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Sahityik Nibandh

Sahityik Nibandh

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  • Pages: 782p
  • Year: 2015, 15th Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180312779
  •  
    साहित्य का आकर्षण शक्ति सिद्धान्त, साहित्य की विकास प्रक्रिया का सिद्धान्त, बौद्धिक रस, शृंगार रस सम्बन्धी नयी स्थापनाएँ, रस-निष्पत्ति, साधारणीकरण एवं साहित्य की आस्वादन प्रक्रिया सम्बन्धी नये निष्कर्ष, हिन्दी साहित्य के इतिहास का काल विभाजन एवं काव्य-परम्पराओं का नया वर्गीकरण व नामकरण, हिन्दी साहित्य की विभिन्न काव्यधाराओं के उद्दाम स्रोत एवं प्रेरणा स्रोत के सम्बन्ध में नयी स्थापनाएँ, हिन्दी साहित्य के विभिन्न युगों एवं परम्पराओं की विभिन्न प्रवृत्तियों के सम्बन्ध में नये निष्कर्ष, विभिन्न कवियों, लेखकों एवं रचनाओं के विवेचन विश्लेषण एवं मूल्यांकन से उपलब्ध नूतन निष्कर्ष इत्यादि कतिपय नये विचारों, नूतन स्थापनाओं एवं मौलिक सिद्धान्तों का उल्लेख प्रस्तुत पुस्तक में किया गया है । यह भी एक कटु सत्य है कि अभी तक हिन्दी जगत में पूर्व परम्परा से प्राप्त या विदेशों से आयातित विचारों एवं सिद्धान्तों को ही अधिक महत्व दिया जाता है- स्वयं हिन्दी के आचार्यों द्वारा प्रतिपादित मौलिक सिद्धान्तों की प्राय: उपेक्षा की जाती है । विदेशी शासन की दास्ता के कारण हम लोगों में जिस आत्महीनता एवं लघुता का भाव विकसित हुआ था, उससे अभी तक हम पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाये हैं । विश्वास है नयी पीढ़ी के अध्येता इस आत्महीनता की भावना से मुक्त होकर स्वतन्त्र एवं मौलिक चिन्तन का सम्यक मूल्यांकन कर सकने में समर्थ होंगे । प्रस्तुत संस्करण में नाटक, उपन्यास, कहानी आदि के विकास से सम्बन्धित निबन्धों में नव प्रकाशित रचनाओं का भी विवेचन करते हुए उन्हें अद्यतन रूप देने की चेष्टा की गयी है ।

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    Ganpati Chandra gupt

    डॉ. गणपतिचन्द्र गुप्त

     जन्म : १५ जुलाई सन् १९२८ ई. मंढ़ा (सुरेरा) राजस्थान में।

    शिक्षा : पंजाब विश्वविद्यालय से एम.ए. (हिन्दी) पी-एच.डी. एवं डी. लिट् की उपाधियाँ प्राप्त कीं।

    गतिविधियाँ : पंजाब विश्वविद्यालय, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, रोहतक विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय एवं आगरा विश्वविद्यालय में प्रोफेसर, और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय एवं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में कुलपति के पद पर भी कार्य किया।

    प्रकाशित रचनाएँ : ‘साहित्य-विज्ञान’, ‘हिन्दी साहित्य का वैज्ञानिक इतिहास’, ‘रस-सिद्धान्त का पुनर्विवेचन’, ‘साहित्यिक निबन्ध’, ‘हिन्दी-काव्य में शृंगार-परम्परा’, ‘महाकवि बिहारी’, ‘श्री सत्य साईं बाबा : व्यक्तित्व एवं संदेश’, ‘शिरडी साईं बाबा : दिव्य महिमा’ आदि। 

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