीय विचारधारा में व्रत का सामान्य अर्थ व्रत अथवा उपवास का स्थान गौण है और चित्त-शुद्धि अथवा आत्म-परिष्कृत का स्थान मुख्य है ! पर्व किसी मुख्य तिथि अथवा ज्योतिष के अनुसार ग्रहों आदि के संयोग का ही दूसरा नाम है, जो किसी निर्दिष्ट समय पर आता है ! पर्व का बीच-बीच में निर्दिष्ट अवधि पर आते रहते हैं जैसे कुम्भ पर्व आदि ! आकाश के नक्षत्रों और ग्रहों की स्थिति के अनुसार इन पर्वों का धरती के जीवन पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है ! त्योहार एक सामान्य shabd है ! आजकल इसका प्रयोग व्रत और पर्व के लिए भी होने लगा है, किन्तु इसका तात्पर्य वस्तुतः लौकिक उत्सवों एवं समारोहों की तिथि से ही अधिक समीप है जैसे दशहरा, होली आदि ! व्रत डॉ प्रकार के होते हैं, ‘काम्य’ और ‘नित्य’ ! काम्य उन्हें कहते हैं जो किसी विशेष कामना को लेकर किये जाते हं और नित्य वे हैं, जिनमें किसी कामना का समावेश नहीं होता, वरन जो भक्ति और प्रेम के कारण आध्यात्मिक प्रेरणा से किये जाते हैं ! निष्काम अथवा निःस्वार्थ व्रत का ही स्थान ऊँचा होता है ! व्रत का सामान्य अर्थ आज ‘उपवास’ हो गया है ! उपवास शब्द का अर्थ है दुर्गुणों एवं दोषों से बचकर आत्मा अथवा गुणों के साथ वास अर्थात निवास ! इन व्रतों अथवा पर्वों में हमारे देश के भिन्न-भिन्न मतावलंबी लोगों के लिए अपनी-अपनी कुल-परंपरागत मान्यता के अनुसार चलने की पूरी सुविधाएँ प्रदान की गयी हैं ! एक धर्म अथवा संप्रदाय के देवता का अन्य धर्म अथवा संप्रदाय में बड़ी उदारता एवं सहानुभूति के साथ चित्रण किया गया है ! सनातन हिन्दू धर्म में तो इस व्यापक दृष्टिकोण का पदे-पदे परिचय मिलता है ! भगवन विष्णु के चौबीसों अवतारों में जैन धर्म के आदि प्रवर्तक भगवान् ऋषभदेव तथा बुद्ध धर्म के प्रतिष्ठापक भगवान् गौतम बुद्ध का भी गिनाया गया है और इनकी जयन्तियों तथा पुन्यकथाओं को सुनने-सुनाने का बड़ा महात्म्य वर्णित है ! सनातनी हिन्दुओं के मुख्य त्योहारों होली, दीवाली, विजयादशमी, वसंपंचमी, नागपंचमी आदि त्योहार तो बौद्ध, जैन आदि मतों में भी सनातन धर्म के सामान ही समादृत और महत्तपूर्ण हैं ! कुछ अन्य त्योहार तो ऐसे भी हैं जो सनातन धर्म में किसी अन्य कारण से महत्त रखते हैं और बौद्ध तथा जैन धर्म में किसी अन्य कारण से ! कितु हिन्दुओं के सभी मतानुयायियों में उनकी विशेषता अखंडित है ! कार्तिकी पूर्णिमा, मार्गशीर्ष शुक्ला एकादशी, अक्षय तृतीय, अनंत चतुर्दशी आदि व्रतों अथवा पर्वों का सनातन हिन्दू धर्म तथा बौद्ध एवं जैन धर्मों में सामान महत्त है, किन्तु कारण भिन्न-भिन्न दिये गये हैं !

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Rampratap Tripathi 'Shastri'

    रामप्रताप त्रिपाठी 'शास्त्री'

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna
    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144