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  • Pages: 128
  • Year: 2017, 1st Ed.
  • Binding:  Textbook
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183618601
  •  
    सामाजिक विचार के व्यावहारिक चिन्तक एवं रचनाकार जयप्रकाश कर्दम का यह उपन्यास दलित साहित्य का क्रान्तिधर्मी दस्तावेज है। उपन्यास की कथा से गुजरते हुए महसूस होता है कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी संवैधानिक मूल्यों के परिप्रेक्ष्य में सामाजिक संरचना के सर्जनात्मक साहित्य की ज़मीन की तलाश जरूरी है, ताकि आत्मीय और भावनात्मक प्रसंगों की पृष्ठभूमि में अपनी समझ के तीखे से तीखे सामाजिक-सांस्कृतिक सवालों के समाधान खोजने का उपक्रम किया जा सके। जयप्रकाश कर्दम ने डॉ. अम्बेडकर के जीवन-दर्शन और विचारों को क्रियान्वित करने के लिए कथानायक चन्दन की सृष्टि की है, जो सदियों से अज्ञान और पिछड़ेपन की गति में पड़े हुए दलित समाज को जगाना चाहता है। वह कॉलेज में पढ़ते हुए भी स्कूल चलाता है और बच्चों को स्वयं पढ़ाता है। क्योंकि वह जानता है कि जीवन और समाज में व्याप्त विसंगतियों के खिलाफ लड़ाई जीतने के लिए शिक्षा सबसे ज्यादा मारक और शक्तिशाली शस्त्र है। 'छप्पर' की सबसे महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है—दलित समाज का वैचारिक आधार पर संगठित होना तथा सामन्ती-ब्राह्मणी शोषण-उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव से मुक्ति के लिए अनथक संघर्ष की प्रेरणा। साथ ही सामाजिक सम्मान की भावना जाग्रत कर स्वाभिमान से जीने की ललक पैदा करना। उपन्यासकार ने शिक्षा के महत्त्व को समझते हुए सामाजिक क्रान्ति पर जोर दिया है क्योंकि सांस्कृतिक क्रान्ति के बिना सामाजिक क्रान्ति अधूरी है और इसके बिना दलित समाज का उत्थान और विकास सम्भव नहीं।

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    Jaiprakash Kardam

    जयप्रकाश कर्दम

    जन्म : 05 जुलाई, 1958, ग्राम-इन्दरगढ़ी, हापुड़ रोड, गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) |

    शिक्षा : एम. ए. (दर्शनशास्त्र, हिंदी, इतिहास), पीएच.डी. (हिंदी) |

    प्रकाशन : गूँगा नहीं था मैं, तिनका-तिनका आग, बस्तियों से बाहर, राहुल (कविता); करुणा, श्मशान का रहस्य, छप्पर (उपन्यास); तलाश, खरोंच (कहानी); जेर्मनी में दलित साहित्य : अनुभव और स्मृतियाँ (यात्रा-संस्मरण); मेरे संवाद (साक्षात्कार); श्रीलाल शुक्ल कृत 'राग दरबारी' का समाजशास्त्रीय अध्ययन, इक्कीसवीं सदी में दलित आन्दोलन : साहित्य एवं समाज चिंतन, दलित विमर्श : साहित्य के आईने में. वर्तमान दलित आन्दोलन : दशा और दिशा, हिन्दुत्व और दलित : कुछ प्रश्न कुछ विचार, डॉ. अम्बेडकर, दलित और बौद्धधर्म, समाज, संस्कृति और दलित, दलित साहित्य : सामाजिक बदलाव की पटकथा, दलित कविता : समकालीन परिदृश्य (आलोचना और वैचारिक पुस्तकें); चमार (ब्रिटिश लेखक जी.डब्ल्यू. ब्रिग्स द्वारा लिखित पुस्तक 'दि चमार्स' का हिंदी में अनुवाद); मानवता के दूत, डॉ. अम्बेडकर की कहानी, बुद्ध की शरणागत नारियाँ, बुद्ध और उनके प्रिय शिष्य, महान बौद्ध बालक, आदिवासी देव्कथा-लिंगो, हमारे वैज्ञानिक : सी.वी. रमन (बाल-साहित्य) |

    सम्मान : केन्द्रीय हिंदी संस्थान, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा महापंडित राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार, हिंदी अकादमी दिल्ली द्वारा विशेष योगदान सम्मान सहित अनेक साहित्यिक, सांस्कृतिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित |

    सम्प्रति : निदेशक, केन्द्रीय हिंदी प्रशिक्षण संस्थान, राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय |

    संपर्क : बी-634, डी.डी.ए. फ्लैट्स (चित्रकूट कॉलोनी), ईस्ट ऑफ लोनी रोड, दिल्ली-110093

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