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Nirala : Aatmhanta Astha

Nirala : Aatmhanta Astha

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  • Pages: 320p
  • Year: 2009
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180313196
  •  
    निराला : आत्महन्ता आस्था- दरअसल एक नये कवि- कथाकार द्वारा एक दूसरे कवि का आत्मीय विश्लेषण है । इसका एक नाम यह भी हो सकता था- पक लेखक की निजी नोट-बुक में एक दूसरा लेखक' । यह पुस्तक लेखक के उन्हीं नोट्‌स' का क्रमबद्ध रूपान्तरण है उसके निजी आनन्द की अभिव्यक्ति है । लेकिन आनन्द की यह अभिव्यक्ति लेखक के श्रद्धा- विगलित क्षणों की उपज न होकर, उसके दिमाग की तार्किक रस-सिद्धि का परिणाम है; उसके सधे हुए सुर की झंकार है । अत: उसमें एक तर्कपूर्ण निजी शास्त्रीयता भी है । इसीलिए वह मात्र प्रशस्ति-वाचन या निन्दा नहीं है, बल्कि निराला की काव्य-ऊर्जा तक पहुँचने के लिए बनाया गया एक नया और निजी द्वार है, जिससे जागरूक पाठक और नये आलोचक एक नयी जगह से उस सिंह के दर्शन कर सकें । जब आप इस नये द्वार से प्रवेश करेंगे- तभी समझ सकेंगे कि क्यों निराला दूसरे छायावादी कवियों से विरोधी दिशा के कवि हैं? क्यों उनको बने-बनाये काव्य-सिद्धान्तों में 'फिट-इन' नहीं किया जा सकता? क्यों उनकी रचनात्मकता का अध्ययन करने के लिये काल-क्रम का आधार बेमानी ठहरता है? तब आप उस अँधेरी गुप्ता में बैठी, उन जलती आँखों के सान्द्र प्रकाश का साक्षात्कार कर पायेंगे । इसी साक्षात्कार के लिए प्रस्तुत है यह पुस्तक - निराला : आत्महन्ता आस्था ।

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    Doodhnath Singh

    दूधनाथ सिंह

    जन्म : 17 अक्टूबर, 1936, उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के एक छोटे-से गाँव सोबंथा में !

    शिक्षा : एम्.ए. (हिंदी साहित्य), इलाहबाद विश्वविद्यालय !

    जीविका : कुछ दिनों (1960-62) तक कलकत्ता में अध्यापन ! फिर इलाहबाद विश्वविद्यालय, हिंदी विभाग में ! अब सेवानिवृत !

    लेखन : सन 1960 के आसपास से !

    कृतियाँ : आखिरी कलाम, निष्कासन, नमो अन्धकार (उपन्यास); सपाट चहरे वाला आदमी, सुखांत, प्रेमकथा का अंत न कोई, माई का शोकगीत, धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे, तू फू (कहानी-संग्रह); कथा समग्र (सम्पूर्ण कहानियां); यम्गाथा (नाटक); अपनी शताब्दी के नाम, एक और भी आदमी है, युवा खुशबू (कविता-संग्रह); सुरंग से लौटते हुए (लम्बी कविता); निराला : आत्महंता आस्था (निराला की कविताओं पर एक सम्पूर्ण किताब); लौट आ, ओ धर! (संस्मरणात्मक मुक्त गद्य); कहा-सुनी (साक्षात्कार और आलोचना); महादेवी (महादेवी की सम्पूर्ण रचनाओं पर एक किताब) !

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