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Patrakarita : Naye Daur, Naye Pratiman

Patrakarita : Naye Daur, Naye Pratiman

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  • Pages: 310p
  • Year: 2005
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: PNDNP236
  •  
    संतोष भारतीय ने महत्त्वपूर्ण पत्रकारिता की है। वे कुशल संवाददाता रहे हैं और ‘चौथी दुनिया’ से संपादन की निपुणता भी दिखा चुके हैं। मगर फ़ैजश् के भाव में ‘कुछ इश्क किया कुछ काम किया’ की उधेड़बुन के चलते शायद वे कहीं ठहर-से गए। राजनीति की तरफ वे ज्यादा न झुकते तो और सार्थक काम करते। बहरहाल, उनकी किताब ‘पत्रकारिता: नया दौर, नए प्रतिमान’ सिरे से पढ़ने के काबिल है। इसमें उनके ‘रविवार’ और ‘चौथी दुनिया’ के दिनों के संस्मरण हैं, अपने रपट- रिपोर्ताज हैं और साथ में संपादक-उपसंपादक और संवाददाता आदि की जिम्मेवारियों का विवेचन है। इस तरह एक मायने में किताब पत्रकारिता की पाठ्यपुस्तक बन गई है। साफ़गोई और बेबाक टिप्पणियों के लिए यह किताब अलग से जानी जाएगी। हालाँकि उनके कुछ निष्कर्ष भावुकता भरे हैं, कुछ से आप शायद सहमत न हों। पर वे बहुत दिलचस्प हैं और हमें हिंदी पत्रकारिता के एक अहम दौर की घटनाओं पर फिर से सोचने को उकसाते हैं। - ओम थानवी (सेक्रेटरी जनरल, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया)

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    Santosh Bhartiya

    प्रसिद्ध पत्रकार और वरिष्ठ संपादक एम.जे. अकबर ने संतोष भारतीय की पत्रकारिता में अद्वितीय क्षमता को जाँचते हुए कहा था कि - ‘‘जिस जमाने में हमने पत्रकारिता शुरू की उसके पहले या उस दौर में भी पत्रकारिता के जो विषय होते थे उनका अंदाजे-बयाँ साहित्यिक होता था। हमें बड़ी घुटन होती थी कि सच्चाई कहाँ है, देश कहाँ है और आप शब्दों में घूम रहे हैं, कविता में घूम रहे हैं और दुनिया कहाँ है? संतोष भारतीय, एस.पी. सिंह और उदयन शर्मा ने उस दौर में हिन्दी पत्रकारिता को उस साहित्यिक दरिया से निकाला और ‘रविवार’ के जरिए एक ऐसी जगह ले गए कि उसमें एक मैच्योरिटी जल्दी आ गई। उस जमाने में हमने जमीन की पत्रकारिता की जिसका एक खास रिवोल्यूशनरी प्रभाव हुआ और जिसका असर बहुत दूर तक गया। हमारा जो शुरुआती दौर था वो समय विरोधाभासों का भी था। हमारी पत्रकारिता पर आपातकाल का जो प्रभाव पड़ा उसकी भी बड़ी भूमिका थी क्योंकि हम भी एक लिबरेशन के साथ निकले थे।’’

    संतोष भारतीय ने ‘रविवार’ से पत्रकारिता की शुरुआत की और वहाँ विशेष संवाददाता रहे। फिर कलकत्ता से प्रकाशित अंग्रेजी दैनिक ‘द टेलीग्राफ’ में विशेष संवाददाता के तौर पर कार्य किया। इसके बाद टेलीविजन के पहले न्यूज एंड करेंट अफेयर्स कार्यक्रम ‘न्यूज लाइन’ में बतौर विशेष संवाददाता रहे। हिन्दी के पहले साप्ताहिक अखबार ‘चौथी दुनिया’ के संपादक बने। 1989 में नौवीं लोकसभा के सदस्य चुने जाने के बाद ‘चौथी दुनिया’ के ही सलाहकार संपादक। समाचार एजेंसी ‘हेड लाइन प्लस’ के प्रधान संपादक रहे। प्रस्तावित टीवी चैनल ‘अलहिन्द’ और ‘फ़लक’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की जिम्मेदारी निभाने के बाद जैन टेलीविजन के सलाहकार रहे। फिलहाल स्वतंत्र टेलीविजन पत्रकारिता के साथ-साथ राजनीति व पत्रकारिता पर कुछ पुस्तकों की तैयारी।

    प्रकाशित कृतियाँ:

                1. निशाने पर: समय, समाज और राजनीति,

                2. पत्रकारिता: नया दौर, नए प्रतिमान,

                3. चुनाव रिपोर्टिंग और मीडिया, तथा

                4. इतिहास पुरुष बनेंगे या अंधेरे में खो जाएंगे।

    शीघ्र प्रकाश्य: चन्द्रशेखर, वी.पी. सिंह, सोनिया गांधी और मैं।

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