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Teen Bahanein

Teen Bahanein

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  • Pages: 99
  • Year: 2017, 1st Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183618410
  •  
    "तुम कहते हो, जीवन सुन्दर है....ठीक है, लेकिन उसके सुन्दर लगने से ही क्या होता है ! हम तीनों बहनों के लिए अभी तक के जीवन में क्या सुन्दर है ? जैसे पौधे को दीमक खा जाती है, उसी तरह हम तीनों जीवन के हाथों में घुटती रही हैं... अरे लो, मैं तो रोने भी लगी-मुझे रोना नहीं चाहिए..." "मुझे लगता है कि मनुष्य के पास एक आस्था होने चाहिए, या और कुछ नहीं तो उसे कोई विश्वास और आस्था खोज लेने चाहिए, वर्ना उसकी जिंदगी सूनी और खोखली हो जाएगी!...आदमी को मालूम तो होना चाहिए कि उसकी जिंदगी का अर्थ क्या है..." "प्यारी बहनों, हमारे जीवन का अंत यहीं नहीं हो जाएगा ! हम लोग जीवित रहेंगी, यह संगीत कैसा आनंददायक, कैसा सुखद है कि मन होता है, थोड़ी देर और चलता रहे, ताकि हम जान ले कि हम किसलिए जिन्दा हैं, हमें पता चल जाए कि हम दुख क्यों भोग रही हैं!" "काश, जो कुछ हमने जिया है, वह सिर्फ जिंदगी का रफ-ड्राफ्ट होता और इसे फेयर करने का एक अवसर हमें और मिलता !" चेखव कि रचनाओं कि आत्मीयता, करूणा और ख़ास किस्म कि निराश उदासी (लगभग आत्मदया जैसी) मुझे बहुत छूती है ! मैं उसके प्रभाव से लगभग मोहाच्छन्न था ! उसी श्रद्धा से मैंने इन नाटकों को हाथ लगाया था ! रूसी भाषा नहीं जानता था, मगर अधिक से अधिक ईमानदारी से उसके नाटकों कि मौलिक शक्ति तक पहुँचता चाहता था ! इसलिए तीन अंग्रेजी अनुवादों को सामने रखकर एक-एक वाक्य पढता और मूल को पकड़ने कि कोशिश करता ! आधार बनाया मोस्को के अनुदाव को ! बाद में सुना, अनुवादों को पाठकों ने पसंद किया, अनेक रंग-संस्थानों और रेडियो इत्यादि ने इन्हें अपनाया, पाठक्रम में भी उन्हें लिया गया !

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    Anton Chekhav

    पिता बन्धुआ मज़दूर थे। उन्होंने मालिक की पूरी क़ीमत चुका कर स्वतन्त्रता ख़रीदी और दुकान शुरू की। बचपन पिता के अनुशासनी अत्याचारों में बीता। लेखन के आधार पर ही डाक्टरी की पढ़ाई की।

    कहानियाँ, नाटक, एकांकी लेखन।

    रंजना श्रीवास्तव

    रचनात्मक अनुवाद के लिए जानी जानेवाली रंजना श्रीवास्तव स्वतन्त्र रूप से लेखन भी करती हैं।

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