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Bhartiya Cine Siddhant

Bhartiya Cine Siddhant

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  • Pages: 230p
  • Year: 2009
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788171197958
  •  
    ‘‘मैं अक्सर महसूस करता हूँ कि हमारी जनता एक तरफ व्यावसायिक विकृतियों का शिकार है तो दूसरी तरफ उन विशिष्टतावादी फिल्मकारों की जिनके शब्दों का उस पर कोई असर नहीं होता और जो उसे और उलझा देते हैं। मैं सोचता था कि हमारे भी गम्भीर फिल्मकार इस देश के मिथकों और लोक-परम्परा को उसी तरह आत्मसात कर सकेंगे जैसे अकीरा कुरोसावा ने जापान के क्लासिकी परम्परा को किया है और फिर एक नया लोकप्रिय फॉर्म विकसित हो सकेगा। उल्टे हम पाते हैं कि पश्चिम के विख्यात फिल्मकारों में ही उलझे हैं हमारे लोग और कभी-कभी उनकी नाजायत नकल भी करते हैं। हमें पहले ही नहीं मान लेना चाहिए कि जनता प्रयोग और नवीकरण के मामले में तटस्थ है।’’ - उत्पल दत्त हिन्दी सिनेमा एक साथ ढेर सारे मिले-जुले प्रभावों से परिचालित है। एक तरफ हॉलीवुड सिनेमा, लोकनाट्य रूपों तथा पारसी थियेटर की खिचड़ी दूसरी तरफ पौराणिक मिथकों का लोक-लुभावन स्वरूप तीसरी तरफ इटैलियन नवयथार्थवादी सिनेमा का प्रभाव। इन सबके बीच भारतीय सिनेमा के अपने मूल गुणों को पहचानने परखने की कोशिश ही इस पुस्तक का ध्येय है। दादा साहब फाल्के ने भारतीय सिनेमा को व्याकरण के साँचे में कसने के लिए एक भारतीय सिने-सिद्धान्त की आवश्यकता महसूस की थी लेकिन वे स्वयं ऐसा कर नहीं पाए और आगे भी नहीं किया जा सका। भारतीय सिने-सिद्धान्त और सिने-कला, इतिहास, पटकथा की संरचना आदि पर छिटपुट टिप्पणियों, लेखों, विचारों को एकत्रित कर सिने-सिद्धान्त का अवलोकन इस पुस्तक के मुद्दों में केन्द्रीय है। सिनेमा की कला-भाषा का ठीक से शिक्षण नहीं होने के चलते एक दृष्टिहीन सिनेमा का व्यावसायिक लुभावना सम्मोहन समाज पर हावी है। यह पुस्तक भारतीय सिने-सिद्धान्त को लेकर किंचित भी चिन्तित व्यक्तियों को गम्भीरता से सोचने के लिए तथ्य उपलब्ध कराएगी, साथ ही एक सामूहिक प्रयास के लिए प्रेरित करेगी।

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    Anupam Ojha

    जन्म: 5 जनवरी, ’70

    शिक्षा: पी-एच.डी. काशी विश्वविद्यालय, वाराणसी - एफ.ए., फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान, पुणे

    रचनाएँ:

    जलतरंगों की आत्मकथा (काव्य संग्रह) (प्रकाशित); कहाँ है मेरा देश (नुक्कड़ नाटक), रामचेला, फूलों के लिए सपना (मंचित)।

    लेखन: कहानी, कविता, गीत-गजल, लेख, पटकथा आदि विभिन्न विधाओं में लेखन। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित, आकाशवाणी तथा दूरदर्शन से प्रसारित।

    सम्पादन: समाधान नामक लघुकथा का सम्पादन।

    संयोजन: समाधान नामक साहित्यिक, सांस्कृतिक संस्था का संगठन तथा विभिन्न रचनात्मक कार्यक्रमों का संयोजन।

    सम्प्रति: नुक्कड़, रंगमंच और सिनेमा तथा साहित्य से सक्रिय जुड़ाव। सहारा टी.वी. नेटवर्क में कार्यरत।

     - भारतीय सिने-सिद्धान्त और सिने-दर्शन के अन्वेषण में संलग्न।

    स्थायी पता: ग्रा.पो. बड़ासिंहपुरा, जिला - बक्सर, बिहार-802 120

    वर्तमान पता: बि¯ल्डग नं. 7, फ्लैट नं. 707, मरियम नगर, नायगाँव (पश्चिम), वसई-401 207 (मुम्बई)।

    फोन: 0250-301071

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