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Film Nirdeshan

Film Nirdeshan

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  • Pages: 227p
  • Year: 2019, 4th Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183610988
  •  
    भारत में फिल्म निर्माण की पहल के सौ साल से अधिक बीत गए । बोलती फिल्मों की शुरुआत (आलम आरा) का यह 75वाँ साल है । हर साल यहाँ हजारों फिल्में बनती हैं । इसके कारण भारत विश्व के ऐसे देशों की श्रेणी में शुमार किया जाता है जहाँ सबसे अधिक फिल्मों का निर्माण होता है, लेकिन विडम्बना यह है कि फिल्म निर्देशन पर अब तक हिन्दी में कोई किताब नहीं थी । कुलदीप सिन्हा ने 'फिल्म निर्देशन' पुस्तक लिखकर यह कमी पूरी कर दी है, इसलिए उनकी यह पहल ऐतिहासिक है । श्री सिन्हा पुणे फिल्म इंस्टीट्‌यूट से प्रशिक्षित फिल्मकार हैं । राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त अनेक फिल्मों के वे निर्माता-निर्देशक रहे हैं । इसलिए उनकी इस पुस्तक में निर्देशन के सैद्धान्तिक विवेचन के साथ ही उसके व्यावहारिक पक्ष को सूक्ष्मता और विस्तार से विवेचित किया गया है । पुस्तक 11 दृश्यों में विभक्त है । प्रत्येक दृश्य में निर्देशन के अलग-अलग मुद्‌दों तथा तकनीकी प्रसंगों को सहजता के साथ स्पष्ट किया गया है । श्री सिन्हा पहले बताते हैं कि फिल्म को फ्लोर पर ले जाने के पूर्व क्या तैयारी करनी चाहिए! फिल्म की निर्माण योजना में सन्तुलन के लिए क्या सावधानी बरतें! इसके बाद उन्होंने संक्षेप में पटकथा लेखन के प्रमुख बिन्दुओं की भी चर्चा कर दी है । लाइटिंग और कम्पोजीशन के सिलसिले में व्यावहारिक सुझाव दिए हैं । फिल्म सेंसरशिप की कार्यप्रणाली तथा उसके विषय पर प्रकाश डाला है । और अन्त में 'निर्देशक' कुलदीप सिन्हा ने अपनी पसन्द के कुछ हिन्दी फिल्म निर्देशकों जैसे शान्ताराम, विमल राय, गुरुदत्त और राजकपूर आदि के ऐतिहासिक योगदान का महत्वपूर्ण विश्लेषण किया है । इसी प्रसंग में भारत में सिनेमा के इतिहास का संक्षिप्त रेखांकन भी हो गया है । आम लोग इस पुस्तक से यह आसानी से जान सकते हैं कि जो सिनेमा वे इतने चाव से देखते हैं वह बनता कैसे है? और जो लोग फिल्म निर्माण के क्षेत्र में जाना चाहते हैं उनके लिए यह पुस्तक प्रवेशद्वार की तरह है । जो लोग फिल्म आलोचना से सम्बद्ध हैं, उनके सामने कुलदीप सिन्हा की यह पुस्तक अनेक अनुद्‌घाटित व्यावहारिक पक्षों को सामने लाती है । श्री कुलदीप सिन्हा की इस बहुआयामी पुस्तक की उपयोगिता को देखते हुए मैं उन्हें इस नए दौर का 'सिनेमा गुरु' कहना चाहता हूँ । सुरेश शर्मा - राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म आलोचक

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    Kuldeep Sinha

    कुलदीप सिन्हा
    जन्म : झाँसी (उ. प्र.) 18 दिसम्बर ।
    शिक्षा : प्रारम्भिक शिक्षा झाँसी में, स्नातक एवं फिल्म तकनीकी शिक्षा पूना में, पत्रकारिता एवं प्रबन्धन शिक्षा मुम्बई में ।
    प्रकाशित कृतियाँ : 'सिसकियाँ', 'कशिश' (कहानियाँ);  'पटकथा लेखन के तत्व' (सिनेमा साहित्य)
    व्यवसाय : पिछले तीस वर्षों से फिल्म लेखन, सम्पादन, निर्देशन एवं निर्माण से जुड़े रहकर लगभग सौ लघु फिल्मों का लेखन एवं निर्देशन ।
    सम्मान : फिल्म लेखन, निर्देशन एवं निर्माण के लिए भारत के राष्ट्रपति द्वारा 6 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से सम्मानित होने के साथ कई अन्य राष्ट्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय एवं महाराष्ट्र फिल्म पुरस्कार प्राप्त । कई बार फिल्म पुरस्कार जूरी के सदस्य रहे । राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी, कोलकाता द्वारा हिन्दी प्रचार-प्रसार में विशेष योगदान के लिए सम्मान । फिल्म लेखक संघ के सदस्य । 'टूटे पंख,' 'बैसाखी,' 'स्पर्श तथा बटुआ' आदि पुरस्कृत कहानियाँ । 'टूटे पंख' कहानी पर इसी नाम से लघु फिल्म निर्माण । साहित्य में योगदान के लिए आशीर्वाद द्वारा 'राजभाषा श्री' पुरस्कार ।
    सम्प्रति : फिल्म प्रभाग, मुम्बई में मुख्य निर्माता तथा भारतीय बाल चित्र समिति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ।

    सम्पर्क : सी-56, हैदराबाद इस्टेट, नेपियन सी रोड मुम्बई-26

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