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Television Ki Bhasha

Television Ki Bhasha

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  • Pages: 236p
  • Year: 2019, 3rd Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183614528
  •  
    अनुमान के मुताबिक हिन्दी में लगभग एक लाख पैंतालीस हजार शब्द हैं, लेकिन हिन्दी टेलीविजन पत्रकारिता के लिए महज पन्द्रह सौ शब्दों की जानकारी ही काफी है यानी अगर आपने इतने शब्दों की जानकारी हासिल कर ली तो यकीन मानिए, आप भाषा के लिहाज से हिन्दी के अच्छे टेलीविजन पत्रकार तो जरूर बन जाएँगे । अफसोस की बात है कि ये जानकारी भी टेलीविजन पत्रकारों को भारी लगती है । शब्दों की सही समझ की कमी, भाषा के आधे–अधूरे ज्ञान की वजह से टेलीविजन पत्रकार ऐसी गलतियाँ कर बैठते हैं कि कई बारगी मजाक का पात्र तक बन जाते हैं । यही नहीं, शब्दों के गलत इस्तेमाल से अर्थ का अनर्थ तक हो जाता है । इसलिए पत्रकारिता के लिहाज से भाषा की सही जानकारी बेहद जरूरी है । हिन्दी न्यूज चैनलों की दुनिया भले ही समय के साथ काफी व्यापक होती चली गई हो, लेकिन हकीकत यही है कि आज भी टीवी पत्रकारिता में भाषा को लेकर एक भी ऐसी किताब नहीं है, जो भाषा और पत्रकारिता को जोड़ते हुए एक मुकम्मल जानकारी दे सके । यही परेशानी टीवी पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले छात्र–छात्राओं के साथ है । हिन्दी के प्रोफेसर ही पत्रकारिता के बच्चों को भी पढ़ाते हैं, ऐसे में पत्रकारिता की भाषा का व्यावहारिक ज्ञान कभी भी विद्यार्थियों को सही से नहीं हो पाता और इसका खामियाजा टेलीविजन पत्रकारिता को होता है । टेलीविजन की अपनी एक अलग ही दुनिया होती है । इसकी भाषा आम बोलचाल की भाषा होते हुए भी अलग है । इसकी भाषा मानकता के करीब रहते हुए भी इसके नियमों का पालन कभी नहीं करती । नए–नए शब्द समय और जरूरत के हिसाब से गढ़े जाते हैं तो कई शब्दों को हमेशा के लिए त्याग दिया जाता है । इस भाषा को अंग्रेजी, उर्दू और दूसरी भाषाओं से कोई परहेज नहीं । इसकी भाषा मीडिया के अन्य माध्यमों मसलन अखबार या फिर रेडियो की भाषा से बेहद अलग है ।

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    Harish Chandra Barnwal

    हरीश चंद्र बर्णवाल

    जन्म : पश्चिम बंगाल में आसनसोल के पास नियामतपुर में।

    शिक्षा : दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक (टॉपर) और जामिया मिल्लिया इस्लामिया से टेलीविजन पत्रकारिता में स्नातकोत्तर। मानव अधिकार में पीजी डिप्लोमा।

    पिछले 10 सालों से टेलीविजन पत्रकारिता से जुड़े हैं। आईबीएन 7 से पहले 3 साल तक स्टार न्यूज में कार्यरत रहे।

    प्रकाशित कृतियां : गजलों पर एक किताब ‘लहरों की गूंज’ मुम्बई के परि: श्य प्रकाशन से आ चुकी है। कहानी संग्रह ‘सच कहता हूं’ वाणी प्रकाशन से प्रकाशित।

    सम्मान : ‘रोजगार की तलाश में’ कहानी के लिए हिन्दी अकादमी, दिल्ली सरकार द्वारा पुरस्कृत। ‘यही मुम्बई है’ कहानी के लिए ‘हंस’ पत्रिका द्वारा अखिल भारतीय अमृतलाल नागर पुरस्कार। ‘चौथा कंधा’ कहानी के लिए कथादेश सम्मान। ‘संवेदनहीनता’ कहानी के लिए कादंबिनी पुरस्कार से सम्मानित। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) द्वारा ‘विशिष्ट सम्मान’ से सम्मानित।

    सम्प्रति : IBN7 में एसोसिएट एक्जिक्यूटिव प्रोड्यूसर।

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