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Dahan

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  • Pages: 167p
  • Year: 2000
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 8171195903
  •  
    पुरुष-शासित समाज में मर्द को क्या कभी अहसास होगा कि औरत युग-युगान्तरों से अपने अन्तस में कितना अभिमान, अपमान, पीड़ा और ग्लानि छिपाये, उसे प्यार करती है ? हज़ार असहमति, आपत्ति, विक्षोभ और असहनीय विसंगतियों के बावजूद, उसके साथ हमक़दम होकर सफ़र जारी रखती है ? महानगर में हुई एक परिचित-सी घटना के सहारे लेखिका सुचित्रा भट्टाचार्य ने इस उपन्यास में वर्तमान समय और समाज की अँधेरी सच्चाइयों और मर्द की तानाशाहियों को क़लमबंद किया है। ‘दहन’ महानगर के टालीगंज इलाके में चार समाज-दुश्मन नौजवानों के अश्लील शिकंजे से किसी गृहवधु को बचाने के लिए अपूर्व साहस से कूद पड़नेवाली एक औरत के तजुर्बे की हक़ीक़त है; उसने पुरुषत्व के अहंकार में औरत को अपने जु़ल्म और अत्याचार का शिकार बनानेवाले मर्दों के ख़िलाफ़ सामाजिक इन्साफ़ की वकालत की; उन्हें उचित सज़ा दिलाने के लिए थाना-पुलिस, कोर्ट-कचहरी तक भी दौड़ लगाने में हिचक नहीं की। अपनी साहसिकता के क्षणिक अभिनन्दन के बाद, उसने भयंकर अचरज के साथ आविष्कार किया कि नाइन्साफियों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठानेवाली और उनसे जूझने को तैयार औरत पर कितने-कितने माध्यमों से, कितनी-कितनी तरह के दबाव उसे निष्क्रिय और तुच्छ बना देते हैं। उसका प्रतिवाद, यहाँ तक कि उस पर लगाये गये अनगिनत लांछन भी उस बर्बर दबाव में पिसकर रह जाते हैं। ‘दहन’ उपन्यास, वर्तमान नारी-स्वातंत्रय का असली चेहरा दिखाता है और पुरुष-शक्ति के नपुंसक और खोखले मूल्यबोध की हक़ीक़त बयान करता है, और वर्तमान समाज और पुरुषों द्वारा औरत की हिम्मत और मुक़ाबले की ताक़त को तोड़ने की साज़िश का पर्दाफ़ाश करता है।

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    Suchitra Bhattacharya

    जन्म: 10 जनवरी, 1950

    कॉलेज जीवन में ही विवाह। सरकारी नौकरी।

    बचपन से ही साहित्य से गहरा लगाव। सन् ’60 के दशक के उत्तरार्द्ध में लेखन की शुरुआत। जीवन के विविध पक्षों और समस्याओं पर सशक्त पकड़ रखने के साथ-साथ, ख़ासकर औरत की व्यथा-कथा, समस्या, यंत्रणा और उपलब्धियों की जीवन्त तसवीर आँकने में विशेष सिद्धहस्त। उनका लेखन, इन्सानी रिश्तों और उनकी आपसी जटिलताओं की बार-बार वकालत करता है।

    कृतियाँ

    मैं हूँ रायकिशोरी, हेमन्त का पंछी, ध्वंसकाल (उपन्यास) खांचा, मैना-तदन्त, एइ माया (कहानी-संग्रह)।

    दहन और परदेस उपन्यासों का अनुवाद हिन्दी में प्रकाशित।

    ‘यही है ज़िन्दगी...’ उपन्यास ‘देश’ पत्रिका में धारावाहिक रूप में प्रकाशित। बहुचर्चित और बहुप्रशंसित। इस उपन्यास पर आधारित हिन्दी टीवी सीरियल शीघ्र टेलिकास्ट होने की प्रतीक्षा में।

    सम्मान: मंजमागुडु तिरुमलम्बा पुरस्कार, ताराशंकर पुरस्कार, साहित्य सेतु पुरस्कार, कथा पुरस्कार वगैरह कई पुरस्कारों से सम्मानित।

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